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दैनिक पंचांग 07::04::2025 सोमवार महर्षि पाराशर पंचांग

🌺🌺**|| जय श्री राधे ||***
🌺🙏 महर्षि पाराशर पंचांग 🙏🌺🙏🌺🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌺🙏
****ll जय श्री राधे ll****

दिनांक:- 07/04/2025, सोमवार
दशमी, शुक्ल पक्ष,चैत्र””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

तिथि———– दशमी 19:59:32 तक
पक्ष———————— शुक्ल
नक्षत्र———— पुष्य 06:23:49
योग————- धृति 18:17:36
करण———– तैतुल 07:36:12
करण————– गर 19:59:32
वार———————- सोमवार
माह————————- चैत्र
चन्द्र राशि—————— कर्क
सूर्य राशि—————— मीन
रितु———————— वसंत
आयन—————— उत्तरायण
संवत्सर—————– विश्वावसु
संवत्सर (उत्तर) —————सिद्धार्थी
विक्रम संवत————— 2082
गुजराती संवत————– 2081
शक संवत—————– 1947
कलि संवत—————- 5126

वृन्दावन
सूर्योदय————– 06:04:20
सूर्यास्त————– 18:38:33
दिन काल———— 12:34:13
रात्री काल————- 11:24:42
चंद्रोदय————– 13:45:40
चंद्रास्त—————- 27:31:49
लग्न—- मीन 23°15′ , 353°15′
सूर्य नक्षत्र—————– रेवती
चन्द्र नक्षत्र——————- पुष्य
नक्षत्र पाया—————— रजत
🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩
ड—- पुष्य 06:23:49
डी—- आश्लेषा 12:43:03
डू—- आश्लेषा 19:04:33
डे—- आश्लेषा 25:28:15
💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮
ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
============================
सूर्य= मीन 23°40, रेवती 2 दो
चन्द्र= कर्क 16°30 , पुष्य 4 ड
बुध =मीन 02°52 ‘ पू o भा o 4 दी
शु क्र= मीन 01°05, पू o फाo’ 4 दी
मंगल=कर्क 01°30 ‘ पुनर्वसु ‘ 4 ही
गुरु=वृषभ 22°30 रोहिणी, 4 वु
शनि=मीन 00°28 ‘ पू o भा o , 4 दी
राहू=(व) मीन 02°15 पू o भा o, 4 दी
केतु= (व)कन्या 02°15 उ oफा o 2 टो
============================
🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 🚩💮🚩
राहू काल 07:39 – 09:13 अशुभ
यम घंटा 10:47 – 12:21 अशुभ
गुली काल 13:56 – 15: 30अशुभ
अभिजित 11:56 – 12:47 शुभ
दूर मुहूर्त 12:47 – 13:37 अशुभ
दूर मुहूर्त 15:17 – 16:08 अशुभ
वर्ज्यम 19:56 – 21:38 अशुभ
प्रदोष 18:39 – 20:57 शुभ
🚩गंड मूल 06:24 – अहोरात्र अशुभ
💮चोघडिया, दिन
अमृत 06:04 – 07:39 शुभ
काल 07:39 – 09:13 अशुभ
शुभ 09:13 – 10:47 शुभ
रोग 10:47 – 12:21 अशुभ
उद्वेग 12:21 – 13:56 अशुभ
चर 13:56 – 15:30 शुभ
लाभ 15:30 – 17:04 शुभ
अमृत 17:04 – 18:39 शुभ
🚩चोघडिया, रात
चर 18:39 – 20:04 शुभ
रोग 20:04 – 21:30 अशुभ
काल 21:30 – 22:55 अशुभ
लाभ 22:55 – 24:21* शुभ
उद्वेग 24:21* – 25:46* अशुभ
शुभ 25:46* – 27:12* शुभ
अमृत 27:12* – 28:38* शुभ
चर 28:38* – 30:03* शुभ
💮होरा, दिन
चन्द्र 06:04 – 07:07
शनि 07:07 – 08:10
बृहस्पति 08:10 – 09:13
मंगल 09:13 – 10:16
सूर्य 10:16 – 11:19
शुक्र 11:19 – 12:21
बुध 12:21 – 13:24
चन्द्र 13:24 – 14:27
शनि 14:27 – 15:30
बृहस्पति 15:30 – 16:33
मंगल 16:33 – 17:36
सूर्य 17:36 – 18:39
🚩होरा, रात
शुक्र 18:39 – 19:36
बुध 19:36 – 20:33
चन्द्र 20:33 – 21:30
शनि 21:30 – 22:27
बृहस्पति 22:27 – 23:24
मंगल 23:24 – 24:21
सूर्य 24:21* – 25:18
शुक्र 25:18* – 26:15
बुध 26:15* – 27:12
चन्द्र 27:12* – 28:09
शनि 28:09* – 29:06
बृहस्पति 29:06* – 30:03
🚩उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩

मीन > 05:00 से 06:22 तक
मेष > 06:22 से 08:02 तक
वृषभ > 08:02 से 10:00 तक
मिथुन > 10:00 से 12:18 तक
कर्क > 12:18 से 14:34 तक
सिंह > 14:34 से 16:48 तक
कन्या > 16:48 से 19:04 तक
तुला > 19:04 से 21:16 तक
वृश्चिक > 21:16 से 23:40 तक
धनु > 23:44 से 01:56 तक
मकर > 01:56 से 03:30 तक
कुम्भ > 03:30 से 04:54 तक
=======================

🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार
(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट
नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।
💮दिशा शूल ज्ञान————-पूर्व
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll
🚩 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।
10 + 2 + 1 = 13 ÷ 4 = 1 शेष
पाताल लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l
🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩
सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है
शुक्र ग्रह मुखहुति
💮 शिव वास एवं फल -:
10 + 10 + 5 = 25 ÷ 7 = 4 शेष
सभायां = संताप कारक
🚩भद्रा वास एवं फल -:
स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।
💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮
*सर्वार्थ सिद्धि योग 06:24 तक
💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮
यस्यार्स्थास्तस्य मित्राणि यस्यार्स्थास्तस्य बान्धवाः ।
यस्यार्थाः स पुमाल्लोके यस्यार्थाः सचजीवति ।।
।। चा o नी o।।
वह व्यक्ति जिसके पास धन है उसके पास मित्र और सम्बन्धी भी बहोत रहते है. वही इस दुनिया में टिक पाता है और उसीको इज्जत मिलती है.
🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩
गीता -:दैवासुरसम्पद्विभागयोग :- अo-16
असौ मया हतः शत्रुर्हनिष्ये चापरानपि।,
ईश्वरोऽहमहं भोगी सिद्धोऽहं बलवान्सुखी॥,
वह शत्रु मेरे द्वारा मारा गया और उन दूसरे शत्रुओं को भी मैं मार डालूँगा।, मैं ईश्वर हूँ, ऐश्र्वर्य को भोगने वाला हूँ।, मै सब सिद्धियों से युक्त हूँ और बलवान्‌ तथा सुखी हूँ॥,14॥,
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