Suvarnarekha River Accident: जितिया (जिउतिया/जीवित्पुत्रिका) पर्व की शाम समता नगर के एक परिवार के लिए अचानक मातम में बदल गई। मानगो के समता नगर निवासी संतोष ठाकुर की दो सगी बेटियां अपनी मां के साथ गांधी घाट के नीचे सुवर्णरेखा नदी में स्नान के लिए गई थीं। नहाते समय दोनों गहरे पानी और तेज बहाव में चली गईं। स्थानीय लोगों और गोताखोरों की मदद से एक बच्ची को नदी से बाहर निकाला गया और उसे एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि दूसरी बच्ची की तलाश शाम के अंधेरे और नदी के प्रवाह के बीच जारी रही।
घटना कहां और कैसे हुई?
हादसा पूर्वी सिंहभूम जिले के जमशेदपुर क्षेत्र में मानगो के समता नगर से जुड़े गांधी घाट के पास सुवर्णरेखा (सुबर्णरेखा) नदी में हुआ। जितिया पर्व पर माताएं संतान की दीर्घायु की कामना से व्रत रखती हैं और कई परिवार नदी या घाट पर स्नान का अनुष्ठान करते हैं। संतोष ठाकुर अपनी दोनों बेटियों के साथ स्नान के लिए घाट के निचले हिस्से में उतरी थीं। नहाने के दौरान दोनों अचानक गहरे पानी में चली गईं। मां ने शोर मचाया, जिसके बाद आसपास के लोगों ने मदद की। एक बच्ची को स्थानीय सहयोग और गोताखोरों की कोशिश से बाहर निकाला गया। उसे एमजीएम में भर्ती कराया गया। दूसरी बच्ची तेज धारा में बह गई और उसकी तलाश जारी रही। यह विवरण प्रभात खबर समेत स्थानीय रिपोर्टिंग और परिवार से जुड़ी प्रारंभिक सूचना पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है, इसलिए आधिकारिक बयान का इंतजार बना रहा।
बचाव और प्रशासन की भूमिका क्या रही?
सूचना मिलते ही स्थानीय लोग नदी में कूदे। गोताखोरों को बुलाया गया। एक बच्ची को निकालकर अस्पताल ले जाया गया। लापता बच्ची के लिए तलाशी शाम तक चलती रही। परिवार की ओर से विकास सिंह को फोन किया गया। उन्होंने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति देखी और उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम तथा जिला प्रशासन को रेस्क्यू तेज करने की बात पहुंचाई। पुलिस और प्रशासनिक टीमें मौके पर रहीं। नदी का बहाव और कम रोशनी खोज को धीमा करने वाले कारक बताए गए। किसी आधिकारिक बयान में मौत की पुष्टि इन शुरुआती घंटों में नहीं हुई थी एक बच्ची भर्ती और दूसरी लापता की स्थिति रिपोर्ट हुई।
जितिया पर्व पर नदी स्नान से जुड़ा जोखिम क्यों बढ़ जाता है?
जितिया मुख्य रूप से संतान की लंबी उम्र और नीरोग काया के लिए रखा जाने वाला व्रत है। झारखंड, बिहार और आसपास के इलाकों में महिलाएं इस दिन नदी-तालाब में स्नान करती हैं। सुवर्णरेखा जैसी नदियों में घाट के नीचे अचानक गहराई, तेज बहाव और अंधेरा जोखिम बढ़ा देते हैं। इस साल जितिया के आसपास अन्य जिलों में भी स्नान के दौरान डूबने की अलग-अलग घटनाएं सामने आईं, जिससे घाटों पर निगरानी और चेतावनी की जरूरत फिर उभरी। समता नगर जैसी घनी बस्तियों से लोग पैदल या छोटे समूह में घाट पहुंचते हैं, जहां स्थायी बचाव व्यवस्था हर समय उपलब्ध नहीं होती।
परिवार और स्थानीय प्रतिक्रिया कैसी रही?
संतोष ठाकुर के घर में कोहराम मच गया। पड़ोसी और रिश्तेदार घाट तथा अस्पताल दोनों जगह जुटे। एक बच्ची के अस्पताल पहुंचने से कुछ राहत मिली, लेकिन दूसरी की खबर न मिलने से चिंता बनी रही। स्थानीय स्तर पर विकास सिंह और अन्य लोगों के मौके पर पहुंचने से प्रशासन तक बात जल्दी पहुंची। विधायक सरयू राय के पहुंचने का भी उल्लेख रिपोर्टों में है। अभी तक मुआवजे या आधिकारिक शोक संदेश की पुष्टि इन घंटों में नहीं हुई। परिवार का फोकस लापता बच्ची की खोज और भर्ती बच्ची के इलाज पर रहा।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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