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भारत-मालदीव संबंधों में नई गर्माहट: पीएम मोदी ने 4,850 करोड़ की मदद का किया ऐलान, एफटीए पर भी बातचीत शुरू

भारत और मालदीव के बीच बीते कुछ महीनों में चले तनाव के बाद अब रिश्तों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आपसी सहयोग को एक नई दिशा देने का फैसला लिया है। इस दौरान भारत की ओर से मालदीव को 4,850 करोड़ रुपये की लाइन ऑफ क्रेडिट दिए जाने की घोषणा की गई है। यह निर्णय द्विपक्षीय बैठक के बाद सामने आया।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि भारत और मालदीव के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर बातचीत की शुरुआत हो चुकी है। यह दौरा मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के आमंत्रण पर हो रहा है। माना जा रहा है कि मुइज्जू की ‘इंडिया आउट’ नीति में अब बदलाव आ रहा है और वह भारत के साथ मजबूत संबंधों की ओर लौटना चाहते हैं।

संबंधों में आई नरमी

हाल के दिनों में भारत और मालदीव के रिश्तों में खटास देखने को मिली थी, खासकर मुइज्जू सरकार के शुरुआती तेवर और भारत विरोधी बयानों के कारण। लेकिन अब उनकी विदेश नीति में नरमी दिख रही है, जो चीन की ओर अत्यधिक झुकाव के अनुभवों के बाद आई प्रतीत होती है। भारत द्वारा दी गई इस आर्थिक मदद को केवल वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि रणनीतिक संकेत भी माना जा रहा है।

पीएम मोदी बनेंगे स्वतंत्रता दिवस के विशेष अतिथि

प्रधानमंत्री मोदी मालदीव के 60वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में विशिष्ट अतिथि के तौर पर भाग लेंगे। यह दौरा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 60 साल पूरे होने का प्रतीक है। इस मौके पर भारत और मालदीव ने अक्षय ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और आपसी व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय लिया है।

चीन के प्रभाव को संतुलित करने की पहल

भारत की ओर से दी गई लाइन ऑफ क्रेडिट न केवल मालदीव की आर्थिक मदद के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति का भी हिस्सा मानी जा रही है। इससे मालदीव की वित्तीय आवश्यकताओं को तो राहत मिलेगी ही, साथ ही भारत एक भरोसेमंद सहयोगी के रूप में अपनी भूमिका और मजबूत करेगा।

एफटीए से व्यापार को मिलेगा बल

मुक्त व्यापार समझौता (FTA) के प्रस्ताव पर दोनों देशों की बातचीत शुरू हो चुकी है। इसके जरिए मालदीव को भारतीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी और भारत को हिंद महासागर में एक रणनीतिक साझेदार के रूप में मजबूती। यह व्यापार और निवेश दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

क्या होती है ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’?

लाइन ऑफ क्रेडिट एक विशेष वित्तीय सुविधा होती है, जिसमें तय सीमा तक बार-बार उधार लिया जा सकता है। यह पारंपरिक लोन की तरह एकमुश्त नहीं होता, बल्कि आवश्यकतानुसार उपयोग किया जाता है। इसे क्रेडिट कार्ड जैसी सुविधा के रूप में समझा जा सकता है। यह सरकारों को आपात स्थिति, विकास कार्यों और नगदी प्रवाह के लिए एक लचीलापन देता है।

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