Jharkhand Crime Update: झारखंड के धनबाद जिले के एक युवक को साइबर ठगों ने धोखे से म्यांमार ले जाकर बंधक बना लिया है। वहां अपराधी उसे पीट-पीटकर परेशान कर रहे हैं और पैसे मांग रहे हैं। युवक की मां ने दर्द भरी गुहार लगाई है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से बेटे की सुरक्षित वापसी की अपील की है। यह मामला साइबर क्राइम का नया रूप दिखा रहा है, जहां नौकरी के लालच में युवाओं को फंसाया जा रहा है।
धनबाद का 26 साल का शाहजेब कैसे फंसा म्यांमार के जाल में?
मोहम्मद शाहजेब रहमान, धनबाद के भूली थाना क्षेत्र के आजादनगर का रहने वाला 26 साल का युवक है। वह बेंगलुरु में एक आईटी कंपनी में काम करता था। दिसंबर 2024 में साइबर अपराधियों ने उसे विदेश में अच्छी नौकरी का लालच दिया। शाहजेब खुशी-खुशी भारत छोड़कर म्यांमार चला गया। लेकिन वहां पहुंचते ही उसकी जिंदगी उलट गई। म्यांमार के म्यावाडी इलाके में साइबर फ्रॉड का बड़ा गिरोह चल रहा था। अपराधियों ने शाहजेब को बंधक बना लिया। पहले तो उन्होंने उससे जबरदस्ती फ्रॉड का काम करवाया। अब पैसे न देने पर पीटाई कर रहे हैं।
शाहजेब ने 9 अक्टूबर को टेलीग्राम पर अपनी मां को मैसेज भेजा। उसमें लिखा था कि अज्ञात लोग उसे बंधक बनाए हुए हैं और सताने वाले हैं। अपराधी 2 लाख 20 हजार रुपये की फिरौती मांग रहे हैं। अगर न दिए तो मार देंगे या उसके अंग बेच देंगे। मां निशत अफरोज ने डर के मारे अपराधियों को पहले ही 4 लाख 40 हजार रुपये से ज्यादा भेज दिए हैं। लेकिन फिर भी बेटा आजाद नहीं हुआ। हाल ही में अपराधियों ने शाहजेब को याताई न्यू सिटी शिफ्ट कर दिया। वहां हालात और बिगड़ गए हैं।
मां का दर्द: इकलौते बेटे को खोने का डर, पिता पहले ही छोड़ चुके
निशत अफरोज की आंखों में आंसू हैं। उनका पति सालों पहले घर छोड़ चुका है। शाहजेब उनका इकलौता बेटा है, जो मां का पूरा ख्याल रखता था। वह नौकरी करता, घर चलाता और दवाइयों का पैसा देता था। निशत ने कहा, “मेरे पति बहुत पहले चले गए थे। शाहजेब मेरा इकलौता बच्चा है। वह मेरा ख्याल रखता था, जो भी काम मिलता था वह करता था और मेरी दवाइयों का खर्च उठाता था। अगर उसे कुछ हो गया, तो इस दुनिया में मेरे पास कोई नहीं बचेगा।” मां की यह पुकार सुनकर कोई भी पिता-मां का दिल पिघल जाएगा।
सरकार ने सुनी मां की पुकार, म्यांमार दूतावास में तेजी से कार्रवाई शुरू
12 नवंबर को निशत अफरोज ने मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। सीएमओ ने तुरंत झारखंड श्रम विभाग के राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष को निर्देश दिए। टीम लीडर शिखा लकड़ा ने बताया कि शिकायत मिलते ही प्रोटेक्टर ऑफ एमिग्रेंट्स, रांची से संपर्क किया। साथ ही म्यांमार में भारतीय दूतावास को पूरी जानकारी भेजी। दूतावास ने सोमवार को जवाब दिया कि मामला प्राथमिकता से म्यांमार अधिकारियों के सामने रखा गया है।
शिखा लकड़ा ने कहा, “धनबाद जिले के भूली पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आजादनगर की रहने वाली निशत अफरोज ने शिकायत की थी कि उनके 26 वर्षीय बेटे को म्यांमार के म्यावाडी में एक साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क के संचालकों ने बंधक बना रखा है। संचालक और पैसों की मांग कर रहे हैं और उसे मारने और उसके अंग बेचने की धमकी दे रहे हैं। हमने तत्काल कार्रवाई के लिए प्रोटेक्टर ऑफ एमिग्रेंट्स, रांची और म्यांमार में भारतीय दूतावास से संपर्क किया। स्थिति जटिल है क्योंकि म्यावाडी क्षेत्र स्थानीय प्रशासन के प्रभावी नियंत्रण में नहीं है। उनकी मां ने सोमवार को सूचित किया कि उनके बेटे को याताई न्यू सिटी में स्थानांतरित कर दिया गया है।”
भारतीय दूतावास अब बचाव अभियान को तेज करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन म्यांमार का वह इलाका विद्रोही क्षेत्र है, जहां सरकारी कंट्रोल कम है। इसलिए मुश्किलें ज्यादा हैं।
साइबर क्राइम का खतरा: युवा सावधान रहें, नौकरी के लालच में न फंसें
यह घटना झारखंड के हजारों युवाओं के लिए चेतावनी है। साइबर अपराधी सोशल मीडिया पर अच्छी सैलरी वाली नौकरी का झांसा देकर लोगों को फंसाते हैं। म्यांमार जैसे देशों में साइबर स्कैम के बड़े सेंटर चल रहे हैं। वहां फंसने वाले युवकों को जबरदस्ती फ्रॉड का काम करवाया जाता है। अगर मना किया तो पीटाई या फिरौती। विशेषज्ञ कहते हैं कि विदेश जाने से पहले एमिग्रेशन क्लियरेंस जरूर लें। संदिग्ध जॉब ऑफर पर पुलिस या हेल्पलाइन से बात करें।
झारखंड सरकार ने प्रवासी मजदूरों के लिए कंट्रोल रूम बनाया है। अगर आपका कोई रिश्तेदार विदेश में फंस जाए, तो तुरंत 181 हेल्पलाइन पर कॉल करें। नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन भी ऐसे मामलों में मदद करता है। शाहजेब का केस जल्द सुलझे, यही दुआ है। मां की गोद फिर से बेटे से सज जाए। यह खबर उन परिवारों के लिए सबक है जो अपने बच्चों को विदेश भेजने की सोच रहे हैं। सावधानी ही सुरक्षा है।



