डेस्क: देश में बढ़ती बेरोज़गारी और अस्थिर आजीविका की चुनौती के बीच केंद्र सरकार ने Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission Act, 2025 लागू कर दिया है। इस नए कानून को सरकार विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बता रही है। दावा किया जा रहा है कि यह कानून केवल नौकरी देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्थायी आजीविका, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा। कानून के लागू होते ही देशभर में इसके प्रभाव और व्यवहारिक पक्ष को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
नया रोजगार कानून क्या है और इसका उद्देश्य

इस कानून का मुख्य उद्देश्य हर सक्षम नागरिक को रोजगार या आजीविका का अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार के अनुसार, यह मिशन केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि निजी क्षेत्र, स्वरोज़गार, स्टार्ट-अप, स्थानीय उद्योग और सेवा क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया गया है। इस कानून के तहत राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर पात्र व्यक्ति को काम, प्रशिक्षण या आजीविका से जुड़ा अवसर मिले। सरकार इसे अधिकार आधारित व्यवस्था के रूप में पेश कर रही है, जहाँ रोजगार केवल योजना नहीं बल्कि जिम्मेदारी मानी जाएगी।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में अलग-अलग रणनीति

नए कानून में ग्रामीण और शहरी भारत के लिए अलग-अलग मॉडल अपनाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती से जुड़े कार्य, ग्रामीण उद्योग, पशुपालन, जल संरक्षण, सड़क निर्माण और स्थानीय परियोजनाओं को रोजगार से जोड़ा जाएगा। वहीं शहरी क्षेत्रों में निर्माण, सेवा क्षेत्र, डिजिटल काम, स्टार्ट-अप और स्किल-बेस्ड नौकरियों पर जोर दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे पलायन कम होगा और लोगों को अपने ही क्षेत्र में काम के अवसर मिलेंगे।
कौशल विकास और प्रशिक्षण की अहम भूमिका

इस कानून की सबसे अहम विशेषता कौशल विकास को रोजगार से जोड़ना है। सरकार मानती है कि केवल नौकरी की घोषणा से समस्या हल नहीं होगी, जब तक युवाओं के पास जरूरी कौशल न हो। इसलिए इस मिशन के तहत स्किल ट्रेनिंग, अप्रेंटिसशिप और री-स्किलिंग कार्यक्रमों को अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है। युवाओं को स्थानीय बाजार की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि प्रशिक्षण के बाद रोजगार की संभावना वास्तविक हो, न कि केवल काग़ज़ों तक सीमित।
महिलाओं, युवाओं और कमजोर वर्गों पर फोकस

नए रोजगार कानून में महिलाओं, युवाओं, दिव्यांगों और कमजोर वर्गों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। महिला स्वयं सहायता समूहों, घरेलू उद्योगों और स्थानीय उद्यमों को सीधे रोजगार मिशन से जोड़ा जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी और वे आत्मनिर्भर बनेंगी। वहीं शिक्षित लेकिन बेरोज़गार युवाओं के लिए यह कानून उम्मीद की नई किरण के रूप में देखा जा रहा है।
चुनौतियाँ और ज़मीनी हकीकत
हालाँकि कानून के उद्देश्य बड़े हैं, लेकिन इसकी सफलता ज़मीनी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों की प्रशासनिक क्षमता, फंड की उपलब्धता और निगरानी तंत्र इस मिशन की असली परीक्षा होंगे। पहले भी कई रोजगार योजनाएँ काग़ज़ों में सफल और ज़मीनी स्तर पर कमजोर साबित हुई हैं। यदि इस कानून में पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही नहीं रखी गई, तो यह भी केवल एक और घोषणा बनकर रह सकता है।
निष्कर्ष: उम्मीद और जिम्मेदारी दोनों
Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission Act, 2025 देश की रोजगार नीति में एक बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है। यह कानून सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें विकास को सिर्फ आंकड़ों तक सीमित न रखकर आम नागरिक की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जोड़ा गया है। अगर इसे ईमानदारी और प्रभावी तरीके से लागू किया गया, तो यह बेरोज़गारी की समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है। लेकिन इसके लिए सरकार, राज्य प्रशासन और समाज—तीनों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।



