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झारखंड में पंचायत स्तर के सरकारी तालाबों की बंदोबस्ती में अब पंचायत के लोगों का होगा दावा, बोलीं मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की

रांची-झारखंड में अब सरकारी तालाब की बंदोदस्ती का दायरा पंचायत स्तर तक ही सीमित रहेगा . पंचायत के अधीन पड़ने वाले सरकारी तालाब में अब उसी पंचायत के लोगों को बोली लगाने और उसके बाद मछली पालन का मौका मिलेगा . अब दूसरे जिले के लोग किसी पंचायत में सरकारी तालाब की बंदोबस्ती में भाग नहीं ले पाएंगे . बहुत जल्द इसको लेकर नियमावली बनाई जाएगी . राज्य की कृषि , पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने औचक निरीक्षण के दौरान विभागीय अधिकारियों को ये दिशा निर्देश दिया है. मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की सोमवार की शाम को अचानक रांची में औचक निरीक्षण के लिए निकली थीं. इस दौरान उन्होंने डोरंडा स्थित मत्स्य निदेशालय केंद्र मछली पार्क और धुर्वा स्थित मत्स्य अनुसंधान केंद्र का औचक निरीक्षण किया . मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की इस दौरान कुव्यवस्था को देख कर काफी नाराज हुई . मछली पार्क में फैली गंदगी , पॉलीथिन के इस्तमाल , आगंतुकों को होने वाली परेशानी को देखते हुए मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने 10 दिनों के अंदर इसमें सुधार लाने का निर्देश दिया है . औचक निरीक्षण के क्रम में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने उपस्थिति पंजी की भी जांच की . काम के समय में अनुपस्थित रहने वाले कर्मियों को अपने कार्य संस्कृति में सुधार लाने का निर्देश भी दिया गया है .

कृषि , पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने राज्य भर में सरकारी तालाब का जिलावार आंकड़ा विभागीय अधिकारियों से मांगा है . राज्य में 12 हजार 580 के करीब सरकारी तालाब है . जिसमें करीब 1 हजार सरकारी तालाब रांची में है . मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि अब ऐसा नियम बनाए जिसमें पंचायत के अधीन पड़ने वाले सरकारी तालाब को उसी पंचायत के को-ऑपरेटिव सोसाइटी को दिया जा सके. तालाब की बंदोबस्ती में किसी दूसरे जिले को मौका नहीं मिलना चाहिए . ऐसा करने से स्थानीय स्तर पर लोगों को मछली पालन के साथ जोड़ कर उन्हें रोजगार मुहैया कराया जा सकता है . कॉपरेटिव सोसाइटी के लिए जरूरी 300 लोगों की अनिवार्यता में भी संशोधन करने का निर्देश मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने दिया है . मंत्री ने छोट-छोटे कॉपरेटिव सोसाइटी बना कर गांव के लोगों को लाभ देने को कहा है . औचक निरीक्षण के क्रम में ये जानकारी मिली की इस साल 25 सौ लाख मछली जीरा छोड़े जाने का लक्ष्य रखा गया था . इस लक्ष्य के एवज में 16 सौ 46 लाख जीरा का वितरण किया जा सका है . सबसे कम लोहरदगा में 60 लाख जीरा का वितरण हुआ है. मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने इसको बढ़ाने के साथ-साथ कल तक रिपोर्ट देने को कहा है . मछली पालन में JSLPS से जुड़ी महिला स्वयं सहायता समूह को जोड़ने की भी तैयारी है . रांची और हजारीबाग जिला के महिला स्वयं सहायता समूह को सबसे पहले मछली पालन से जोड़ने का निर्देश दिया गया है .

 

कृषि , पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की धुर्वा स्थित मत्स्य अनुसंधान केंद्र में चल रहे प्रशिक्षण केंद्र भी पहुंची. मछली पालन को लेकर प्रशिक्षण ले रही महिलाओं से मंत्री ने कई तरह की जानकारी ली.

जानकारी के दौरान ये पता चला कि प्रशिक्षण केंद्र से प्रशिक्षण ले कर लौटी महिलाओं से गांव की दूसरी महिलाओं को पता चला कि मछली पालन से कैसे रोजगार के अवसर मिल सकते हैं. मत्स्य अनुसंधान केंद्र में राज्यभर से आए किसानों को मछली पालन की जानकारी दी जाती है . मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने भी प्रशिक्षण में शामिल किसानों को मछली पालन को बेहतर रोजगार का साधन बताते हुए इसके साथ जुड़ने की सलाह दी.

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