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NDA में सीट बंटवारे की तस्वीर साफ, औरंगाबाद से त्रिविक्रम नारायण सिंह को टिकट मिलने के संकेत

पटना: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सीट बंटवारे का मामला अब लगभग स्पष्ट हो गया है। प्रत्याशियों की औपचारिक घोषणा से पहले ही संभावित नामों की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि किसी भी दल ने अब तक अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की है, लेकिन स्थानीय स्तर पर समीकरण तय माने जा रहे हैं। सबसे अहम बात यह रही कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) को जिले में एक भी सीट नहीं मिली है।

सूत्रों के अनुसार, औरंगाबाद विधानसभा सीट से भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गोपाल नारायण सिंह के पुत्र त्रिविक्रम नारायण सिंह को टिकट मिलने के संकेत हैं। हालांकि नाम की आधिकारिक घोषणा बाकी है, लेकिन तीन दिनों से जारी बैठकों के बाद पार्टी नेतृत्व ने लगभग सहमति बना ली है। इस सीट से भाजपा के अन्य दावेदारों में गोपाल शरण सिंह, पूर्व विधान पार्षद राजन सिंह, जिला महामंत्री सतीश कुमार सिंह और अनिल सिंह (कुंडा गांव) शामिल थे।


गोह विधानसभा क्षेत्र से रालोमो के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक डॉ. रणविजय कुमार को भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ाने की चर्चा है। इस सीट पर भाजपा के प्रवक्ता मनोज शर्मा भी दावेदार थे, लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने रणविजय कुमार पर भरोसा जताया है।

ओबरा सीट लोजपा (रामविलास) के खाते में है, जहां से पिछली बार उपविजेता रहे डॉ. प्रकाश चंद्रा को दोबारा टिकट मिलने की संभावना है।

नबीनगर विधानसभा क्षेत्र जदयू को मिला है। यहां से सांसद लवली आनंद के पुत्र चेतन आनंद का नाम लगभग फाइनल है।
वहीं रफीगंज सीट से जदयू के प्रमोद सिंह चुनाव लड़ सकते हैं, जबकि अशोक कुमार सिंह भी दावेदारी बनाए हुए हैं।
कुटुंबा सीट हम (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) के हिस्से में गई है, जहां प्रभारी मंत्री संतोष कुमार सुमन उम्मीदवार चयन में जुटे हैं।

राजद-कांग्रेस ने भी तय किए नाम

विपक्षी दल राजद (RJD) और कांग्रेस ने भी अपने संभावित उम्मीदवार तय कर लिए हैं।
राजद की ओर से गोह से भीम यादव, ओबरा से ऋषि कुमार, नबीनगर से विजय कुमार सिंह (डबलू), रफीगंज से मो. नेहालुद्दीन को दोबारा मौका मिलने की संभावना है।

कांग्रेस की ओर से कुटुंबा सीट से प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार मैदान में उतरेंगे, जबकि औरंगाबाद से आनंद शंकर सिंह का नाम सबसे आगे चल रहा है। औरंगाबाद जिले में इस बार एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर तय मानी जा रही है।

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