Top 5 This Week

Related Posts

पीएनबी घोटाले के आरोपी मेहुल चोकसी की अंतिम उम्मीद टूटी: बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत ने अपील ठुकराई

डेस्क – बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत ने भगोड़े हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ऑफ कैसेशन ने चोकसी की भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया। इससे भारत लाने का रास्ता अब लगभग साफ हो गया है। चोकसी पर पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 13 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है।

पीएनबी घोटाला क्या था?

मेहुल चोकसी और उनके भांजे नीरव मोदी पर मिलकर पीएनबी बैंक को बड़ा चूना लगाने का आरोप है। साल 2018 में यह घोटाला सामने आया था। बैंक के अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) जारी कराकर करोड़ों रुपये विदेश भेजे गए। सीबीआई के अनुसार, अकेले चोकसी ने करीब 6400 करोड़ रुपये की हेराफेरी की। घोटाला सामने आने से ठीक पहले जनवरी 2018 में चोकसी भारत से भागकर एंटीगुआ चले गए थे। वहां उन्होंने नागरिकता ले ली थी।

चोकसी बेल्जियम कैसे पहुंचे?Image result for मेहुल चौकसी

चोकसी इलाज के बहाने बेल्जियम पहुंचे थे। उनकी पत्नी बेल्जियम की नागरिक हैं, इसलिए उन्हें वहां रहने की अनुमति मिल गई। अप्रैल 2025 में एंटवर्प में उन्हें गिरफ्तार किया गया। भारत ने अगस्त 2024 में प्रत्यर्पण की मांग की थी। मुंबई की विशेष अदालत के वारंट के आधार पर बेल्जियम में कार्रवाई हुई।

कोर्ट में चोकसी ने क्या दलीलें दीं?

चोकसी ने अपील में कहा कि भारत लौटने पर उन्हें निष्पक्ष मुकदमा नहीं मिलेगा। जांच एजेंसियां उन्हें यातना देंगी। जेल की हालत खराब है, वहां अमानवीय व्यवहार होगा। उन्होंने एंटीगुआ से कथित अपहरण के प्रयास का भी जिक्र किया। साथ ही कुछ रिपोर्ट्स का हवाला देकर भारत की जेलों पर सवाल उठाए।

बेल्जियम कोर्ट ने क्यों खारिज की अपील?

बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि चोकसी के सभी दावे बेबुनियाद हैं। उन्होंने कोई ठोस सबूत नहीं दिया कि भारत में उन्हें व्यक्तिगत रूप से खतरा है। भारत सरकार ने आश्वासन दिया है कि चोकसी को मुंबई की आर्थर रोड जेल के बैरक नंबर 12 में रखा जाएगा। यह बैरक सुरक्षित है, निजी शौचालय है और मानवीय सुविधाएं हैं। कोर्ट ने कहा कि चोकसी जांच एजेंसियों के नहीं, अदालत के अधीन रहेंगे। निचली अदालतों के फैसले में कोई गलती नहीं है। अपील खारिज करते हुए चोकसी पर 104 यूरो (करीब 11 हजार रुपये) का जुर्माना भी लगाया गया।

अब आगे क्या होगा?

यह फैसला बेल्जियम में कानूनी लड़ाई का अंतिम पड़ाव है। अब बेल्जियम की सरकार प्रत्यर्पण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करेगी। जल्द ही चोकसी को भारत लाया जा सकता है। भारत में सीबीआई और ईडी उनके खिलाफ कई चार्जशीट दाखिल कर चुकी हैं। कई गैर-जमानती वारंट भी pending हैं।

भारत के लिए यह बड़ी जीत क्यों है?

यह फैसला भारत की उस मुहिम को मजबूती देता है जिसमें भगोड़े आर्थिक अपराधियों को वापस लाया जा रहा है। नीरव मोदी अभी ब्रिटेन में प्रत्यर्पण की लड़ाई लड़ रहे हैं। चोकसी का मामला दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय अदालतें भारत के आश्वासनों पर भरोसा कर रही हैं। पीएनबी घोटाले के पीड़ितों को अब न्याय की उम्मीद बढ़ गई है।

निष्कर्ष :

मेहुल चोकसी की कानूनी लड़ाई अब खत्म होने की कगार पर है। बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत का फैसला साफ कहता है कि कानून से भागना आसान नहीं। भारत में लौटकर उन्हें घोटाले के आरोपों का सामना करना होगा। यह मामला सभी भगोड़ों के लिए सबक है कि देर-सबेर न्याय जरूर मिलता है। भारत सरकार की कोशिशों से आर्थिक अपराधियों पर नकेल कस रही है। पीड़ित बैंक और जनता को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles