IIT Madras New Rule: IIT मद्रास ने अपने BTech छात्रों के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। अब छात्र 3 साल पूरा करने के बाद BSc डिग्री लेकर कोर्स छोड़ सकते हैं। यह नियम उन छात्रों के लिए राहत है जो बीच में कोर्स छोड़ना चाहते हैं या अन्य करियर ऑप्शन चुनना चाहते हैं। छोटे शहरों और गांवों के छात्र जो IIT में एडमिशन लेते हैं लेकिन प्रेशर या अन्य वजह से कोर्स पूरा नहीं कर पाते, उनके लिए यह विकल्प फायदेमंद है। BSc डिग्री होने से UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा (CSE) या MBA जैसे कोर्स में एंट्री आसान हो जाएगी। IIT मद्रास ने यह नियम UG प्रोग्राम के लिए लागू किया है, जो JEE एडवांस्ड से एडमिशन लेने वाले छात्रों पर लागू होता है।
नया नियम क्या है: 3 साल बाद BSc डिग्री, 4 साल बाद BTech
IIT मद्रास के नए रूल के अनुसार, BTech छात्र अगर 6 सेमेस्टर (3 साल) पूरा कर लें तो BSc (इंजीनियरिंग) डिग्री लेकर बाहर निकल सकते हैं। अगर 8 सेमेस्टर (4 साल) पूरा करें तो BTech डिग्री मिलेगी। पहले छात्र बीच में छोड़ते थे तो कोई डिग्री नहीं मिलती थी। अब BSc डिग्री मिलने से उनका करियर सुरक्षित रहेगा। यह नियम 2025 बैच से लागू हो रहा है। IIT मद्रास के डीन ने कहा कि यह छात्रों को फ्लेक्सिबिलिटी देगा और ड्रॉपआउट रेट कम होगा।
UPSC CSE और MBA का रास्ता आसान
BSc डिग्री होने से छात्र UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा दे सकेंगे, जहां ग्रेजुएशन जरूरी है। पहले BTech बीच में छोड़ने पर डिग्री नहीं मिलती थी, इसलिए UPSC का सपना अधूरा रह जाता था। अब 3 साल बाद BSc लेकर UPSC की तैयारी शुरू कर सकते हैं। इसी तरह MBA के लिए CAT या अन्य एंट्रेंस एग्जाम में ग्रेजुएट कैंडिडेट्स ही अप्लाई कर सकते हैं। यह डिग्री छात्रों को अन्य करियर ऑप्शन देगी।
छात्रों के लिए फायदे: ड्रॉपआउट रेट कम, करियर ऑप्शन ज्यादा
IIT जैसे प्रेशर वाले कोर्स में कई छात्र मानसिक तनाव या अन्य वजह से छोड़ देते हैं। अब BSc डिग्री मिलने से उनका समय बर्बाद नहीं होगा। वे अन्य फील्ड में जा सकते हैं। IIT ब्रांड वैल्यू BSc डिग्री के साथ भी रहेगी। छात्रों का कहना है कि यह नियम उन्हें सेफ्टी नेट देगा। IIT मद्रास ने यह बदलाव छात्रों की मांग पर किया है। अन्य IIT भी ऐसा नियम ला सकते हैं।



