Census 2026: भारत में जनगणना का इतिहास पुराना है, लेकिन इस बार यह प्रक्रिया एक नए और आधुनिक रूप में सामने आने वाली है। देश में पहली बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल तरीके से कराई जाएगी और झारखंड समेत पूरे देश में इसकी शुरुआत 1 अप्रैल 2026 से होने जा रही है। यह जनगणना न केवल तकनीक के लिहाज से अलग होगी, बल्कि इसमें नागरिकों की भागीदारी कानूनी रूप से भी अनिवार्य होगी।
दो चरणों में होगी पूरी जनगणना प्रक्रिया
इस बार की जनगणना को दो अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान मकानों और उनमें उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कुल 33 सवालों के जवाब दर्ज किए जाएंगे। दूसरा चरण फरवरी 2027 से शुरू होगा, जिसमें नागरिकों का नाम, उम्र, लिंग, धर्म और जाति जैसी व्यक्तिगत जानकारियां दर्ज की जाएंगी।
इस तरह पूरी जनगणना प्रक्रिया करीब एक साल से अधिक समय तक चलेगी और इसके आंकड़े देश की नीति-निर्माण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मोबाइल एप से होगा घर-घर डेटा संग्रह
इस डिजिटल जनगणना की सबसे खास बात यह है कि डेटा संग्रह का पूरा काम मोबाइल एप के जरिए किया जाएगा। हर 1000 नागरिकों पर एक सरकारी प्रगणक तैनात किया जाएगा, जो घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेगा। प्रगणक पहले ऑफलाइन डेटा अपने मोबाइल एप में दर्ज करेंगे और बाद में उसे रियल टाइम में ऑनलाइन सर्वर पर अपलोड किया जाएगा।
प्रगणकों की पहचान के लिए संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार द्वारा एक विशेष प्रारूप का पहचान पत्र जारी किया जाएगा। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे दरवाजा खोलने से पहले इस पहचान पत्र को जरूर देखें। इसके अलावा जनगणना कार्य में लगे सरकारी कर्मचारियों को अतिरिक्त मानदेय भी दिया जाएगा।
जानकारी देना कानूनी बाध्यता, नहीं मानने पर सजा
देश के हर नागरिक के लिए जनगणना में सहयोग करना सिर्फ एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि कानूनी दायित्व भी है। जनगणना अधिनियम 1948 और संशोधित नियम 1990 की धारा 11 के अनुसार, जनगणना प्रगणक को सही और पूरी जानकारी देना हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य है।
अगर कोई नागरिक जानकारी देने से इनकार करता है या जानबूझकर गलत सूचना देता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की कैद, एक हजार रुपये तक का जुर्माना या फिर दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं। यह प्रावधान इसलिए बनाया गया है ताकि जनगणना के आंकड़े पूरी तरह सटीक और भरोसेमंद रहें।
तीन डेटा सेंटर से होगी डेटा की सुरक्षा
डिजिटल माध्यम से डेटा संग्रह होने के कारण नागरिकों के मन में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि उनकी व्यक्तिगत जानकारी कितनी सुरक्षित रहेगी। इस पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि एकत्र किया गया डेटा पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा और इसे किसी भी व्यक्ति या निजी संस्था के साथ साझा नहीं किया जाएगा।
इसके लिए बेंगलुरु, लखनऊ और नई दिल्ली में तीन अत्याधुनिक डेटा सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन सेंटरों तक केवल संबंधित क्षेत्र के अधिकृत सरकारी अधिकारी ही पहुंच सकेंगे। आम जनता को इस डेटा का एक्सेस किसी भी स्थिति में नहीं मिलेगा।
जनगणना क्यों है इतनी जरूरी?
जनगणना के आंकड़े सरकार की योजनाओं और नीतियों की नींव होते हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, रोजगार और सामाजिक कल्याण से जुड़ी तमाम केंद्रीय और राज्य सरकार की योजनाएं जनगणना के आंकड़ों पर ही आधारित होती हैं। देश में कितनी आबादी है, कहां कितने लोग रहते हैं, कितने घरों में बिजली और पानी की सुविधा है, इन सबका सटीक अनुमान जनगणना से ही मिलता है।
भारत में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। 2021 की जनगणना कोविड महामारी के कारण नहीं हो सकी थी। इस तरह करीब 15 साल के लंबे अंतराल के बाद हो रही यह जनगणना और भी अहम हो जाती है क्योंकि इस दौरान देश की जनसंख्या, जीवनस्तर और शहरीकरण में बड़े बदलाव आए हैं।
नागरिकों से अपील – सहयोग करें, सही जानकारी दें
प्रशासन की ओर से नागरिकों से आग्रह किया गया है कि जब भी प्रगणक उनके दरवाजे पर आए, तो उनके साथ पूरा सहयोग करें और सभी सवालों के सही जवाब दें। किसी भी तरह की आशंका होने पर प्रगणक का पहचान पत्र मांगा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर स्थानीय प्रशासन से भी संपर्क किया जा सकता है।
याद रखें कि जनगणना में दी गई जानकारी न केवल सरकारी योजनाओं को बेहतर बनाने में मदद करती है, बल्कि आपके क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी संसाधन तय करने में भी निर्णायक भूमिका निभाती है।
Census 2026: निष्कर्ष
Census 2026 भारत की जनगणना के इतिहास में एक नया अध्याय लिखने जा रही है। पहली बार डिजिटल तकनीक का उपयोग, तीन मजबूत डेटा सेंटर और कानूनी बाध्यता के साथ यह जनगणना पहले से कहीं अधिक सटीक और व्यापक होने की उम्मीद है। झारखंड सहित पूरे देश में 1 अप्रैल से शुरू हो रही इस प्रक्रिया में हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है और यह भागीदारी ही एक बेहतर और सुनियोजित भारत की नींव रखेगी।



