नई दिल्ली: चेन्नई में ट्रेडिशनल फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) डिस्ट्रीब्यूटर्स ने बड़ी कंपनियों पर Predatory Pricing और भेदभावपूर्ण सप्लाई पॉलिसीज अपनाने का आरोप लगाते हुए शनिवार को विरोध प्रदर्शन किया है. डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है कि इन पॉलिसीज के चलते राज्य के छोटे डिस्ट्रीब्यूटर्स और रिटेल दुकानें बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं.
यह प्रदर्शन तमिलनाडु कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन फेडरेशन की अगुवाई में किया है, जो ऑल इंडिया डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन फेडरेशन (FAIDA) से संबद्ध है. एगमोर के पास राजरत्नम स्टेडियम में हुए इस प्रदर्शन में हजारों डिस्ट्रब्युटर्स ने भाग लिया, जो देश की ट्रेडिशनल एफएमसीजी सप्लाई चेन की रीढ़ माने जाते हैं.
क्या है विवाद की जड़
इस विवाद की जड़ एफएमसीजी कंपनियों की मल्टी-प्राइस स्ट्रैटेजी है. डिस्ट्रीब्यूटर्स का आरोप है कि कंपनियां ट्रेडिशनल डिस्ट्रीब्यूटर्स को एक कीमत पर प्रोडक्ट उपलब्ध कराती हैं, जबकि वही प्रोडक्ट बड़े कॉर्पोरेट रिटेलर्स, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और क्विक-कॉमर्स कंपनियों जैसे डी-मार्ट, जियोमार्ट, मेट्रो और स्मार्ट बाजार को काफी कम दरों पर दिए जा रहे हैं. इससे कॉम्पीटीशन पूरी तरह असमान हो गया है और छोटे रिटेल दुकानदारों के लिए टिके रहना मुश्किल हो गया है.
आरोप – बड़ी कंपनियाँ छोटों को मार रही हैं
डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है – बड़ी FMCG कंपनियाँ ट्रेडिशनल डिस्ट्रीब्यूटर्स को एक कीमत पर माल देती हैं, लेकिन वही माल डी-मार्ट, जियोमार्ट, मेट्रो, स्मार्ट बाजार जैसे बड़े रिटेलर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को बहुत सस्ते में। “एक ही प्रोडक्ट, दो कीमतें – ये कॉम्पिटिशन नहीं, अन्याय है।”
मल्टी-प्राइस स्ट्रैटेजी – छोटे रिटेलर्स का दम घुट रहा है
इस भेदभाव से छोटे किराना स्टोर, लोकल दुकानदार टिक नहीं पा रहे। ग्राहक सस्ते ऑनलाइन या बड़े स्टोर की तरफ जा रहे हैं। ट्रेडिशनल डिस्ट्रीब्यूटर्स प्रभावित, लाखों नौकरियाँ खतरे में। “बड़ा हमेशा जीत जाए, तो छोटा कैसे जिएगा?”
असमानता से गुस्सा और हताशा बढ़ती है
मनोविज्ञान में “रिलेटिव डेप्रिवेशन” कहते हैं – जब एक ग्रुप को लगे कि उसे अन्याय हो रहा है, तो विरोध बढ़ता है। ये प्रदर्शन उसी का नतीजा है। छोटे व्यापारी महसूस कर रहे हैं – मेहनत करो, लेकिन बड़ा जीते। “जब मेहनत का फल दूसरे को मिले, तो दिल में आग लग जाती है।”
FAIDA से जुड़े एसोसिएशन की अगुवाई – देशव्यापी मुद्दा
ये प्रदर्शन ऑल इंडिया डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन फेडरेशन (FAIDA) से संबद्ध तमिलनाडु फेडरेशन ने किया। हजारों लोग सड़क पर उतरे। “एक की आवाज़ जब हज़ारों की हो जाए, तो बदलाव की शुरुआत हो जाती है।”
छोटे दुकानदारों का दर्द – जो रोज़ की ज़िंदगी है
लाखों किराना स्टोर, लोकल दुकानें – ये देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। लेकिन बड़ी कंपनियों की पॉलिसी से दम घुट रहा है। “छोटी दुकान वो नहीं जो सामान बेचती है, वो वो है जो परिवार चलाती है।”
आखिरी बात –
ये प्रदर्शन सिर्फ़ चेन्नई का नहीं, पूरे देश के छोटे व्यापारियों का है। बड़ी कंपनियाँ सुनें, सरकार देखे। “न्याय वो नहीं जो बड़ा जीते, न्याय वो है जहाँ छोटा भी जी सके।”



