पटना:बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की दहलीज पर खड़ी महागठबंधन पार्टियां आपस में ही उलझ गई हैं, जो सत्ता पक्ष राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के लिए वरदान साबित हो रही है। राज्य की कम से कम 6 सीटों पर गठबंधन की पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतर आई हैं, जिससे वोटों का बंटवारा तय माना जा रहा है। इसका सबसे ताजा और चर्चित उदाहरण हाजीपुर के वैशाली विधानसभा क्षेत्र से आया है, जहां कांग्रेस ने इंजीनियर संजीव सिंह को टिकट देकर उतारा, तो वहीं राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने अजय कुशवाहा को नामित कर समीकरण उलट दिए। यह अंदरूनी कलह न केवल गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि पहले चरण के नामांकन की अंतिम तारीखों के करीब पहुंचते ही राजनीतिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।
वैशाली में शक्ति प्रदर्शन: JDU की सीट पर महागठबंधन का स्वघात?
वैशाली लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस विधानसभा सीट पर वर्तमान में NDA की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) का कब्जा है, जहां विधायक सिद्धार्थ सुप्रिया पटेल मजबूत पकड़ रखते हैं। लेकिन महागठबंधन के इस आंतरिक टकराव ने स्थानीय समर्थकों को कशमकश में डाल दिया है—किसे असली उम्मीदवार माना जाए? राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह जंग गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन का आईना है, जहां RJD अपनी प्रमुख भूमिका बचाने के लिए आक्रामक रुख अपना रही है। अगर यह विवाद सुलझा नहीं, तो NDA को ‘फ्री पास’ मिल सकता है, खासकर जब वैशाली जैसे कृषि-प्रधान क्षेत्र में वोट बैंक का बंटवारा महागठबंधन के लिए घातक साबित हो। हाल की एक सर्वे में भी यह संकेत मिले हैं कि ऐसे टकराव से NDA को 5-7% अतिरिक्त वोट फायदा हो सकता है।
6 सीटों पर गठबंधन की पार्टियां आमने-सामने: सीट शेयरिंग वार्ताओं का फेल्योर
पिछले 8-10 दिनों से पटना से दिल्ली तक चली सीट बंटवारे की माथापच्ची बेनतीजा रही, जिसके चलते RJD, कांग्रेस और अन्य सहयोगी पार्टियां नामांकन की अंतिम घड़ी में स्वतंत्र रूप से टिकट बांटने लगीं। नतीजा? कम से कम 6 सीटों पर महागठबंधन की पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ खड़ी हो गईं। इनमें से 5 पर कांग्रेस और RJD दोनों ने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि एक पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) [CPIML] और कांग्रेस के उम्मीदवार मैदान में हैं। लालगंज, मच्हलीशहर और अन्य सीटों पर भी इसी तरह की उलझन देखी जा रही है, जहां RJD ने शिवानी शुक्ला और ऋषि मिश्रा जैसे नामों को टिकट दिए। यह स्थिति गठबंधन की कमजोरी को उजागर करती है, जबकि NDA ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए अमित शाह की बिहार यात्रा के दौरान सीट बंटवारे को अंतिम रूप दे दिया। राजनीतिक दिग्गजों का मानना है कि यह कलह महागठबंधन को 10-15 सीटों का नुकसान पहुंचा सकती है, खासकर ग्रामीण और OBC वोट बैंक में।



