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Putrada Ekadashi 2026: सावन पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त को, इन 5 गलतियों से बचें वरना व्रत का फल नहीं मिलेगा

Putrada Ekadashi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल सावन मास की पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त को रखा जाएगा। संतान की कामना रखने वाले दंपतियों के लिए यह व्रत बेहद खास माना जाता है। सनातन परंपरा में विधि-विधान से रखने पर पुत्र प्राप्ति का फल मिलने की मान्यता है। साल में दो बार यह संयोग बनता है। एक पौष मास में और दूसरा सावन शुक्ल पक्ष में। इस बार सावन पुत्रदा एकादशी का पारण 24 अगस्त को किया जाएगा।

व्रत रखने वाले भक्तों को कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी है। साथ ही कुछ काम ऐसे हैं जिन्हें करने से व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। सही तरीके से व्रत रखने से मानसिक शांति और शुभ फल दोनों प्राप्त होते हैं।

Putrada Ekadashi 2026: साल में दो बार आता है पुत्रदा एकादशी का योग

पंचांग के मुताबिक पुत्रदा एकादशी साल में दो बार पड़ती है। पौष मास की एकादशी को पौष पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। दूसरी सावन शुक्ल पक्ष में आती है। इस साल सावन वाली तिथि 23 अगस्त को है। व्रत का पारण अगले दिन यानी 24 अगस्त को होगा। दोनों मौकों पर व्रत का महत्व समान माना जाता है। संतान सुख की इच्छा रखने वाले इन तिथियों का विशेष इंतजार करते हैं।

पुत्रदा एकादशी के दिन अनाज का सेवन न करें

धर्म शास्त्रों के अनुसार व्रत रखने वाली महिलाओं को किसी भी प्रकार के अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। चावल का सेवन भी इस दिन निषेध माना गया है। व्रती फल, सेंधा नमक या सिर्फ जल के सहारे व्रत रख सकते हैं। बिना पानी के भी व्रत रखा जा सकता है। सही तरीके से उपवास रखने से लाभ मिलता है।

बड़ों का अपमान और अपशब्द से बचें

पुत्रदा एकादशी के दिन घर के किसी भी बड़े-बुजुर्ग का अपमान नहीं करना चाहिए। किसी के लिए अपशब्द का इस्तेमाल करने से भी बचना जरूरी है। झूठ बोलना, क्रोध करना और दूसरों की निंदा करना वर्जित माना गया है। ये बातें व्रत की पवित्रता को भंग करती हैं। शांत और सकारात्मक व्यवहार रखने से व्रत सफल रहता है।

नॉनवेज और तामसिक चीजों से दूर रहें

सावन पुत्रदा एकादशी पर नॉनवेज या तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा जैसी चीजें तामसिक मानी गई हैं। इनके सेवन से मानसिक शांति भंग होती है और व्रत का शुभ फल नहीं मिलता। दशमी के दिन से ही लहसुन-प्याज का सेवन बंद कर देना चाहिए। सात्विक भोजन व्रत की सफलता बढ़ाता है।

दिन में सोने से परहेज रखें

संतान की कामना से व्रत रखने वाली महिलाओं को इस दिन सोने से बचना चाहिए। दिन में आराम करने से व्रत का प्रभाव कम हो सकता है। जागते रहकर भगवान विष्णु का स्मरण करें। पूजा-पाठ में समय बिताने से मन एकाग्र रहता है। सही अनुशासन से व्रत का पूरा लाभ मिलता है।

भगवान विष्णु की पूजा में इन चीजों का इस्तेमाल करें

पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा में पीले फूल, पीले फल और तुलसी का विशेष रूप से उपयोग करना चाहिए। ये वस्तुएं पूजा को और शुभ बनाती हैं। श्रद्धापूर्वक आरती और मंत्र जाप करें। तुलसी दल चढ़ाने से विशेष फल मिलने की मान्यता है। साफ-सुथरे मन से पूजा करने पर आशीर्वाद मिलता है।

व्रत का पारण कैसे और कब करें?

एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। 24 अगस्त को सूर्योदय के बाद श्रद्धापूर्वक ब्राह्मणों को भोजन कराएं। उन्हें दक्षिणा देकर व्रत का पारण पूरा करें। पंचांग के अनुसार पारण सुबह 5 बजकर 24 मिनट के बाद करना अच्छा रहता है। सही समय पर पारण करने से व्रत सफल माना जाता है।

Putrada Ekadashi 2026: दशमी से ही शुरू करें नियमों का पालन

पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने वाली महिलाओं को दशमी के दिन से ही नियमों का पालन करना जरूरी होता है। दशमी पर लहसुन-प्याज से दूर रहें। सात्विक रहन-सहन अपनाएं। इससे एकादशी का व्रत और प्रभावशाली बनता है। तैयारी पहले से करने से व्रत आसानी से पूरा होता है।

सावन पुत्रदा एकादशी संतान सुख की कामना रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। 23 अगस्त को व्रत रखकर और 24 अगस्त को सही समय पर पारण करके भक्त इस व्रत का लाभ उठा सकते हैं। अनाज, नॉनवेज, अपशब्द और दिन में सोने जैसी गलतियों से बचें। भगवान विष्णु की विधिवत पूजा और सात्विक आचरण से व्रत सफल होता है। नियमों का पालन करने से न सिर्फ मनोकामना पूरी होने की संभावना बढ़ती है बल्कि मन को भी शांति मिलती है। इस पावन अवसर पर श्रद्धा और अनुशासन बनाए रखना सबसे जरूरी है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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