West Bengal Politics: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक राहुल नवीन ने पश्चिम बंगाल में कोयला तस्करी मामले से जुड़े आई-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा कथित बाधा डालने पर गंभीर कदम उठाया है। शुक्रवार को ईडी निदेशक ने राज्य सरकार के उन अधिकारियों और पुलिस अफसरों की पूरी जानकारी मांगी है, जो छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी के साथ मौजूद थे। इस घटना से पश्चिम बंगाल में नया सियासी भूचाल मचने की आशंका जताई जा रही है।
छापेमारी के दौरान क्या हुआ?

इस साल जनवरी की शुरुआत में ईडी ने कोयला तस्करी मामले में आई-पैक के साल्ट लेक कार्यालय और इसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के घर पर एक साथ छापेमारी की। छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस अफसरों के साथ वहां पहुंच गईं। आरोप है कि ममता बनर्जी ने कई फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज अपने साथ ले लिया। ईडी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई जांच को प्रभावित करने वाली थी।
ईडी निदेशक राहुल नवीन गुरुवार शाम को कोलकाता पहुंचे और तीन दिवसीय दौरे पर हैं। शुक्रवार को उन्होंने ईडी के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय में लंबी बैठक की। इस बैठक में कई हाई-प्रोफाइल वित्तीय अनियमितता मामलों की जांच की समीक्षा हुई। सूत्रों के अनुसार, बैठक में विशेष रूप से आई-पैक छापेमारी पर फोकस रहा।
ईडी निदेशक ने क्या पूछा?
सूत्रों ने बताया कि राहुल नवीन ने बैठक में उन अधिकारियों से सवाल किए जो छापेमारी के दौरान मौजूद थे। उन्होंने पूछा:
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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मौजूद अधिकारियों और पुलिस अफसरों का व्यवहार और बॉडी लैंग्वेज कैसा था?
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क्या वे ईडी अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहे थे या बाधा डाल रहे थे?
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मुख्यमंत्री की टीम ने किन फाइलों और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों को साथ ले जाया?
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क्या कोई दस्तावेज या डिवाइस जब्त करने से रोका गया?
ईडी निदेशक ने कोलकाता में एजेंसी की कानूनी टीम के साथ भी इस मामले पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कोयला तस्करी मामले सहित अन्य भ्रष्टाचार के मामलों में जांच की प्रगति की समीक्षा की। अधिकारियों ने सभी मामलों पर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें जांच का वर्तमान चरण और आगे की कार्रवाई का पूरा विवरण शामिल था।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का कहना है कि ईडी केंद्र सरकार की एजेंसी है और वह राज्य सरकार को निशाना बना रही है। टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया कि छापेमारी राजनीतिक बदले की कार्रवाई है।
वहीं, बीजेपी ने ममता बनर्जी पर हमला बोला। बीजेपी नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री ने जांच में बाधा डाली, जो गैर-कानूनी है। पार्टी ने मांग की कि ईडी इस मामले में सख्त कार्रवाई करे और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
कोयला तस्करी मामले की पृष्ठभूमि
कोयला तस्करी का मामला पिछले कई सालों से चल रहा है। ईडी ने इस मामले में कई बड़े नेताओं, अधिकारियों और व्यापारियों की जांच की है। आई-पैक, जो टीएमसी से जुड़ा माना जाता है, इस जांच का केंद्र बना हुआ है। प्रतीक जैन और आई-पैक पर आरोप है कि उन्होंने कोयला तस्करी से मिले काले धन को राजनीतिक फंडिंग में इस्तेमाल किया।
ईडी ने पहले भी कई दौर में छापेमारी की थी। इस बार की छापेमारी में मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत हस्तक्षेप सबसे बड़ा विवाद का कारण बना। ईडी का कहना है कि जांच एजेंसी को बिना किसी बाधा के काम करने का अधिकार है।
West Bengal Politics: आगे क्या होगा?
ईडी निदेशक राहुल नवीन के इस कदम से अब मामला और गंभीर हो गया है। राज्य सरकार के अधिकारियों और पुलिस अफसरों की रिपोर्ट आने के बाद ईडी आगे की कार्रवाई तय करेगी। संभावना है कि कुछ अधिकारियों पर जांच या कार्रवाई हो सकती है।
यह घटना पश्चिम बंगाल में केंद्र-राज्य विवाद को और बढ़ा सकती है। ममता बनर्जी पहले से ही ईडी और सीबीआई पर राजनीतिक दबाव का आरोप लगा रही हैं। अब ईडी निदेशक की रिपोर्ट मांगने से नया दौर शुरू हो गया है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह मामला लंबे समय तक चर्चा में रहेगा। ईडी की जांच और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया दोनों पर सभी की नजरें टिकी हैं।



