Jharkhand News: बरसात के मौसम में दूषित पानी के कारण फैलने वाली बीमारियों से झारखंड की जनता को बचाने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। केंद्र सरकार ने राज्य के जलस्रोतों को साफ और शुद्ध रखने के लिए 30 करोड़ रुपये की सहायता राशि को मंजूरी दी है। यह राशि खास तौर पर मानसून के दौरान इस्तेमाल की जाएगी, ताकि ग्रामीण इलाकों में पेयजल के स्रोत सुरक्षित रहें। इस बजट का उपयोग जलस्रोतों के आसपास रसायनों का छिड़काव करने, उनकी नियमित सफाई और जन जागरूकता अभियानों में किया जाएगा। राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने इस पर काम भी शुरू कर दिया है।
बरसात के दिनों में झारखंड के कई ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित जल सेवन के कारण डायरिया जैसी मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय प्रतिवर्ष राज्यों को यह आर्थिक सहायता प्रदान करता है। सरकार की कोशिश है कि इस बार बारिश के दौरान कोई भी परिवार गंदे पानी की वजह से बीमार न पड़े। राशि मिलते ही इसे सभी जिलों में जरूरत के हिसाब से बांट दिया जाएगा, ताकि जमीनी स्तर पर इसका लाभ मिल सके।
Jharkhand News: जल सहियाओं को मिलेगी नई जिम्मेदारी और जांच किट
इस अभियान में ‘जल सहिया’ की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होने वाली है। सरकार ने तय किया है कि जल सहियाओं को उच्च गुणवत्ता वाली जल जांच किट उपलब्ध कराई जाएगी। इससे वे अपने-अपने क्षेत्रों में जलस्रोतों की शुद्धता की तुरंत जांच कर सकेंगी। यदि किसी हैंडपंप या कुएं के पानी में कोई खराबी पाई जाती है, तो उसकी रिपोर्ट मिलते ही उसे दुरुस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कुछ जरूरी दवाइयां भी उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि यदि कोई बीमारी की चपेट में आए तो उसे तुरंत उपचार मिल सके। जल जीवन मिशन के तहत यह पूरी कवायद इसलिए की जा रही है ताकि ग्रामीणों को घर तक साफ पानी मिले। जल सहियाएं न केवल जांच करेंगी बल्कि लोगों को साफ पानी के महत्व के बारे में भी जागरूक करेंगी, क्योंकि कई बार जागरूकता की कमी के कारण भी लोग अनजाने में दूषित पानी पी लेते हैं।
18 हजार हैंडपंपों की मरम्मत से मिली बड़ी राहत
पेयजल और स्वच्छता विभाग ने मानसून की दस्तक से पहले ही एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पूरे राज्य में करीब 18 हजार खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत का काम पूरा कर लिया गया है। हैंडपंप ग्रामीण इलाकों में पानी का सबसे बड़ा स्रोत हैं और इनके खराब होने से लोगों को मीलों दूर जाना पड़ता था।
इतना ही नहीं, सोलर आधारित सामुदायिक पंपों के जरिए भी ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति काफी सुधरी है। इस साल राज्य में लगभग 70 प्रतिशत ग्रामीण आबादी तक पेयजल की सुविधा पहुंचाई जा चुकी है। अब 30 करोड़ रुपये की नई राशि मिलने से इन सामुदायिक जल योजनाओं के आसपास की सफाई व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। विभाग का मानना है कि केवल पानी उपलब्ध कराना ही काफी नहीं है, उसकी शुद्धता बनाए रखना भी उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी है।
Jharkhand News: जल जीवन मिशन का बढ़ता दायरा और भविष्य की राह
जल जीवन मिशन के दूसरे चरण में स्वच्छता उपायों पर खर्च की जाने वाली राशि और इसके तकनीकी दायरों को बढ़ाने का फैसला लिया गया है। आने वाले अक्टूबर महीने से इस मिशन के तहत स्वच्छता संबंधी कार्यों पर और भी अधिक बजट खर्च किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में राज्य के हर जलस्रोत को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित बनाया जाए।
साफ पानी की उपलब्धता राज्य के स्वास्थ्य बजट पर पड़ने वाले बोझ को भी कम करती है। जब लोग शुद्ध पानी पीते हैं, तो जल जनित बीमारियों का खतरा कम हो जाता है, जिससे अस्पतालों में भीड़ नहीं होती। राज्य स्तर पर इस अभियान की मॉनिटरिंग के लिए उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिलों से लगातार फीडबैक लेते रहें।
Jharkhand News:आम जनता के लिए क्यों है यह जरूरी
झारखंड की भौगोलिक बनावट को देखते हुए जलस्रोतों का संरक्षण एक बड़ी चुनौती है। मानसून के दौरान अक्सर जलस्तर बढ़ने से गंदगी पानी के स्रोतों तक पहुंच जाती है। नई सरकारी व्यवस्था के तहत अब हर स्रोत की सुरक्षा की निगरानी होगी। ग्रामीणों से भी अपील की गई है कि वे अपने आसपास के जलस्रोतों के पास साफ-सफाई रखें और हैंडपंपों को कचरे से दूर रखें।
यह पहल ग्रामीण भारत के स्वास्थ्य और जीवन स्तर को ऊपर उठाने की दिशा में एक ठोस कदम है। केंद्र से मिलने वाली यह 30 करोड़ की सहायता राशि न केवल रसायनों के छिड़काव में काम आएगी, बल्कि यह एक ऐसी व्यवस्था बनाएगी जो भविष्य में भी ग्रामीणों के काम आएगी। सरकार की इस मुस्तैदी से यह उम्मीद जगी है कि इस मानसून में ग्रामीण झारखंड के लोग शुद्ध पानी का उपयोग कर पाएंगे और बीमारियों से दूर रहेंगे। जल संरक्षण के प्रति यह जागरूकता और प्रशासन का यह सक्रिय रुख वाकई में राहत देने वाला है।
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