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महिलाओं के स्मार्टफोन बैन पर सियासी तूफान, पंचायत के फैसले पर बीजेपी-कांग्रेस

राजस्थान :जालौर जिले में खाप पंचायत द्वारा महिलाओं के स्मार्टफोन बैन किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है.खाप पंचायत के फैसले पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों ने हैरानी जताई है. इसे महिला अधिकारों का सीधे तौर पर हनन बताया है.

इस मामले पर बीजेपी का पक्ष रखने के लिए अधिकृत की गई प्रदेश मंत्री और वरिष्ठ महिला नेता एकता अग्रवाल ने कहा कि यह फैसला कतई बर्दाश्त करने लायक नहीं है. फैसला लेने वाली खाप पंचायत को समझा बुझाकर इसे वापस लेने के लिए तैयार किया जाएगा और अगर फैसला वापस नहीं लिया जाता है तो इस मामले में सरकार से दखल देने की सिफारिश की जाएगी.

‘महिलाओं के साथ खड़ी है बीजेपी’

प्रदेश मंत्री एकता अग्रवाल ने ये भी कहा कि पार्टी सरकार के माध्यम से इस फैसले को बदलवाएगी. उन्होंने कहा कि जालौर की महिलाओं को बीजेपी आश्वस्त कर रही है कि उनके साथ कतई नहीं नाइंसाफी नहीं होने दी जाएगी. एकता अग्रवाल ने कहा कि इस मामले में राजस्थान बीजेपी और यहां की सरकार पूरी तरह महिलाओं के साथ है. अगर कम उम्र के बच्चे और बच्चियों दोनों के लिए ही फैसला दिया जाता तो वह ठीक था.

कांग्रेस ने भी फैसले पर जताई हैरानी

राजस्थान में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी जालौर जिले में खाप पंचायत द्वारा महिलाओं के स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाए जाने के फैसले पर हैरानी जताई है. उन्होंने कहा कि यह फैसला हैरान कर देने वाला है. इससे कतई सहमत नहीं हुआ जा सकता. सरकार को इस मामले में फौरन दखल देना चाहिए.

उन्होंने कहा कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए. यह महिलाओं के मौलिक अधिकारों का हनन है. उनकी आजादी पर हमला करने वाला है. कांग्रेस पार्टी इस तरह के फैसलों से कतई इत्तेफाक नहीं रखती है. इस मामले में कड़ी कार्रवाई करके सख्त संदेश दिए जाने की जरूरत है.

ये महिलाओं की आजादी पर हमला- कांग्रेस

इसके अलावा कांग्रेस ने भी खाप पंचायत के इस फैसले की निंदा की है. कांग्रेस सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने कहा कि यह पूरी तरह से महिलाओं की आजादी पर हमला है. उनके साथ भेदभाव करने वाला है. उन्होंने कहा कि इस मामले में राजस्थान सरकार को आगे आना चाहिए और सरकार को इस मामले में दखल देना चाहिए.

कांग्रेस सांसद ने ये भी कहा कि महिलाओं के साथ भेदभाव करने वाले फैसले को वापस लिया जाना चाहिए. आजादी के इतने साल बाद में महिलाओं के साथ इस तरह का भेदभाव निंदनीय है. इसका कतई समर्थन नहीं किया जा सकता. अब वक्त आ गया है कि मनमाने फैसले और फरमान जारी करने वाली खाप पंचायतो पर अंकुश लगाया जाए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी महिलाओं के अधिकारों को लेकर उनके साथ खड़ी रहेगी.

निष्कर्ष :

जालौर में खाप पंचायत द्वारा महिलाओं के स्मार्टफोन पर लगाया गया प्रतिबंध न केवल सामाजिक रूढ़िवादिता को दर्शाता है, बल्कि यह महिलाओं के मौलिक अधिकारों और उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार भी है। इस फैसले के खिलाफ बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों का एक स्वर में विरोध सामने आना यह दिखाता है कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर महिलाओं के अधिकारों का संरक्षण जरूरी है। अब यह जिम्मेदारी राज्य सरकार की है कि वह ऐसे मनमाने और भेदभावपूर्ण फैसलों पर सख्त रुख अपनाते हुए महिलाओं की आज़ादी और समानता सुनिश्चित करे।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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