वाराणसी: रात करीब 12:04 बजे गोवा पुलिस को पहली कॉल आई – अरपोरा में बिर्च बाय रोमियो लेन जल रहा है। लोग चीख रहे थे, धुएं में दम घुट रहा था। और ठीक उसी वक्त दिल्ली में सौरभ और गौरव लूथरा अपना बैग पैक कर रहे थे। सुबह 5:30 बजे इंडिगो 6E 1073 फ्लाइट ने उड़ान भरी – फुकेत के लिए। “जब 25 लाशें ठंडी हो रही थीं, दो भाई 30 हजार फीट ऊपर कॉफी पी रहे थे।”
6 घंटे में कैसे प्लान कर लिया सब कुछ
पुलिस ने बताया – आग की खबर आते ही लूथरा ब्रदर्स ने दिल्ली के घर से निकलने की तैयारी शुरू कर ली। रात 3 बजे के करीब दिल्ली पहुंचे। सुबह 5:30 बजे फ्लाइट। “जिस रफ्तार से वो भागे, लगता है प्लान पहले से तैयार था।” लुकआउट नोटिस शाम को निकला, तब तक प्लेन फुकेत लैंड कर चुका था।
वो इंस्टा स्टोरी जो गुस्सा नहीं, बस दर्द देता है
आग के ठीक अगले दिन सौरभ लूथरा ने इंस्टाग्राम स्टोरी डाली – “हम बहुत दुखी हैं। परिवारों की हरसंभव मदद करेंगे…” “जब मदद करनी थी तब भाग गए, अब स्टोरी डालकर दुख जता रहे हैं।” एक विधवा ने पूछ रही है – “मदद करनी थी तो भागते क्यों?”
मनोविज्ञान कहता है – ये “मोरल डिसइंगेजमेंट” की आखिरी स्टेज है
जब इंसान इतना पैसा और पावर कमा लेता है कि दूसरी जिंदगियाँ सिर्फ़ “इंसीडेंट” लगने लगती हैं। “जब 25 मौतें “unfortunate incident” बन जाएँ, तो इंसानियत कहाँ बची रहती है?” ये वो पल था जब पल जब पावर ने इंसान को इंसान से अलग कर दिया।
वो 25 परिवार आज भी इंतज़ार कर रहे हैं
एक माँ अपने बेटे का फोन उठने का इंतज़ार कर रही है। एक पत्नी सोच रही है – “वो आखिरी बार “लव यू” बोला था, मैंने सुना नहीं था।” एक बच्ची पूछ रही है – “पापा कब आएँगे?” और मालिक फुकेत की बीच पर कॉकटेल पी रहे हैं। “सत्ता और पैसा तुम्हें देश से भागने की ताकत दे सकता है, लेकिन उन आँसुओं से नहीं बचा सकता।”

पुलिस अब थाईलैंड के पीछे हाथ धोकर पड़ी है
भारत और थाईलैंड के बीच एक्सट्राडिशन ट्रीटी है। CBI ब्लू नोटिस निकालने वाली है। पुलिस कह रही है – “जल्दी ही वापस लाएँगे।” लेकर आएंगे। “कानून देर से चलता है, लेकिन चलता ज़रूर है।”
आखिरी बात – जो रात भर सोने नहीं देगी 25 लाशें अभी भी मुर्दाघर में हैं। 25 परिवार अभी भी सदमे में हैं। और दो भाई फुकेत की समुद्र तट पर बैठकर सोच रहे होंगे – “अब क्या?”
“जब तुम भागते हो, तुम सिर्फ़ पुलिस से नहीं, खुद के जमीर से भी भागते हो। और जमीर तुम्हें ज़िंदगी भर सताता है।”
उम्मीद है जल्द न्याय होगा। उम्मीद है उन 25 आत्माओं को शांति मिलेगी। औश उन परिवारों को हिम्मत मिलेगी।दुआ कीजिए। बस दुआ ही बची है। अब के लिए। भगवान उन 25 आत्माओं को शांति दे। और हमें इतनी हिम्मत दे कि हम कभी ऐसी लापरवाही न होने दें।



