Jharkhand News: झारखंड में नक्सलवाद पर बड़ा झटका लगा है। पांच साल पहले 19 जिलों में फैले नक्सली अब सिर्फ पश्चिमी सिंहभूम जिले तक सिमट गए हैं। सरांडा जंगल के कुछ हिस्सों में 40 से कम हथियारबंद माओवादी बचे हैं। केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य रखा है। झारखंड पुलिस और केंद्रीय बलों की मेहनत से राज्य तेजी से नक्सल मुक्त हो रहा है।
Jharkhand News: अब सिर्फ पश्चिमी सिंहभूम में बचे नक्सली
पहले झारखंड के 19 जिले नक्सल प्रभावित थे। अब सबसे गंभीर रूप से प्रभावित सिर्फ पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) बचा है। यहां सरांडा के जंगलों में माओवादियों का आखिरी कैंप है। सीपीआई माओवादी की सेंट्रल कमेटी के सिर्फ तीन सदस्य राज्य में बचे हैं। छोटे गुट जैसे पीएलएफआई, जेजेएमपी और टीपीसी पूरी तरह निष्क्रिय हो गए हैं। बोकारो के झुमरा और लुगु इलाके में आखिरी नक्सली दस्ता 2025 में खत्म हो गया। उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र पूरी तरह साफ हो चुका है। 2016 से सितंबर 2025 तक 242 नक्सलियों ने सरेंडर किया और 4147 गिरफ्तार हुए। कई बड़े इनामी नक्सली मारे गए। नक्सलियों की ताकत बहुत कम हो गई है।
2026 तक झारखंड नक्सल फ्री करने का प्लान
केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक नक्सलवाद जड़ से खत्म करने का ऐलान किया है। झारखंड में नौ केंद्रीय बलों की बटालियन तैनात हैं। लगातार ऑपरेशन चल रहे हैं। बड़े नेता जैसे विवेक उर्फ प्रयाग मांझी, सहदेव सोरेन, मिसिर बेसरा जैसे एक करोड़ इनामी अभी सक्रिय हैं, लेकिन पुलिस उन्हें निशाने पर रखे हुए है। राज्य पुलिस का दावा है कि विकास योजनाएं गांवों तक पहुंचने से नक्सलियों का आधार कमजोर पड़ा है। सरेंडर करने वालों को मुख्यधारा में लाया जा रहा है। अब सिर्फ सरांडा में आखिरी लड़ाई बाकी है।
यह सफलता सुरक्षा बलों की बहादुरी और सरकार की सख्त नीति का नतीजा है। झारखंड के लोग अब शांति और विकास की उम्मीद कर रहे हैं। जल्द ही राज्य पूरी तरह नक्सल मुक्त हो सकता है।



