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Jharkhand News: रांची रेलवे स्टेशन पर मानव तस्करी का पर्दाफाश, आरपीएफ ने बचाए 3 नाबालिग, तस्कर को जेल भेजा, एएचएटीयू को सौंपा मामला

Jharkhand News: रांची, झारखंड के रांची रेलवे स्टेशन पर रविवार को रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) की सतर्कता ने एक बड़ी मानव तस्करी की साजिश को नाकाम कर दिया। आरपीएफ की नन्हे फरिश्ते टीम, एसआईबी रांची और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 3 नाबालिग लड़कों को बचा लिया गया। तस्करी करने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। सोमवार को आरोपी और नाबालिगों को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचएटीयू) रांची को सौंपा गया। यह घटना झारखंड में मानव तस्करी रोकने के अभियान को मजबूती देगी। स्थानीय लोग आरपीएफ की तारीफ कर रहे हैं।

गुप्त सूचना पर कार्रवाई, ट्रेन पर निगरानी, संदिग्ध पकड़ा

यह सफल अभियान एसआईबी रांची से मिली गुप्त सूचना पर आधारित था। रविवार को आरपीएफ पोस्ट रांची, नन्हे फरिश्ते टीम और एसआईबी की संयुक्त टीम ने लोहरदगा-रांची मेमू पैसेंजर ट्रेन (नंबर 68040) के प्लेटफॉर्म नंबर 1ए पर निगरानी रखी। इसी दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति 3 नाबालिग लड़कों के साथ दिखा। लड़के भयभीत लग रहे थे। संदिग्ध संतोषजनक जवाब न दे सका, जिस पर उसे आरपीएफ पोस्ट ले जाकर पूछताछ की गई। नाबालिगों ने बताया कि आयुष असुर नामक व्यक्ति ने काम दिलाने के बहाने उन्हें लोहरदगा से रांची लाया। वहां उन्हें जगतपाल उरांव को सौंप दिया, जो उन्हें अगरतला ले जाने वाला था। आरपीएफ ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जगतपाल उरांव (33 वर्ष, गुमला निवासी) को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने कबूल किया कि उसे रांची तक लाने के लिए 5,000 रुपये मिले थे और वह पहले भी तस्करी में लिप्त था।

नाबालिगों की पहचान

बचाए गए नाबालिगों की पहचान दिनेश असुर, झपटू असुर और अनुप असुर के रूप में हुई। तीनों गुमला जिले के निवासी हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि आयुष असुर ने झूठे वादे से उन्हें लोहरदगा से रांची लाया। वहां जगतपाल उरांव ने उन्हें अगरतला ले जाने का प्लान बनाया था। तस्करी की यह साजिश ग्रामीण बच्चों को मजदूरी के नाम पर बेचने की थी। नाबालिगों को तुरंत मेडिकल जांच के लिए भेजा गया। आरपीएफ ने कहा कि यह कार्रवाई मानव तस्करी रोकने के निरंतर अभियान का हिस्सा है।

आरोपी से बरामद सामग्री

गिरफ्तारी के दौरान आरोपी से सभी जरूरी सामग्री जब्त की गई। इसमें यात्रा दस्तावेज, मोबाइल फोन और संदिग्ध वस्तुएं शामिल हैं। आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। सोमवार को पूरा मामला एएचएटीयू रांची को सौंप दिया गया, जो आगे की जांच करेगी।

आरपीएफ टीम की भूमिका

इस अभियान में आरपीएफ पोस्ट से एसआई सूरज पांडे, एसआई अश्विनी कुमार, कांस्टेबल संजय यादव, कांस्टेबल प्रदीप कुमार, एसआईबी से इंस्पेक्टर एस.एन. प्रसाद, रंजीत कुमार, और नन्हे फरिश्ते टीम से एसआई सुनीता तिर्की, लेडी स्टाफ सुचिता व देवमणि शामिल थे। आरपीएफ का नन्हे फरिश्ते अभियान मानव तस्करी रोकने में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। झारखंड में पिछले साल 200 से ज्यादा नाबालिग बचाए गए। स्थानीय लोग टीम की तारीफ कर रहे हैं।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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