Jharkhand News: देशभर में इस समय भीषण गर्मी का कहर जारी है और इसकी सबसे ज्यादा मार उन मजदूरों पर पड़ रही है जो जमीन के नीचे कोयला खदानों में काम करते हैं। जहां सामान्य लोग पंखे और कूलर से गर्मी से थोड़ी राहत पा सकते हैं, वहीं इन खदान मजदूरों को गर्म चट्टानों, भारी मशीनों और ऊंची आर्द्रता के बीच काम करना पड़ता है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए खान सुरक्षा महानिदेशालय यानी DGMS ने 22 अप्रैल 2026 को एक सख्त सर्कुलर जारी किया है। इसमें कोल इंडिया, BCCL, CCL, ECL, NECL, WCL और टाटा जैसी सभी खनन कंपनियों को तत्काल सुरक्षा उपाय लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
भूमिगत खदानों में क्यों ज्यादा है खतरा
जमीन के ऊपर गर्मी बुरी होती है लेकिन भूमिगत खदानों में स्थिति कहीं ज्यादा कठिन होती है। वहां गर्म चट्टानें, भारी मशीनों की गर्मी और ऊंची आर्द्रता यानी नमी मिलकर एक ऐसा माहौल बनाती हैं जो मजदूरों के शरीर पर बहुत बुरा असर डालता है। ऊपर से सुरक्षा के लिए पहनने वाले भारी और मोटे कपड़े शरीर की गर्मी को और बढ़ा देते हैं।
DGMS ने अपने सर्कुलर में माना है कि जब शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है तो इंसान की एकाग्रता घटने लगती है। हाथ-पैर का तालमेल बिगड़ता है और काम में गलतियां बढ़ती हैं। खदान में गलती का मतलब बड़ा हादसा हो सकता है। इसीलिए DGMS ने इसे सिर्फ स्वास्थ्य की नहीं बल्कि सुरक्षा की भी बड़ी समस्या माना है।
जिन मजदूरों को सबसे ज्यादा खतरा है उनमें शुगर और बीपी के मरीज, मोटापे से पीड़ित लोग, शराब का सेवन करने वाले, बुजुर्ग मजदूर और वे लोग शामिल हैं जो पहले कभी हीट स्ट्रोक झेल चुके हैं।
DGMS के पांच अहम निर्देश जो बचाएंगे जिंदगियां
DGMS ने जो सर्कुलर जारी किया है उसमें पांच ऐसे जरूरी निर्देश दिए गए हैं जिन्हें सभी खनन कंपनियों को तुरंत लागू करना होगा। पहला निर्देश है काम की आदत सात दिन में बनाने का। जो मजदूर नए हों या जो किसी कारण से सात दिन से ज्यादा समय से काम से दूर रहे हों, उन्हें एकदम से पूरा काम नहीं देना चाहिए। पहले दो दिन केवल 20 से 30 फीसदी काम, अगले दो दिन 40 से 60 फीसदी और उसके बाद 60 से 80 फीसदी काम देते हुए सातवें दिन पूरा कार्यभार दिया जाए। अत्यधिक गर्मी में यह अवधि 10 से 14 दिन तक बढ़ाई जा सकती है।
दूसरा निर्देश है हर 20 मिनट में पानी पिलाने का। खदान के हर हिस्से में 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तापमान का हल्का नमकीन पानी उपलब्ध कराना जरूरी है। मजदूरों को हर 15 से 20 मिनट में एक कप पानी पीना चाहिए। इसके अलावा मजदूरों के पेशाब का रंग हल्का रहना चाहिए, अगर यह गहरा हो जाए तो यह डिहाइड्रेशन का संकेत है और तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।
तीसरा निर्देश है कूल रेस्ट शेड बनाने का। जहां काम बहुत ज्यादा गर्म जगह पर हो वहां वर्क शेयरिंग की व्यवस्था की जाए यानी एक मजदूर को लगातार न खटाया जाए। छायादार और ठंडे शेड बनाए जाएं और मजदूरों को बारी-बारी से आराम दिया जाए। सुपरवाइजरों को यह जिम्मेदारी दी जाए कि वे मजदूरों में डिहाइड्रेशन के लक्षणों पर नजर रखें।
चौथा निर्देश है शिफ्ट से पहले कुछ जरूरी परहेज करने का। मजदूरों को ड्यूटी से 8 से 12 घंटे पहले शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। खाली पेट या सिर्फ चाय-कॉफी पीकर काम पर नहीं जाना चाहिए। रात को अच्छी नींद लेनी चाहिए और पौष्टिक खाना खाना चाहिए। अगर कोई मजदूर किसी बीमारी से पीड़ित हो या कोई दवा ले रहा हो तो इसकी जानकारी मेडिकल विभाग को देना जरूरी है।
पांचवां निर्देश है हीट स्ट्रेस के लिए फर्स्ट एड ट्रेनिंग का। खदान के सभी कर्मियों और सुपरवाइजरों को हीट स्ट्रेस के शुरुआती लक्षण पहचानने और उसका प्राथमिक उपचार करने की ट्रेनिंग दी जाए। काम में मन न लगना, चिड़चिड़ापन, अचानक चक्कर आना और ज्यादा पसीना आना हीट स्ट्रेस के शुरुआती संकेत हैं। ऐसे किसी मजदूर को तुरंत छांव में ले जाकर पानी पिलाएं और जरूरत होने पर मेडिकल सहायता दें।
Jharkhand News: हीट स्ट्रेस हादसों की बड़ी वजह
DGMS के महानिदेशक उज्जवल साह ने इस पूरे मामले पर जो बात कही वह बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि हीट स्ट्रेस को सिर्फ एक बीमारी नहीं मानना चाहिए बल्कि यह खदानों में होने वाले हादसों की एक बड़ी और अक्सर नजरअंदाज होने वाली वजह है। जब एक मजदूर का शरीर गर्मी से थक जाता है तो उसकी निर्णय लेने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में वह गलत जगह कदम रख सकता है, मशीन को गलत तरीके से संचालित कर सकता है या किसी खतरे को देखकर सही समय पर प्रतिक्रिया नहीं दे पाता। इसका नतीजा एक बड़ा हादसा हो सकता है।
DGMS ने साफ कहा है कि इन दिशानिर्देशों का पालन न करने पर खान अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने लेट्स स्टे कूल, स्टे सेफ के संदेश के साथ सभी खनन कंपनियों से अपील की है कि वे इन निर्देशों को गंभीरता से लें और मजदूरों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
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