Top 5 This Week

Related Posts

पीएम मोदी ने जताई खुशी: तमिल संस्कृति के संरक्षक पेरुंबिदुगु मुथरैयर द्वितीय पर जारी हुआ स्मारक डाक टिकट

वाराणसी – देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। हाल ही में तमिलनाडु के प्राचीन शासक सम्राट पेरुंबिदुगु मुथरैयर द्वितीय (सुवरण मारन) के सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया गया। इस टिकट के जारी होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी जताई है। उन्होंने इसे तमिल संस्कृति और इतिहास के संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय प्रयास बताया।

डाक टिकट का विमोचन

14 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति एनक्लेव में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने इस स्मारक डाक टिकट का विमोचन किया। इस कार्यक्रम में कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार तमिल भाषा और संस्कृति को लगातार समर्थन दे रही है। काशी तमिल संगमम जैसी पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अब तक कम मान्यता मिले तमिल राजाओं, नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मान देने का काम चल रहा है। इस डाक टिकट का जारी होना भी इसी कड़ी का हिस्सा है।

पीएम मोदी की प्रतिक्रियाHero Image

डाक टिकट जारी होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने लिखा, “उपराष्ट्रपति महोदय श्री सी.पी. राधाकृष्णन जी द्वारा सम्राट पेरुंबिदुगु मुथरैयर द्वितीय (सुवरण मारन) के सम्मान में डाक टिकट जारी किए जाने पर बहुत प्रसन्नता हुई। वे एक कुशल प्रशासक थे, जिनमें दूरदर्शिता, पूर्वानुमान और रणनीतिक बुद्धिमत्ता थी। वे न्याय स्थापित करने में दृढ़ थे और तमिल संस्कृति के महान संरक्षक थे। युवाओं से अनुरोध है कि वे उनके असाधारण जीवन के बारे में अधिक पढ़ें।”पीएम मोदी की यह टिप्पणी न केवल सम्राट की प्रशंसा करती है, बल्कि युवा पीढ़ी को प्राचीन इतिहास से जुड़ने के लिए प्रेरित भी करती है।

कौन थे सम्राट पेरुंबिदुगु मुथरैयर द्वितीय?

सम्राट पेरुंबिदुगु मुथरैयर द्वितीय (जिन्हें सुवरण मारन या कुवावन मारन भी कहा जाता है) सातवीं से नौवीं शताब्दी के बीच तमिलनाडु के मध्य क्षेत्रों पर शासन करने वाले मुथरैयर वंश के प्रसिद्ध शासक थे। वे पल्लव साम्राज्य के अधीनस्थ रहे, लेकिन अपनी स्वतंत्रता और शक्ति के लिए जाने जाते थे।उनका शासन मुख्य रूप से तंजावुर, तिरुचिरापल्ली (त्रिची), पुडुक्कोट्टई, पेरंबलुर और तिरुवारूर क्षेत्रों में था। इतिहासकारों के अनुसार, वे एक ऊर्जावान प्रशासक थे, जिन्होंने न्याय व्यवस्था को मजबूत किया और राज्य का विस्तार किया। उन्होंने पांड्य और चेर राजवंशों के खिलाफ कई युद्ध लड़े और कम से कम 16 लड़ाइयों में विजय प्राप्त की। कभी हार नहीं मानने वाले योद्धा के रूप में उनकी ख्याति थी।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे तमिल संस्कृति के बड़े संरक्षक थे। उन्होंने मंदिरों का निर्माण करवाया, कला और साहित्य को प्रोत्साहन दिया। सेन्दलाई जैसे स्थानों में उनके समय के शिव मंदिरों में कविताएं और शिलालेख मिलते हैं, जो उनकी प्रशंसा करते हैं। वे जैन और हिंदू दोनों परंपराओं से जुड़े थे, लेकिन तमिल भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने में उनका योगदान अतुलनीय है।

मुथरैयर वंश का इतिहास

मुथरैयर वंश सातवीं शताब्दी से उभरा और तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र में शक्तिशाली रहा। कुछ इतिहासकार उन्हें कलभ्र वंश के वंशज मानते हैं, जो प्राचीन तमिल क्षेत्र में आए थे। इस वंश के शासक पल्लवों के सहयोगी थे, लेकिन बाद में चोलों के उदय के साथ उनका प्रभाव कम हुआ। विजयालय चोल ने नौवीं शताब्दी में तंजावुर पर कब्जा कर मुथरैयर शासन को समाप्त किया। फिर भी, मुथरैयर समुदाय आज भी तमिलनाडु में मजबूत है और अपनी विरासत पर गर्व करता है।

यह कदम क्यों महत्वपूर्ण है?

यह डाक टिकट सिर्फ एक टिकट नहीं, बल्कि भारत की विविधता और एकता का प्रतीक है। कई प्राचीन तमिल शासक इतिहास की किताबों में कम जगह पाते हैं। केंद्र सरकार की यह पहल उन भूले हुए नायकों को सामने ला रही है। काशी तमिल संगमम जैसे कार्यक्रमों से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक पुल मजबूत हो रहे हैं। इससे युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ेगी और राष्ट्रीय गौरव बढ़ेगा।तमिलनाडु सरकार ने भी पहले इस डाक टिकट की मांग की थी। अब यह जारी होकर सभी की भावनाओं का सम्मान करता है।

निष्कर्ष :

सम्राट पेरुंबिदुगु मुथरैयर द्वितीय जैसे महान शासकों को डाक टिकट के माध्यम से सम्मान देना एक सराहनीय कदम है। प्रधानमंत्री मोदी की खुशी और उपराष्ट्रपति का विमोचन इस बात का संकेत है कि भारत अपनी प्राचीन विरासत को संजो रहा है। तमिल संस्कृति के इस महान संरक्षक की याद हमें सिखाती है कि न्याय, दूरदर्शिता और सांस्कृतिक संरक्षण से ही राष्ट्र मजबूत होता है। उम्मीद है कि ऐसे प्रयास आगे भी जारी रहेंगे, जिससे हमारी आने वाली पीढ़ियां अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेंगी। यह न केवल तमिलनाडु, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व की बात है।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles