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रूस की संपत्ति जब्त करने पर पुतिन का तीखा हमला: ‘ये डकैती है, भुगतना पड़ेगा अंजाम’

डेस्क – रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय संघ (EU) को चेतावनी दी है कि रूस की जमी हुई संपत्तियों को जब्त करने की कोशिश खुल्लम-खुल्ला डकैती है। यह बयान उन्होंने अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया, जब EU ने यूक्रेन की मदद के लिए रूसी संपत्तियों का इस्तेमाल करने की योजना पर विचार किया था। पुतिन ने कहा कि इससे यूरो जोन पर दुनिया का भरोसा कम हो जाएगा। आइए इस मामले को विस्तार से समझते हैं।

जमी हुई रूसी संपत्तियां क्या हैं?

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद 2022 में पश्चिमी देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए। इनमें रूस की केंद्रीय बैंक की लगभग 300 अरब यूरो की संपत्तियां जमा कर दी गईं। इनमें से ज्यादातर (करीब 210 अरब यूरो) EU देशों में हैं, खासकर बेल्जियम के यूरोक्लियर डिपॉजिटरी में। ये संपत्तियां बॉन्ड और अन्य निवेश के रूप में हैं। EU इनसे होने वाले ब्याज का कुछ हिस्सा पहले ही यूक्रेन की मदद के लिए इस्तेमाल कर चुका है। लेकिन अब EU सोच रहा था कि इन संपत्तियों को गिरवी रखकर यूक्रेन को बड़ा कर्ज दिया जाए।

EU की योजना क्या थी?

EU नेता यूक्रेन को 2026-2027 तक करीब 90 अरब यूरो (लगभग 105 अरब डॉलर) का कर्ज देना चाहते थे। इस कर्ज को रूसी संपत्तियों से सुरक्षित करने की योजना थी। मतलब, अगर रूस यूक्रेन को युद्ध क्षतिपूर्ति नहीं देता, तो ये संपत्तियां इस्तेमाल कर कर्ज चुकाया जा सकता था। कई नेता, जैसे जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, इस योजना के समर्थक थे। उनका मानना था कि इससे रूस पर दबाव बढ़ेगा और पुतिन शांति वार्ता के लिए मजबूर होंगे। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी EU नेताओं से अपील की कि रूसी संपत्तियों का इस्तेमाल जायज है।

क्यों नहीं हुई योजना सफल?

EU की बैठक में लंबी बहस हुई। बेल्जियम ने सबसे ज्यादा विरोध किया। वहां ज्यादातर रूसी संपत्तियां रखी हैं, और बेल्जियम को डर था कि रूस अदालत में मुकदमा करेगा या जवाबी कार्रवाई करेगा। हंगरी जैसे कुछ देश भी खिलाफ थे। आखिरकार, EU ने रूसी संपत्तियों को छुए बिना अपना कर्ज उठाने का फैसला किया। संपत्तियां जमी रहेंगी, लेकिन कर्ज EU के बजट से आएगा। EU ने कहा कि अगर रूस क्षतिपूर्ति नहीं देगा, तो भविष्य में इन संपत्तियों का इस्तेमाल हो सकता है।

पुतिन ने क्या कहा?Image result for पुतिन की EU को कड़ी चेतावनी:

पुतिन की सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर सवाल पूछा गया। उन्होंने स्पष्ट कहा, “चोरी तो छिपकर की जाती है, लेकिन यहां खुल्लेआम करने की कोशिश हो रही है। यह डकैती है।” उन्होंने चेतावनी दी कि डकैतों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। पुतिन का कहना था कि इससे यूरो जोन की विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी। कई देश, जैसे तेल उत्पादक देश, अपना पैसा यूरोप में रखते हैं। अगर EU ऐसा करेगा, तो कोई भरोसा नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “चाहे जो चुराएं, आखिर में वापस करना पड़ेगा।” रूस अपनी संपत्तियों की रक्षा अदालतों में करेगा।

रूस की जवाबी तैयारी

रूस पहले से तैयार है। उसने यूरोक्लियर पर 230 अरब डॉलर का मुकदमा किया है। पुतिन ने कानून बनाए हैं कि अगर पश्चिमी देश रूसी संपत्ति जब्त करेंगे, तो रूस यूरोपीय कंपनियों की संपत्ति जब्त कर लेगा। इससे EU देशों को नुकसान हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय प्रभाव

यह मामला सिर्फ रूस और EU तक नहीं है। दुनिया भर के देश देख रहे हैं कि संपत्ति की सुरक्षा कितनी है। अगर EU रूसी संपत्ति जब्त करता, तो यह मिसाल बन जाती। अन्य देश सोचते कि कल उनके साथ भी ऐसा हो सकता है। पुतिन ने इसे संपत्ति के अधिकार पर हमला बताया।

निष्कर्ष :

पुतिन का यह बयान EU को सीधी चेतावनी है कि रूस अपनी संपत्ति नहीं छोड़ेगा। EU की योजना फिलहाल टल गई, लेकिन संपत्तियां जमी हैं और भविष्य में इस्तेमाल की संभावना बनी हुई है। यह यूक्रेन युद्ध को लंबा खींच सकता है। एक तरफ EU और पश्चिम यूक्रेन की मदद करना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ रूस इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानता है। आखिर में, यह दिखाता है कि आर्थिक प्रतिबंध कितने जटिल हो सकते हैं। दुनिया को उम्मीद है कि शांति वार्ता से समाधान निकले, वरना दोनों तरफ नुकसान बढ़ता जाएगा। रूस और पश्चिम के बीच तनाव कम होने के बजाय और गहरा सकता है।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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