Jharkhand Nikay Chunav: झारखंड में नगर निकाय चुनाव 2026 की आज सुबह 8 बजे से शुरू हुई मतगणना के साथ ही राज्य की राजनीतिक तस्वीर साफ होने लगी है। 48 शहरी स्थानीय निकायों में हुए चुनाव के नतीजे आज पार्षदों के लिए घोषित किए जा रहे हैं, जबकि महापौर पद के परिणामों के लिए कल तक इंतजार करना होगा। यह चुनाव न केवल राजनीतिक दलों के लिए बल्कि मतदाताओं के लिए भी ऐतिहासिक रहा है क्योंकि 18 सालों बाद बैलेट पेपर का उपयोग हुआ है।
61.84% रहा राज्य भर का मतदान प्रतिशत

झारखंड के 48 शहरी निकायों में 23 फरवरी को हुए चुनाव में लगभग 61.84% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। राजधानी रांची में कम मतदान ने सबको चौंका दिया, जहां केवल 43% वोटिंग हुई जबकि सरायकेला खरसावां में 75% से अधिक मतदान दर्ज किया गया। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मतदाताओं का उत्साह शहरी क्षेत्रों के मुकाबले कहीं अधिक दिखा, जो राज्य के विकास एजेंडे की ओर संकेत करता है।
झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, राज्य भर में कुल 1309 काउंटिंग टेबल्स पर वोटों की गिनती की जा रही है। हर काउंटिंग सेंटर पर भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है और पुलिस बल की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित की गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न घटे।
6118 उम्मीदवार, लेकिन 41 पार्षद पहले ही निर्वाचित
इस चुनाव में कुल 6118 उम्मीदवारों ने अपनी राजनीतिक किस्मत आजमाई। महापौर और अध्यक्ष पद के लिए 562 उम्मीदवार मैदान में थे जबकि वार्ड पार्षदों के लिए 5562 उम्मीदवार थे। लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि मतदान से पहले ही 41 पार्षद निर्विरोध चुने जा चुके थे। मानगो नगर निगम के एक वार्ड में उम्मीदवार की मृत्यु के कारण चुनाव नहीं हो सका, जिससे वह सीट खाली रही।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम), भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों ने इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी। इन दलों के सैकड़ों कार्यकर्ता काउंटिंग सेंटरों पर मौजूद हैं और हर राउंड के बाद अपने प्रत्याशियों की स्थिति जान रहे हैं।
18 साल बाद बैलेट पेपर की वापसी, गणना में लगा समय
झारखंड नगर निकाय चुनाव 2026 की सबसे बड़ी विशेषता बैलेट पेपर का उपयोग थी। वर्ष 2008 से लेकर 2026 तक राज्य में लगातार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) का उपयोग होता रहा, लेकिन वर्ष 2026 में बैलेट पेपर की वापसी ने सबको चौंका दिया। झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने EVM की कमी और तकनीकी समस्याओं का हवाला देते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने का निर्णय लिया।
झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “EVM की तकनीकी खराबी और उसकी उपलब्धता की कमी के कारण बैलेट पेपर का उपयोग करना पड़ा। हालांकि कुछ राजनीतिक दलों ने इस निर्णय पर सवाल उठाए थे, लेकिन हमने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बैलेट पेपर प्रणाली को चुना।”
बैलेट पेपर के उपयोग से वोटों की गिनती में अधिक समय लगता है क्योंकि पहले मतपेटियों को सील करना पड़ता है, फिर उनके अंदर से बैलेट पेपर निकालना और उन्हें छाँटना पड़ता है। यही कारण है कि परिणामों की घोषणा में थोड़ा अधिक समय लग रहा है।
आज पार्षदों के नतीजे, कल महापौर की पहचान
मतगणना के कार्यक्रम के अनुसार, आज केवल पार्षदों के परिणाम घोषित किए जाएंगे। महापौर और नगर परिषद अध्यक्षों की किस्मत का फैसला 28 फरवरी को होगा। यह निर्णय काउंटिंग प्रोसेस को आसान बनाने और परिणाम आने में लगने वाले समय को कम करने के लिए लिया गया है।
रांची, धनबाद, जमशेदपुर (मानगो), आदित्यपुर, हजारीबाग, देवघर, गिरिडीह, चास (बोकारो) और मेदिनीनगर (पलामू) जैसे प्रमुख शहरों में महापौर पद के लिए मतदान हुआ था। इन शहरों के महापौर पद के लिए आज शाम तक प्रत्याशियों की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, जबकि कल महापौर का चुनाव होगा।
राजनीतिक दलों का प्रदर्शन और शहरी आधार की स्थिति
झारखंड नगर निकाय चुनाव राज्य के राजनीतिक दलों के शहरी आधार की परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। सत्तारूढ़ जेएमएम और मुख्य विपक्षी बीजेपी दोनों ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। कांग्रेस भी अपनी शहरी स्थिति सुधारने की कोशिश में है।
राज्य के राजनीतिक विश्लेषक डॉ. आलोक रंजन का मानना है, “नगर निकाय चुनाव सीधे तौर पर शहरी विकास के मुद्दों पर जनमत का प्रतिबिंब होते हैं। यह चुनाव न केवल दलों की लोकप्रियता बल्कि उनकी संगठनात्मक क्षमता और स्थानीय नेतृत्व के विकास को भी दर्शाता है।”
राजनीतिक दलों ने इस चुनाव में शहरी स्वच्छता, जल प्रबंधन, ट्रैफिक जाम, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया था। चुनाव प्रचार के दौरान उम्मीदवारों ने स्थानीय समस्याओं को हल करने के अपने वादे दोहराए थे।
प्रमुख शहरों की स्थिति पर सबकी नज़रें
अलग-अलग शहरों में मतदान प्रतिशत में बड़ा अंतर देखा गया। रांची में केवल 43% मतदान ने सबको चौंका दिया, जबकि हजारीबाग, गोड्डा और पाकुड़ जैसे छोटे शहरों में 65% से अधिक मतदान हुआ। इस अंतर ने शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के बीच के विकास अंतराल को उजागर किया है।
रांची के एक स्थानीय मतदाता रामेश्वर सिंह ने कहा, “विकास का वादा था, लेकिन सुविधाओं का हाल ये है। शायद इसी कारण लोगों ने मतदान नहीं किया।” वहीं दूसरी ओर, सरायकेला की मतदाता रानी देवी ने कहा, “हमारे इलाके में विकास की जरूरत थी और हमने उसी आधार पर अपना निर्णय लिया।”
परिणामों का भविष्य की राजनीति पर प्रभाव
नगर निकाय चुनावों के परिणाम न केवल वर्तमान राजनीतिक स्थिति को प्रभावित करेंगे, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनावों की रूपरेखा भी तैयार करेंगे। शहरी क्षेत्रों में प्रदर्शन राजनीतिक दलों के लिए मजबूत आधार बनाने में मदद करेगा।
झारखंड में शहरी मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। राज्य की शहरी आबादी कुल आबादी का लगभग 28% है और यह आंकड़ा हर साल बढ़ रहा है। इसलिए नगर निकाय चुनावों का महत्व और भी बढ़ जाता है।
काउंटिंग प्रोसेस में सख्ती और पारदर्शिता
झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने काउंटिंग प्रोसेस में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। हर काउंटिंग सेंटर पर CCTV कैमरे लगाए गए हैं और हर राउंड की जानकारी मीडिया को दी जा रही है।
एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी ने बताया, “हम पूरी पारदर्शिता के साथ गणना कर रहे हैं। यदि किसी भी प्रकार की आपत्ति होगी तो उसका तुरंत समाधान किया जाएगा। राज्य की जनता का विश्वास बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है।”
Jharkhand Nikay Chunav: अंतिम अनुमान और रुझान
शुरुआती रुझान सुबह 10 बजे के आसपास आने की संभावना है। छोटे निकायों के परिणाम पहले आएंगे, जबकि रांची और धनबाद जैसे बड़े शहरों के परिणाम आने में थोड़ा अधिक समय लग सकता है। रात 8 बजे तक सभी पार्षदों के परिणाम आने की संभावना है और कल तक महापौर पद के परिणाम स्पष्ट हो जाएंगे।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह चुनाव राज्य की शहरी जनता की प्राथमिकताएं दिखाएगी और नगर निकायों में किस पार्टी का शासन होगा, इसका फैसला कल हो जाएगा। काउंटिंग प्रोसेस के साथ-साथ राज्य की राजनीतिक गतिविधियों में भी तेजी आ गई है।
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