Jharkhand News: झारखंड के चतरा जिले में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी परियोजना जल्द शुरू होने वाली है। 50 हजार लीटर क्षमता का मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट अब इटखोरी में स्थापित किया जाएगा। पहले इस प्रोजेक्ट को लक्षणपुर गांव में लगाने की योजना थी, लेकिन तकनीकी टीम ने इटखोरी को ज्यादा उपयुक्त माना है। जिला प्रशासन ने इस दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया है।
यह परियोजना पशुपालकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्लांट की स्थापना से किसानों को दूध की उचित कीमत मिल सकेगी और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
बदला गया प्लांट का स्थान

मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट को पहले सदर प्रखंड के लक्षणपुर गांव में भेड़ बकरा प्रजनन प्रक्षेत्र की भूमि पर स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। लेकिन झारखंड राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादन महासंघ की तकनीकी टीम ने स्थल का निरीक्षण किया।
टीम ने अपनी रिपोर्ट में इटखोरी प्रखंड मुख्यालय स्थित कृषि फार्म की जमीन को ज्यादा उपयुक्त बताया है। तकनीकी कारणों और सुविधाओं को देखते हुए यह फैसला लिया गया। अब इटखोरी के कृषि फार्म में ही यह प्लांट लगाया जाएगा।यह बदलाव परियोजना की सफलता के लिए जरूरी माना जा रहा है। इटखोरी का स्थान परिवहन और बाजार की दृष्टि से भी बेहतर है।
दस एकड़ जमीन पर होगी स्थापना
इटखोरी स्थित कृषि फार्म की 10 एकड़ भूमि पर मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना की जाएगी। यह जमीन प्लांट की जरूरतों के लिए पूरी तरह उपयुक्त है। प्लांट स्थापना के लिए जमीन की अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
झारखंड राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादन महासंघ के प्रबंध निदेशक जयदेव बिस्वास ने 26 सितंबर 2025 को उपायुक्त कीर्तिश्री को पत्र लिखकर एनओसी की मांग की थी। प्रबंध निदेशक की इस मांग पर एनओसी की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
एनओसी मिलने के बाद तकनीकी स्वीकृति प्राप्त की जाएगी। उसके बाद विस्तृत परियोजना प्रस्ताव स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। जिला प्रशासन इस पूरी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने में लगा है।
जिला खनिज फाउंडेशन से मिलेगा पैसा
यह मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट की राशि से स्थापित किया जाएगा। यह राशि खनन क्षेत्रों के विकास के लिए दी जाती है। इस पैसे का उपयोग जिले में दूध उत्पादन, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है।
जिला प्रशासन ने इस दिशा में एक बड़ी और महत्वाकांक्षी पहल की है। अत्याधुनिक तकनीक से लैस यह प्लांट किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। इससे दूध का सही मूल्य मिल सकेगा और उत्पादन भी बढ़ेगा।
फाउंडेशन की राशि का उपयोग जनहित की परियोजनाओं के लिए किया जाता है। यह डेयरी प्लांट भी उसी का हिस्सा है।
तीन साल से लंबित था प्रोजेक्ट
मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना लंबे समय से लंबित थी। करीब तीन वर्ष पहले तत्कालीन उपायुक्त अबु इमरान ने इस दिशा में पहल की थी। लेकिन वे इसे सफल नहीं कर पाए और उनका स्थानांतरण हो गया। उनके बाद रमेश घोलप यहां के उपायुक्त बने। लेकिन उन्होंने प्लांट स्थापना की दिशा में कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई। इस कारण प्रोजेक्ट फिर से ठप हो गया।
वर्तमान उपायुक्त कीर्तिश्री ने इस प्रस्तावित परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए नई पहल की। उन्होंने झारखंड राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ लिमिटेड और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के साथ पत्राचार कर परियोजना को पुनर्जीवित किया।
साल के अंत तक शुरू हो सकता है प्लांट
जिला प्रशासन का प्रयास है कि इस साल के अंत तक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट प्रारंभ हो जाए। इसके लिए सभी विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। एनओसी की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
उपायुक्त कीर्तिश्री का कहना है कि प्लांट की स्थापना की दिशा में तेज गति से काम चल रहा है। स्थल का चयन पहले लक्षणपुर गांव में किया गया था, लेकिन तकनीकी टीम ने इटखोरी को बेहतर बताया है। प्रशासन ने टाइमलाइन तय कर दी है। सभी जरूरी मंजूरियां जल्द मिलने की उम्मीद है। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
तकनीकी टीम ने किया निरीक्षण
हाल के महीनों में झारखंड राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ लिमिटेड और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की संयुक्त तकनीकी टीम ने इटखोरी स्थित कृषि फार्म का निरीक्षण किया। टीम ने विभिन्न पहलुओं का गहराई से अध्ययन किया।
निरीक्षण के दौरान भूमि की उपलब्धता, परिवहन सुविधा, आसपास के बाजार और दूध उत्पादन की संभावनाओं को परखा गया। सभी मानकों पर इटखोरी खरा उतरा। इन सभी कारकों को देखते हुए टीम ने इटखोरी का चयन किया है। तकनीकी दृष्टि से यह स्थान सबसे उपयुक्त पाया गया। यहां सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
एनडीडीबी होगी क्रियान्वयन एजेंसी
डेयरी प्लांट की क्रियान्वयन एजेंसी नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड यानी एनडीडीबी होगी। यह भारत की प्रमुख दुग्ध विकास संस्था है। एनडीडीबी के पास डेयरी परियोजनाओं का लंबा अनुभव है।
एनडीडीबी की भागीदारी से परियोजना की सफलता सुनिश्चित हो जाएगी। संस्था तकनीकी मार्गदर्शन और निगरानी करेगी। इससे प्लांट अंतरराष्ट्रीय मानकों का होगा। एनडीडीबी ने पूरे देश में कई सफल डेयरी परियोजनाएं चलाई हैं। चतरा का यह प्लांट भी उसी श्रृंखला का हिस्सा बनेगा।
50 हजार लीटर की होगी क्षमता
मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट की क्षमता 50 हजार लीटर प्रतिदिन की होगी। यह बड़ी क्षमता वाला प्लांट होगा। तकनीकी टीम ने इस क्षमता को पूरी तरह उपयुक्त बताया है।
इटखोरी में प्लांट की स्थापना होने से कई फायदे होंगे। न सिर्फ चतरा, बल्कि हजारीबाग, बरही और चौपारण जैसे आसपास के क्षेत्रों में भी इसका लाभ मिलेगा। इन क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में दूध का उत्पादन होता है। लेकिन प्रोसेसिंग की सुविधा नहीं होने से किसानों को उचित दाम नहीं मिल पाता। यह प्लांट इस समस्या का समाधान करेगा।
किसानों को मिलेगा फायदा
मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट से सबसे ज्यादा फायदा स्थानीय किसानों और पशुपालकों को होगा। उन्हें अपने दूध का उचित मूल्य मिल सकेगा। अभी दूध बिचौलियों के हाथ बिकता है।
प्लांट लगने के बाद किसान सीधे अपना दूध यहां बेच सकेंगे। इससे उनकी आय में बढ़ोतरी होगी। दूध उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। पशुपालन से जुड़े लोगों के लिए यह एक बड़ा अवसर है। वे अधिक मवेशी पाल सकेंगे। इससे ग्रामीण रोजगार भी बढ़ेगा।
रोजगार के खुलेंगे अवसर
डेयरी प्लांट की स्थापना से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। प्लांट में प्रत्यक्ष रूप से कई लोगों को नौकरी मिलेगी। इसके अलावा अप्रत्यक्ष रोजगार भी बढ़ेंगे।
दूध संग्रह, परिवहन, पैकेजिंग और वितरण जैसे कामों में स्थानीय युवाओं को मौका मिलेगा। यह जिले की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा होगा। प्लांट के आसपास छोटे व्यवसाय भी विकसित होंगे। दुकानें और सेवाएं शुरू होंगी। इससे पूरे क्षेत्र का विकास होगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था होगी मजबूत
मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा बल मिलेगा। किसानों की आय बढ़ने से उनकी क्रय शक्ति बढ़ेगी। वे अपने परिवार के लिए बेहतर सुविधाएं जुटा सकेंगे।
पशुपालन एक स्थायी आय का साधन बनेगा। यह खेती के साथ अतिरिक्त कमाई का जरिया होगा। महिलाएं भी इस क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी। दूध उत्पादन बढ़ने से पोषण स्तर में भी सुधार होगा। बच्चों और परिवार के सदस्यों को पौष्टिक दूध मिल सकेगा।
प्रशासन की प्रतिबद्धता
उपायुक्त कीर्तिश्री ने इस परियोजना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। उन्होंने कहा कि एनओसी की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जिला प्रशासन का लक्ष्य इस साल के अंत तक प्लांट की स्थापना है।
उस दिशा में तीव्र गति से काम चल रहा है। सभी विभाग समन्वय से काम कर रहे हैं। किसी भी तरह की देरी नहीं होने दी जा रही है।
प्रशासन चाहता है कि जल्द से जल्द यह प्लांट चालू हो जाए। इससे किसानों और जिले को लाभ मिलना शुरू हो सकेगा।
आधुनिक तकनीक का होगा इस्तेमाल
मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। यह आधुनिक मशीनों से लैस होगा। दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सभी जरूरी सुविधाएं होंगी।
प्लांट में दूध का पाश्चुरीकरण और पैकेजिंग की सुविधा होगी। विभिन्न प्रकार के दुग्ध उत्पाद भी बनाए जा सकेंगे। इससे बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा हो सकेगी। गुणवत्ता नियंत्रण के लिए आधुनिक प्रयोगशाला भी होगी। यह सुनिश्चित करेगा कि उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता का दूध मिले।
Jharkhand News: बाजार तक पहुंच आसान होगी
इटखोरी का स्थान बाजार की दृष्टि से बहुत अच्छा है। यहां से आसपास के शहरों और कस्बों तक पहुंच आसान है। सड़क संपर्क भी अच्छा है।
प्लांट से तैयार दुग्ध उत्पादों को आसानी से बाजार में पहुंचाया जा सकेगा। परिवहन की लागत भी कम रहेगी। इससे उत्पाद की कीमत प्रतिस्पर्धी बनी रहेगी। आसपास के जिलों में भी इन उत्पादों की अच्छी मांग है। बाजार का विस्तार करना आसान होगा।
यह परियोजना चतरा जिले के विकास में एक नया अध्याय लिखेगी। किसानों की आय दोगुनी करने के सरकारी लक्ष्य में यह महत्वपूर्ण योगदान देगा। जिला प्रशासन की मेहनत जल्द ही रंग लाएगी और प्लांट चालू हो जाएगा।



