काबुल। पाकिस्तान द्वारा हाल ही में 17 लाख से अधिक अफगान शरणार्थियों को जबरन देश से बाहर निकालने के बाद भारत ने संकट की इस घड़ी में मानवता की मिसाल पेश की है। पाकिस्तान ने बिना किसी भोजन, आवास या सुरक्षा के इंतजाम के हजारों अफगान परिवारों को अपनी सीमाओं से बाहर कर दिया, जिसमें महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं। इस कार्रवाई की अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है।
इस मुश्किल समय में भारत ने अफगान शरणार्थियों के लिए मसीहा बनकर सामने आया है। तालिबान सरकार ने बताया कि भारत ने 5,000 से अधिक अफगान परिवारों के लिए भोजन की व्यवस्था की है। अफगानिस्तान के शरणार्थी और प्रत्यावर्तन मंत्रालय ने वीडियो और तस्वीरें जारी कर बताया कि भारत की ओर से 11 तरह की खाद्य सामग्री – चावल, दालें, आटा, तेल, चीनी, मसाले, सूखे फल, बच्चों का पोषण आहार, पीने का पानी और जरूरी पोषण ड्रिंक्स – भेजी गई हैं। ये सभी राहत सामग्री विशेष राहत केंद्रों में उन इलाकों में वितरित की जा रही है, जहां पाकिस्तान से निकाले गए शरणार्थी शरण ले रहे हैं।
तालिबान ने भारत का आभार जताते हुए कहा कि संकट के समय भारत ने साथ निभाया है और यह साबित कर दिया है कि भरोसा भारत पर ही किया जा सकता है। अफगान नागरिकों के मन में भारत के लिए सम्मान और प्रेम और गहरा हुआ है। भारत ने हमेशा अफगानिस्तान की मदद की है, चाहे वह कोरोना महामारी हो या प्राकृतिक आपदाएं।
भारत ने इस पूरे मामले को राजनीतिक मुद्दा न बनाकर मानवीय दृष्टिकोण से देखा है, जिससे दोनों देशों के लोगों के बीच रिश्ते और मजबूत हुए हैं। वहीं, पाकिस्तान की इस अमानवीय कार्रवाई की चौतरफा आलोचना हो रही है। भारत की मदद से हजारों अफगान शरणार्थियों को राहत मिली है और एक बार फिर भारत ने दुनिया के सामने मानवता की मिसाल पेश की है।

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