PM Modi Appeal: प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया इस समय एक गंभीर संकट से गुजर रही है। ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल और सोने की कीमतों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपनी ओर से हर संभव प्रयास कर रही है कि जनता पर इस युद्ध का कम से कम बोझ पड़े, लेकिन यह तभी संभव है जब देश का हर नागरिक एक सैनिक की तरह इस आर्थिक मोर्चे पर साथ खड़ा हो।
PM Modi Appeal: विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने की कवायद
प्रधानमंत्री मोदी ने सोने की खरीद को लेकर अपनी चिंता जताते हुए कहा कि भारत में सोने का आयात बहुत बड़े पैमाने पर होता है और इसके लिए हमें भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अगले एक साल तक सोना नहीं खरीदेंगे। पीएम ने कहा कि चाहे घर में कोई भी मांगलिक कार्य या कार्यक्रम हो, हमें संयम बरतते हुए देश की विदेशी मुद्रा को बचाने में मदद करनी चाहिए। यह कदम सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा और विदेशी मुद्रा भंडार के अनावश्यक निकास को रोकने में मददगार साबित होगा।
पेट्रोल, डीजल और गैस की बचत पर जोर
तेलंगाना की इस रैली में पीएम मोदी ने ऊर्जा संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों और उर्वरकों की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसलिए ईंधन की बचत करना अब अनिवार्य हो गया है। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि नागरिकों को सार्वजनिक परिवहन, जैसे मेट्रो और बसों का अधिक उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने कार-पूलिंग, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने और माल ढुलाई के लिए रेलवे का उपयोग करने की सलाह दी।
प्रधानमंत्री ने कोरोना काल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौरान हमने वर्क फ्रॉम होम (WFH) और वर्चुअल मीटिंग्स जैसी तकनीक को अपनाया था। वर्तमान ऊर्जा संकट से निपटने के लिए उन्होंने कंपनियों और कर्मचारियों से फिर से इन तरीकों को अपनाने की अपील की ताकि पेट्रोल और डीजल की खपत को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि आयातित तेल का उपयोग केवल उतनी ही मात्रा में करें जितनी नितांत आवश्यक हो।
तेलंगाना को 9,400 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात
इस रैली के दौरान प्रधानमंत्री ने केवल अपील ही नहीं की, बल्कि तेलंगाना के विकास के लिए 9,400 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। इन परियोजनाओं में वारंगल में स्थापित देश का पहला पूर्ण रूप से कार्यात्मक ‘पीएम मित्र पार्क’ (PM MITRA Park) भी शामिल है। यह पार्क कपड़ा उद्योग के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है, जो ‘खेत से फाइबर, फैक्ट्री, फैशन और विदेशी बाजार’ के दृष्टिकोण पर आधारित है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे बल्कि भारत के निर्यात क्षेत्र को भी नई शक्ति मिलेगी।
इसके साथ ही पीएम मोदी ने हैदराबाद-नागपुर औद्योगिक गलियारे के तहत जहीराबाद औद्योगिक क्षेत्र की आधारशिला रखी। उन्होंने सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग-167 के चौड़ीकरण परियोजना का भी शिलान्यास किया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि ये बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भविष्य में ईंधन की खपत को कम करने और रसद दक्षता (Logistics Efficiency) को बढ़ाने में मदद करेंगी।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ साझा किया मंच
कार्यक्रम के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब पीएम मोदी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ मंच साझा किया। प्रधानमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में राजनीतिक कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री को साथ मिलकर काम करने का न्योता दिया। पीएम मोदी ने कहा कि विकास के लिए राजनीति को अलग रखकर केंद्र और राज्य को एक साथ चलना चाहिए। इस दौरान मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और मंच पर मौजूद अन्य नेता अपनी हंसी नहीं रोक पाए। प्रधानमंत्री का यह रुख सहकारी संघवाद की उनकी रणनीति को दर्शाता है।
PM Modi Appeal: युद्ध का प्रभाव और आत्मनिर्भरता का संकल्प
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के अंत में देशवासियों को आगाह किया कि आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ने से आने वाले समय में चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि हमें खाद्य तेल के आयात को कम करने के लिए तिलहन के उत्पादन पर ध्यान देना होगा और रसायनों के बजाय प्राकृतिक खेती को अपनाना होगा ताकि महंगे उर्वरकों के आयात पर निर्भरता कम हो सके।
पीएम मोदी की यह अपील केवल एक सरकारी सुझाव नहीं बल्कि एक ‘नागरिक सत्याग्रह’ का आह्वान है। उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल सीमा पर जान देने का नाम नहीं है, बल्कि संकट के समय देश की आर्थिक सीमाओं की रक्षा करना भी सच्ची देशभक्ति है। प्रधानमंत्री ने हर भारतीय से ‘रुपये का संरक्षक’ बनने और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का संकल्प लेने को कहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रधानमंत्री की इस अपील का जनता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और सोने तथा पेट्रोलियम के आयात में कमी आती है, तो भारत अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखते हुए इस वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर से सफलतापूर्वक बाहर निकल सकता है। अब यह देखना होगा कि देश की जनता प्रधानमंत्री के इस ‘एक साल के साथ’ के आह्वान को कितनी गंभीरता से लेती है।
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