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Jharkhand News: रांची में स्कूल वैन सुरक्षा पर बड़ी बैठक, GPS और पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य करने की मांग, ओवरलोडिंग पर जीरो टॉलरेंस

Jharkhand News: झारखंड की राजधानी रांची में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर शुक्रवार को एक बेहद जरूरी और अहम बैठक हुई। समाहरणालय स्थित बी ब्लॉक के कक्ष संख्या 307 में आयोजित इस बैठक में झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन ने स्कूल वैन और बसों के संचालन में हो रही खतरनाक लापरवाहियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। एसोसिएशन ने बिना फिटनेस सर्टिफिकेट और बिना वैध परमिट के सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की मांग की। साथ ही GPS ट्रैकिंग, CCTV कैमरे और चालकों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य करने की जोरदार मांग रखी गई।

वैन पर नहीं है प्रशासन की नजर, यह सबसे बड़ी चिंता

झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय ने बैठक में एक बेहद जरूरी बात सामने रखी। उन्होंने कहा कि प्रशासन की नजर स्कूल बसों पर तो कुछ हद तक रहती है लेकिन स्कूल वैन पूरी तरह निगरानी से बाहर हैं। यही वजह है कि वैन चालक मनमाने तरीके से गाड़ियां चलाते हैं और नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हैं।

उन्होंने बताया कि रांची की सड़कों पर कई स्कूल वैन बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के चल रही हैं। इन वाहनों के पास वैध परमिट भी नहीं है। जरूरी सुरक्षा उपकरण जैसे फायर एक्सटिंग्विशर, फर्स्ट एड किट और स्पीड गवर्नर भी इन वाहनों में नहीं लगे हैं। लेकिन इसके बावजूद हर सुबह इन वैनों में बच्चे ठूंसे जाते हैं और वे बेखौफ सड़कों पर दौड़ती रहती हैं।

Jharkhand News: क्षमता से दोगुने बच्चे, बड़े हादसे की आशंका

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इस पूरी बैठक में जो बात सबसे ज्यादा चिंता पैदा करने वाली थी वह थी ओवरलोडिंग की समस्या। अजय राय ने बताया कि शहर में कई वैन ऐसी हैं जिनमें क्षमता से दोगुने बच्चों को बैठाया जाता है। छोटी-सी वैन में जहां 6 से 8 बच्चे ही आराम से बैठ सकते हैं, वहां 12 से 15 बच्चों को धकेल दिया जाता है।

इस हालत में बच्चे न तो ठीक से बैठ पाते हैं और न ही किसी आपातकाल में तुरंत बाहर निकल पाते हैं। अगर किसी वैन में अचानक आग लग जाए या कोई दुर्घटना हो जाए तो इतनी भीड़ में बच्चों को सुरक्षित निकालना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। एसोसिएशन ने इस ओवरलोडिंग को बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ बताया और इस पर जीरो टॉलरेंस की मांग की।

ये पांच चीजें हर स्कूल वाहन में होनी चाहिए

झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन ने प्रशासन के सामने एक स्पष्ट मांग पत्र रखा। उनकी मांग है कि हर स्कूली वाहन चाहे वह बस हो या वैन, उसमें पांच जरूरी चीजें अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। पहली, CCTV कैमरा जो वाहन के अंदर और बाहर दोनों की निगरानी करे। दूसरी, GPS ट्रैकिंग सिस्टम जिससे अभिभावक और स्कूल प्रशासन यह जान सकें कि वाहन इस वक्त कहां है। तीसरी, फायर एक्सटिंग्विशर यानी आग बुझाने का यंत्र जो किसी भी आपात स्थिति में काम आए। चौथी, फर्स्ट एड किट जिसमें जरूरी दवाइयां और पट्टियां हों। पांचवीं, स्पीड गवर्नर जो यह सुनिश्चित करे कि वाहन तय गति सीमा से ज्यादा तेज न चले।

पुलिस वेरिफिकेशन क्यों है इतना जरूरी

एसोसिएशन ने एक और बेहद अहम मांग रखी और वह है चालकों और वाहन सहायकों का पुलिस वेरिफिकेशन। देश में कई ऐसी दुखद घटनाएं हो चुकी हैं जहां स्कूल वाहन चालकों ने बच्चों के साथ अपराध किए। अगर चालकों का पुलिस वेरिफिकेशन पहले से हो तो संदिग्ध आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग बच्चों के वाहन चलाने से दूर रहेंगे।

इसके साथ ही एसोसिएशन ने यह भी मांग की कि हर वाहन में कम से कम एक जिम्मेदार स्टाफ यानी महिला अटेंडेंट होनी चाहिए जो बच्चों के वाहन में चढ़ने और उतरने की निगरानी करे। यह अटेंडेंट यह सुनिश्चित करे कि बच्चा सुरक्षित अपने घर या स्कूल पहुंच गया है।

Jharkhand News: विशेष अभियान और जब्ती की मांग

एसोसिएशन ने प्रशासन से अनुरोध किया कि अधूरे या गलत कागजात वाले वाहनों के खिलाफ तुरंत विशेष अभियान चलाया जाए। जिन वाहनों के पास फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं है, जिनके परमिट की अवधि समाप्त हो गई है और जो ओवरलोडिंग करते पाए जाएं उन्हें तत्काल जब्त किया जाए।

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि प्रशासन की यह पहल स्वागत योग्य है लेकिन अगर केवल बसों पर सख्ती होगी और वैन को छोड़ दिया जाएगा तो उद्देश्य पूरा नहीं होगा। बसों और वैनों दोनों पर समान सख्ती बरती जाए तभी बच्चों का स्कूल आना-जाना सुरक्षित हो सकेगा।

अभिभावकों की चिंता और सरकार की जिम्मेदारी

हर माता-पिता के लिए अपने बच्चे की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। जब वे अपने बच्चे को स्कूल वैन में बैठाते हैं तो उन्हें भरोसा होना चाहिए कि वह बच्चा सुरक्षित है। लेकिन अगर वैन में GPS नहीं है तो वे यह नहीं जान सकते कि वाहन कहां है। अगर CCTV नहीं है तो वाहन के अंदर क्या हो रहा है यह किसी को पता नहीं चलेगा।

रांची में हुई यह बैठक एक जरूरी शुरुआत है। अब जरूरत है कि प्रशासन इन मांगों को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए ताकि शहर के हजारों बच्चों का स्कूल का सफर न सिर्फ आरामदेह बल्कि पूरी तरह सुरक्षित भी हो सके।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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