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Jharkhand News: झारखंड कांग्रेस का सनसनीखेज दावा, 'बिहार में 50 लाख वोटर ट्रेन से लाए गए, एक वोट की कीमत 5000 रुपये!'

बिहार चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस का बड़ा धमाका! रांची में राष्ट्रीय प्रवक्ता ने दावा किया कि 50 लाख वोटर्स को ट्रेन से लाकर वोट डलवाए गए। एक वोटर पर 5000 रुपये खर्च करने का भी लगाया आरोप।

Jharkhand News: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे आ चुके हैं और एनडीए ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है। लेकिन इन नतीजों के बाद सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा। अब पड़ोसी राज्य झारखंड से कांग्रेस ने एक ऐसा आरोप लगाया है जिसने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड कांग्रेस ने दावा किया है कि बिहार चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और लगभग 50 से 55 लाख मतदाताओं को ट्रेन के जरिए बाहर से बिहार लाया गया था।

यह आरोप रांची स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगाया गया। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अतुल लोढ़े (Atul Londhe) ने मीडिया से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने न केवल वोटर्स को लाने का दावा किया, बल्कि यह भी कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए गए। आइए जानते हैं कांग्रेस के इस ‘वोट चोरी’ के दावे में कितनी सच्चाई है और इसके पीछे उनका तर्क क्या है।

Jharkhand News: क्या है 50 लाख वोटर्स वाला दावा?

कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोढ़े ने बिहार चुनाव के नतीजों और देशभर में हो रहे अन्य चुनावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को हाईजैक किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “बिहार में जो नतीजे आए हैं, वे सामान्य नहीं हैं। हमारे पास जानकारी है कि चुनाव के दौरान करीब 50 से 55 लाख लोगों को विशेष ट्रेनों और अन्य माध्यमों से बिहार लाया गया। ये वो लोग थे जो शायद बिहार के वोटर ही नहीं थे या उन्हें विशेष प्रयोजन से लाया गया था।”

लोढ़े ने आगे कहा कि इन कथित ‘बाहरी वोटर्स’ की खातिरदारी में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। उनके मुताबिक, “एक-एक व्यक्ति पर 4 से 5 हजार रुपये खर्च किए गए। यह पैसा कहां से आया और चुनाव आयोग इस पर चुप क्यों रहा?” कांग्रेस का आरोप है कि यह सब एक सुनियोजित साजिश के तहत किया गया ताकि जनादेश को बदला जा सके।

चुनाव आयोग पर भी साधा निशाना

अपने आरोपों की कड़ी में अतुल लोढ़े ने केंद्रीय चुनाव आयोग (Election Commission) को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि महाराष्ट्र चुनाव से पहले जब कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिलने गया था, तो उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया गया।

उन्होंने कहा, “हम डुप्लीकेट वोटर्स का नाम काटने का आग्रह लेकर गए थे, लेकिन आयोग के अध्यक्ष हम पर ही भड़क गए। उन्होंने हमें कानून का डर दिखाया और हमारी विज्ञप्ति छीन ली। वे फोटो खिंचवाने तक को तैयार नहीं थे। यह दिखाता है कि आयोग किस दबाव में काम कर रहा है।” बिहार के संदर्भ में भी उन्होंने कहा कि ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूची में गड़बड़ी के मुद्दे को आयोग ने गंभीरता से नहीं लिया।

‘वोट चोरी’ का नैरेटिव और बिहार के नतीजे

बिहार चुनाव से पहले भी कांग्रेस और राहुल गांधी ने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकालकर ‘वोट चोरी’ का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। उनका आरोप था कि राज्य में लाखों वोटर्स के नाम साजिशन काटे गए हैं। हालांकि, चुनाव के नतीजों में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा और उनकी सीटें 19 से घटकर सिंगल डिजिट में आ गईं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड कांग्रेस का यह नया दावा उसी ‘वोट चोरी’ के नैरेटिव को जिंदा रखने की कोशिश है। 50 लाख लोगों को ट्रेन से लाना एक लॉजिस्टिकल चुनौती है, जिस पर बिना ठोस सबूतों के विश्वास करना मुश्किल है। लेकिन कांग्रेस का कहना है कि बहुत सारी चीजें चुनाव में “सबकी आंखों के सामने” थीं, जिन्हें जानबूझकर अनदेखा किया गया।

झारखंड में भी कांग्रेस बैकफुट पर?

यह आरोप ऐसे समय में आया है जब झारखंड कांग्रेस खुद आंतरिक कलह से जूझ रही है। हाल ही में निकाय चुनाव की तैयारियों को लेकर बुलाई गई एक बैठक में 49 में से केवल 4 पर्यवेक्षक ही पहुंचे, जिसके बाद प्रदेश नेतृत्व को कमेटियां भंग करनी पड़ीं। बिहार के नतीजों का असर झारखंड की राजनीति पर भी पड़ता दिख रहा है। ऐसे में, यह बयान पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरने और हार का ठीकरा बाहरी कारणों पर फोड़ने की रणनीति भी हो सकता है।

बीजेपी का पलटवार

उधर, बीजेपी ने कांग्रेस के इन आरोपों को ‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ वाली स्थिति बताया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि जनता ने प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश कुमार के विकास कार्यों पर मुहर लगाई है, लेकिन कांग्रेस जनादेश का अपमान कर रही है। 50 लाख वोटर्स को ट्रेन से लाने का आरोप बेबुनियाद और हास्यास्पद है।

Jharkhand News: आरोपों की राजनीति या हकीकत?

फिलहाल, कांग्रेस ने अपने दावे के समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया है। 50 लाख लोगों का मूवमेंट किसी भी राज्य की परिवहन व्यवस्था पर बड़ा असर डालता है, जो छिपाना आसान नहीं होता। लेकिन लोकतंत्र में विपक्ष का काम सवाल उठाना है। अब यह देखना होगा कि क्या कांग्रेस इस मुद्दे को आगे ले जाती है या यह भी चुनाव बाद के बयानों की तरह हवा में गुम हो जाएगा।

बहरहाल, बिहार के बाद अब झारखंड में भी सियासी पारा चढ़ने लगा है। कांग्रेस के इस दावे ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या वाकई चुनावों में इतने बड़े पैमाने पर मैन्युपुलेशन संभव है?

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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