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Bihar News: बिहार में सिविल सर्जन का अजीब फरमान, सिर्फ संविदा CHO को रोज फोटो भेजने का आदेश, बाकी को छूट

Bihar News: बिहार के पटना में स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने एक ऐसा आदेश जारी किया है, जो संविदा पर काम करने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) के लिए परेशानी का सबब बन गया है। बिहार सिविल सर्जन फरमान में कहा गया है कि सिर्फ संविदा CHO को रोज सुबह 10 बजे तक अपने कार्यस्थल से जियोटैग फोटो व्हाट्सएप ग्रुप में भेजनी होगी। अगर ऐसा न किया, तो उनकी उपस्थिति शून्य मानी जाएगी और कार्रवाई की जिम्मेदारी खुद उनकी होगी। लेकिन हेल्थ मैनेजर, एकाउंटेंट और एएनएम जैसे अन्य कर्मचारियों को इससे पूरी छूट है। CHO फोटो आदेश विवाद से स्वास्थ्यकर्मी नाराज हैं। उनका कहना है कि यह भेदभाव है। विभाग में तनाव बढ़ रहा है।

Bihar News: पटना सिविल सर्जन का आदेश क्या कहता है? पूरी डिटेल

बिहार स्वास्थ्य विभाग आदेश 30 अक्टूबर 2025 को जारी हुआ। इसमें सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के संविदा CHO को निर्देश दिया गया है। रोजाना सुबह 10 बजे तक कार्यस्थल की जियोटैग फोटो (जिसमें लोकेशन का निशान हो) निर्धारित व्हाट्सएप ग्रुप में भेजो। सिविल सर्जन CHO फोटो फरमान साफ कहता है कि फोटो न भेजने पर उपस्थिति जीरो मानी जाएगी। कार्रवाई का ठीकरा CHO के सिर पर। लेकिन यह नियम सिर्फ संविदा CHO पर लागू है। नियमित कर्मचारी जैसे एएनएम या हेल्थ मैनेजर को कोई फोटो भेजने की जरूरत नहीं।

CHO कर्मचारियों की नाराजगी: भेदभाव क्यों?

बिहार CHO आदेश विवाद से संविदा कर्मचारी बेहद नाराज हैं। स्वास्थ्यकर्मियों के संगठनों ने इसे भेदभावपूर्ण बताया। उनका कहना है कि उपस्थिति चेक करने के लिए फोटो का नियम सब पर लगना चाहिए। सिर्फ संविदा CHO को क्यों निशाना? सिविल सर्जन फरमान विरोध में संगठन बोले कि विभागीय अनुशासन सबके लिए बराबर हो। एएनएम की अनुपस्थिति की शिकायतें आती हैं, लेकिन उनके लिए कोई आदेश क्यों नहीं? संविदा CHO कम पैसे में ज्यादा काम करते हैं, ऊपर से यह अतिरिक्त जिम्मेदारी। कर्मचारी लिखित शिकायत वरीय अधिकारियों को भेजने की तैयारी कर रहे हैं। वे न्याय मांग रहे हैं। डॉ. अविनाश कुमार सिंह दो महीने बाद रिटायर हो रहे हैं, ऐसे में यह आदेश सवाल खड़े कर रहा है।

स्वास्थ्य विभाग में तनाव: क्या होगा आगे?

पटना स्वास्थ्य विभाग विवाद से कर्मचारियों का मनोबल गिर रहा है। आयुष्मान भारत योजना के तहत CHO गांव-गांव स्वास्थ्य सेवा देते हैं। लेकिन ऐसा फरमान से उनका काम प्रभावित हो सकता है। संगठनों ने कहा कि अगर नियम सब पर लागू न हुआ, तो बड़ा विरोध होगा। बिहार सरकार को इसकी जांच करनी चाहिए। विशेषज्ञ कहते हैं कि डिजिटल निगरानी अच्छी है, लेकिन बराबरी जरूरी। बिहार सिविल सर्जन अजीब आदेश ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कर्मचारी उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द सुधार हो।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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