नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के प्रमुख ए.पी. सिंह ने हालिया ऑपरेशन “सिंदूर” का हवाला देते हुए कहा है कि उस अभियान के दौरान पाकिस्तान को भारी क्षति उठानी पड़ी। ए.पी. सिंह के बयान के मुताबिक, भारतीय सेनाओं ने सीमापार जाकर लक्ष्यों को निशाना बनाया और ऑपरेशन ने पाकिस्तान‑अधारित आतंकी ढांचों तथा सैन्य संसाधनों को प्रभावित किया।
एयर चीफ ने मीडिया से कहा कि ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान पर इतना दबाव पड़ा कि उसे “भारी कीमत” चुकानी पड़ी। उन्होंने दावे किए कि अभियान के दौरान पाकिस्तान के 4–5 फाइटर जेट नष्ट किए गए — जिनमें JF‑16 जैसा प्लेटफॉर्म भी शामिल बताया गया — तथा पाकिस्तानी मिसाइल प्रणालियों, रडार और कुछ एयरफील्ड को नुकसान पहुंचा। ए.पी. सिंह ने यह भी कहा कि भारतीय मिसाइल और वायु‑रक्षा प्रणालियाँ लक्ष्य हिट करने में सक्षम रहीं और सीमा के भीतर 200 किलोमीटर तक प्रभावी कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई में आम नागरिकों को कोई नुकसान नहीं पहुँचा।
एयर चीफ ने ऑपरेशन का नारा देते हुए कहा कि यह इतिहास में याद रखा जाएगा और वे मानते हैं कि इसने वायु‑शक्ति की सीमा और प्रभाव का स्पष्ट संदेश भेजा है। उनके शब्दों में, “जब भी भारतीय वायुसेना की जरूरत पड़ीगी, हम अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।”
ध्यान देने योग्य है कि ऊपर उद्धृत सभी विवरण ए.पी. सिंह के वक्तव्य पर आधारित हैं, सरकारी सुरक्षा संस्थानों के उच्च‑स्तरीय बयान अक्सर ऑपरेशन की सफलता का वर्णन करते हैं, परन्तु ऐसे आंकड़े (जैसे विमानों की संग्या, किसी विशेष सिस्टम के ठीक हुए नुकसान, तथा हमले से हुई पर्यवेक्षित क्षति) को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करने के लिए अतिरिक्त स्रोतों या तटस्थ निगरानी रिपोर्टों की आवश्यकता होती है। इसलिए रिपोर्ट में उल्लिखित क्षति‑आंकड़े फिलहाल आधिकारिक दावों के रूप में ही प्रस्तुत किए जा रहे हैं।
ए.पी. सिंह के बयान उस समय आए हैं जब Pahalgam में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया और सीमा‑पार रणनीतियों पर तीखी बहस चल रही है। भारत ने उस हमले के बाद आतंकवादियों और उनके समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का संकल्प जताया था। रक्षा नेतृत्व के हालिया बयानों का मकसद अथवा प्रभाव नीति‑निर्माताओं और जनता के बीच यह बताना भी होता है कि सुरक्षा‑प्रतिक्रियाएँ कितनी प्रभावी रहीं।



