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CG News: बस्तर में मिली 3.65 अरब साल पुरानी चट्टान, सिंहभूम को पीछे छोड़ भारत का सबसे प्राचीन भूखंड

CG News: छत्तीसगढ़ के दक्षिण-पश्चिम बस्तर के जंगलों के नीचे वैज्ञानिकों ने करीब 3.65 अरब वर्ष पुरानी चट्टान की पहचान की है। यह भारतीय भूभाग पर अब तक पहचाने गए सबसे पुराने चट्टानी अवशेष के रूप में सामने आई है। इससे पहले झारखंड का सिंहभूम सबसे प्राचीन चट्टानी क्षेत्र माना जाता था।

नई खोज से भारत के भूवैज्ञानिक इतिहास का रिकॉर्ड करीब 15 करोड़ वर्ष और पीछे चला गया है। चट्टान उस दौर की है जब पृथ्वी अपनी शुरुआती पर्पटी के निर्माण के चरण में थी। अध्ययन भोपालपट्टनम-बिजापुर कॉरिडोर के आसपास हुआ है और यह क्षेत्र बस्तर क्रेटन का हिस्सा है। शोध में चट्टानों के तीन प्राचीन भूवैज्ञानिक चरण और प्रारंभिक प्लेट टेक्टोनिक्स के संकेत भी मिले हैं।

CG News: बस्तर की खोज ने पुराना रिकॉर्ड कैसे तोड़ा

बस्तर में इससे पहले किए गए अध्ययनों में करीब 3.56 अरब वर्ष पुरानी चट्टानों की मौजूदगी सामने आई थी। नई पहचान ने उस आंकड़े को करीब 150 मिलियन वर्ष पीछे कर दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह चट्टान पृथ्वी की शुरुआती परत बनने वाले समय से जुड़ी है। इसी वजह से इसे देश के भूवैज्ञानिक इतिहास में बड़ी घटना माना जा रहा है।

सिंहभूम अब शीर्ष पर नहीं रहा

लंबे समय तक झारखंड का सिंहभूम भारत के सबसे प्राचीन चट्टानी क्षेत्र के तौर पर जाना जाता था। बस्तर की नई चट्टान उस दावे को पीछे छोड़ गई है। दोनों क्षेत्रों की तुलना अब वैज्ञानिक चर्चा का विषय बन गई है। बस्तर क्रेटन में मिली यह चट्टान देश के सबसे पुराने भूखंड का नया दावेदार बन गई है।

CG News: खोज कहां हुई और क्रेटन क्या है

यह खोज भोपालपट्टनम-बिजापुर कॉरिडोर के आसपास दर्ज की गई। यह इलाका बस्तर क्रेटन का हिस्सा है। क्रेटन महाद्वीपीय भू-पर्पटी का वह प्राचीन हिस्सा होता है जो करोड़ों वर्षों के टकराव, दबाव, दफन होने और पिघलने के बावजूद बचा रहता है। इसी स्थिरता के कारण यहां इतनी पुरानी चट्टान सुरक्षित रह सकी।

शोध का शीर्षक और इसमें कौन शामिल रहे

अध्ययन का शीर्षक “Petrochronological Constraints on Eoarchean Subduction: Evidence from the Southwest Bastar Craton, India” है। इसमें आईआईएसईआर भोपाल के प्रोफेसर प्रीतम नासिपुरी और कौसिक सतपथी शामिल रहे। कोरिया बेसिक साइंस इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर कीवुक यी तथा पूर्व आईआईटी खड़गपुर प्रोफेसर अभिजित भट्टाचार्य भी इस कार्य से जुड़े रहे।

CG News: तीन अलग भूवैज्ञानिक चरण सामने आए

शोधकर्ताओं के अनुसार क्षेत्र में करीब 3.65 अरब वर्ष पहले एक प्रमुख भूवैज्ञानिक घटना हुई। इसके बाद 3.64 से 3.60 अरब वर्ष के बीच एक और चरण आया। इसके अलावा 3.44 से 3.40 अरब वर्ष पहले चट्टानों के दोबारा सक्रिय या पुनर्गठित होने के प्रमाण भी मिले। ये तीन चरण क्षेत्र के लंबे इतिहास को रेखांकित करते हैं।

सबसे पुरानी चट्टान किस प्रकार की है

अध्ययन में दो अलग प्रकार की चट्टानों की पहचान हुई है। इनमें सबसे पुरानी नीस है, जो धारियों वाली चट्टान होती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इसके स्वरूप में पृथ्वी के शुरुआती इतिहास के जटिल बदलाव दर्ज हैं। यही चट्टान इस खोज का केंद्र बिंदु बनी हुई है।

CG News: चट्टान कितनी गहराई और कितने तापमान पर बनी

प्रोफेसर प्रीतम नासिपुरी के अनुसार चट्टान गहराई में बनी। इसे गर्म होने, आंशिक रूप से पिघलने और दोबारा बनने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। यह प्रक्रिया सतह से करीब 30 से 50 किलोमीटर नीचे हुई होगी। तापमान संभवतः एक हजार डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा होगा।

प्रारंभिक प्लेट टेक्टोनिक्स के संकेत क्यों महत्वपूर्ण हैं

रासायनिक और समस्थानिक साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि 3.6 अरब वर्ष से भी पहले पृथ्वी पर सबडक्शन से जुड़ी प्रक्रियाएं सक्रिय हो सकती थीं। ये प्रक्रियाएं आधुनिक प्लेट टेक्टोनिक्स की शुरुआती पूर्वज मानी जा सकती हैं। बस्तर की यह चट्टान उसी शुरुआती गति का प्रमाण देती दिख रही है।

CG News: दुनिया के पुराने मैग्मैटिक चार्नोकाइट्स से क्या संबंध

शोधकर्ताओं के अनुसार बस्तर की 3.64 से 3.60 अरब वर्ष पुरानी चट्टानें दुनिया में ज्ञात सबसे पुराने मैग्मैटिक चार्नोकाइट्स में शामिल हो सकती हैं। यह पहलू शुरुआती पृथ्वी के विकास को समझने में मददगार माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ का यह कोना अब अंतरराष्ट्रीय भूवैज्ञानिक चर्चा में आ गया है।

दक्षिण-पश्चिम बस्तर में मिली 3.65 अरब वर्ष पुरानी चट्टान ने भारत के सबसे प्राचीन चट्टानी अवशेष का नया अध्याय खोल दिया है। सिंहभूम का पुराना स्थान अब चुनौती में है और देश का भूवैज्ञानिक रिकॉर्ड करीब पंद्रह करोड़ वर्ष और पीछे चला गया है। आईआईएसईआर भोपाल समेत भारतीय और विदेशी वैज्ञानिकों के इस अध्ययन ने तीन प्राचीन चरण, गहरी गर्मी में बनी नीस और प्रारंभिक सबडक्शन के संकेत एक साथ रखे हैं।

बस्तर क्रेटन की यह खोज न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरी पृथ्वी की शुरुआती पर्पटी को समझने के लिए अहम मानी जा रही है। आगे और विस्तृत अध्ययन तय करेंगे कि यह भूखंड वैश्विक आर्कियन इतिहास में कितना बड़ा स्थान पाता है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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