Jharkhand Politics: झारखंड प्रदेश कांग्रेस में मंत्रियों और विधायकों के बीच जारी विवाद अब पार्टी आलाकमान के सामने पहुंच गया है। पांच विधायकों द्वारा दिल्ली में शिकायत दर्ज कराने के बाद अब उनकी बयानबाजी और नामों का खुलासा पार्टी के लिए नई मुसीबत बन गया है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और बयानबाजी करने वाले विधायकों के खिलाफ चेतावनी या कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
विवाद की शुरुआत और दिल्ली दौरा

झारखंड कांग्रेस में पिछले कुछ महीनों से मंत्रियों और विधायकों के बीच तनाव चल रहा है। कई विधायकों का आरोप है कि सरकार में शामिल मंत्रियों ने क्षेत्रीय विकास और पार्टी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की है। इसी शिकायत को लेकर पांच विधायकों का एक दल दिल्ली पहुंचा था। इन विधायकों ने पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात की और अपनी शिकायतें रखीं।
दिल्ली से लौटने के बाद इन विधायकों ने मीडिया से बातचीत में कुछ और नामों का खुलासा किया। रामगढ़ विधायक ममता देवी और दो अन्य विधायकों का नाम लिया गया। कांके विधायक सुरेश बैठा ने कहा कि दो-तीन विधायक व्यक्तिगत कारणों से दिल्ली नहीं जा पाए थे। उन्होंने कई जिला अध्यक्षों की भी शिकायत होने की बात कही। सुरेश बैठा ने बताया कि ममता देवी संगठन के कार्यों में व्यस्त होने के कारण दिल्ली नहीं गईं।
इन बयानों ने पार्टी के भीतर हलचल मचा दी। जिन विधायकों का नाम लिया गया, वे अब खुलकर सुरेश बैठा और उनके साथियों के खिलाफ बोल रहे हैं।
आलाकमान की सख्ती और चेतावनी
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति ने स्पष्ट किया कि मीडिया में बयान देने के मामले का संज्ञान पार्टी आलाकमान ने लिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान पार्टी की एकता के खिलाफ हैं और आगे कार्रवाई भी हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में शिकायत करने वाले विधायकों को पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है। अब उनके द्वारा नामों का खुलासा करने पर पार्टी और सख्त रुख अपना सकती है।
पार्टी आलाकमान नहीं चाहता कि झारखंड कांग्रेस में कोई भी खुली बयानबाजी हो। 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद अब 2029 के चुनाव को देखते हुए पार्टी एकजुट दिखना चाहती है। ऐसे में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राजेश कच्छप को जिम्मेदारी देकर शांत करने की कोशिश
दिल्ली गए विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप को पार्टी ने संगठन सृजन अभियान के तहत बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। इसका मकसद उन्हें और उनके साथियों को शांत करना है। पार्टी आलाकमान का मानना है कि जिम्मेदारी देने से विधायक पार्टी लाइन में आ जाएंगे। लेकिन अब भी बयानबाजी जारी है, जिससे पार्टी की मुश्किल बढ़ गई है।
ममता देवी और अन्य विधायकों पर आरोप
रामगढ़ विधायक ममता देवी पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की और क्षेत्रीय विकास में रुचि नहीं दिखाई। अन्य दो विधायकों पर भी इसी तरह के आरोप लगे हैं। सुरेश बैठा और उनके साथियों का कहना है कि ये विधायक मंत्री बनने के बाद पार्टी से दूर हो गए हैं। इन आरोपों के बाद ममता देवी और अन्य विधायकों ने भी पलटवार किया है।
झारखंड कांग्रेस की मौजूदा स्थिति
झारखंड में कांग्रेस गठबंधन सरकार का हिस्सा है। जेएमएम के साथ मिलकर सरकार चला रही है। लेकिन पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। कई विधायक टिकट वितरण और मंत्री पदों को लेकर नाराज हैं। दिल्ली में शिकायत करने वाले पांच विधायकों ने पार्टी नेतृत्व से बदलाव की मांग की थी।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद झारखंड कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। अगर बयानबाजी जारी रही तो पार्टी की छवि खराब होगी। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि पार्टी आलाकमान जल्द हस्तक्षेप कर विवाद सुलझाए, अन्यथा विपक्ष (बीजेपी) इसे मुद्दा बनाकर हमला कर सकती है।
Jharkhand Politics: आगे क्या?
पार्टी सूत्रों के अनुसार, दिल्ली से निर्देश मिलने के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी जल्द बैठक बुला सकती है। इसमें बयानबाजी करने वाले विधायकों से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। अगर स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं हुआ तो चेतावनी या निलंबन जैसी कार्रवाई हो सकती है।



