Rahul Gandhi in Assam: असम विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पारा तेजी से चढ़ने लगा है। कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को असम के बोकाजन में एक बड़ी चुनावी रैली को संबोधित किया और बीजेपी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को भारत का सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री करार दिया और आरोप लगाया कि वे पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ मिलकर असम में एक ‘लैंड ATM’ चला रहे हैं, जिसके जरिए आम लोगों की जमीन छीनकर बड़े कॉर्पोरेट घरानों को सौंपी जा रही है।
राहुल गांधी की इस रैली ने असम की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। उनके भाषण में जमीन, भ्रष्टाचार, जुबिन गर्ग और संविधान, कई बड़े मुद्दे एक साथ उठे। यह रैली सिर्फ एक चुनावी भाषण नहीं थी, बल्कि बीजेपी को एक के बाद एक मोर्चे पर घेरने की कोशिश थी।
हिमंता भारत के सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री हैं

राहुल गांधी ने मंच से बेबाकी के साथ कहा कि हिमंत बिस्वा सरमा इस देश के सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरमा का परिवार भी भ्रष्टाचार के मामले में नंबर एक पर है। राहुल ने वादा किया कि जब कांग्रेस की सरकार बनेगी तो हिमंता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा “अभी वह अपनी बड़ाई कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद वह पूरी तरह चुप हो जाएंगे।”
यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने हिमंता बिस्वा सरमा पर इस तरह का सीधा हमला किया हो, लेकिन इस बार ‘देश का सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री’ जैसा बयान राजनीतिक रूप से बेहद तीखा है। बीजेपी इस बयान पर पलटवार करने में देर नहीं करेगी, यह भी तय है।
Rahul Gandhi in Assam: क्या है ‘लैंड ATM’ का मामला?
राहुल गांधी ने इस रैली में ‘लैंड ATM’ का जो जिक्र किया, वह इस पूरे भाषण का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया। उन्होंने आरोप लगाया कि असम में नरेंद्र मोदी, अमित शाह और हिमंत बिस्वा सरमा ने मिलकर एक ऐसा तंत्र बना दिया है जो आम लोगों और किसानों की जमीन छीनता है और उसे बड़े उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट घरानों को सौंप देता है।
राहुल गांधी ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि असम में तीन बड़े कॉरपोरेट घरानों को कुल 98,400 बीघा जमीन दे दी गई है। उन्होंने कहा कि यह जमीन वहां के स्थानीय लोगों, किसानों और आदिवासियों से छीनी गई। एटीएम की तरह, जिस तरह एटीएम से पैसे निकलते हैं, उसी तरह इस ‘लैंड ATM’ से लोगों की जमीन निकाली जा रही है और बड़े कारोबारियों के खाते में डाली जा रही है।
यह तुलना बेहद सरल भाषा में एक बड़े राजनीतिक आरोप को समझाने की कोशिश है। चुनावी रैलियों में राहुल गांधी इसी तरह की सीधी और आम बोलचाल की भाषा में जटिल मुद्दों को रखते हैं, और इस बार यह तरीका असम के ग्रामीण इलाकों में खासा असरदार साबित हो सकता है।
जुबिन गर्ग का जिक्र, दर्द और वादा दोनों
राहुल गांधी ने अपने भाषण में असम के मशहूर और लोकप्रिय गायक जुबिन गर्ग को भी याद किया। जुबिन गर्ग असम की सांस्कृतिक पहचान का एक बड़ा हिस्सा थे और उनके निधन ने पूरे असम को गहरा दुख दिया था।
राहुल ने कहा कि जुबिन गर्ग असम के लोगों के लिए खड़े थे। वे सिर्फ किसी एक समुदाय, एक धर्म या एक भाषा के नहीं थे। वे असम की उस बहु-सांस्कृतिक और बहु-धार्मिक परंपरा की आवाज थे जो इस राज्य को खास बनाती है।
राहुल गांधी ने वादा किया कि कांग्रेस की सरकार बनने के 100 दिनों के भीतर जुबिन गर्ग के निधन से जुड़े मामले में न्याय दिलाया जाएगा। यह वादा असम के लोगों के दिल को छूने वाला है, क्योंकि जुबिन गर्ग सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि असम की भावना का प्रतीक थे।
असम को दिल्ली से नहीं, स्थानीय लोग चलाएंगे
राहुल गांधी ने इस रैली में एक और बड़ा वादा किया, सत्ता का विकेंद्रीकरण। उन्होंने कहा कि मौजूदा बीजेपी सरकार असम को दिल्ली से चलाने की कोशिश कर रही है, जो कि राज्य की जनता के साथ अन्याय है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 244(ए) का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार इसे असम में पूरी तरह लागू करेगी। इसके तहत कार्बी आंगलोंग और छठी अनुसूची के तहत आने वाले सभी इलाकों का शासन गुवाहाटी या दिल्ली से नहीं, बल्कि वहां के स्थानीय लोगों के हाथों में दिया जाएगा।
यह बात असम के आदिवासी और पहाड़ी इलाकों के लोगों के लिए बेहद अहम है। सालों से इन इलाकों के लोग यह महसूस करते आए हैं कि उनके जीवन से जुड़े फैसले उनसे दूर बैठे लोग करते हैं। राहुल का यह वादा उनकी इस भावना को सीधे संबोधित करता है।
बीजेपी का क्या होगा जवाब?
राहुल गांधी के इन आरोपों पर बीजेपी और हिमंत बिस्वा सरमा की तरफ से कड़ा जवाब आना तय है। हिमंता बिस्वा सरमा खुद एक आक्रामक राजनेता हैं और वे इस तरह के हमलों का जवाब देने में देर नहीं करते। इससे पहले भी दोनों नेताओं के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हो चुकी है।
बीजेपी का तर्क यह रहा है कि हिमंता के नेतृत्व में असम ने विकास की नई ऊंचाइयां छुई हैं और कानून व्यवस्था बेहतर हुई है। पार्टी राहुल गांधी के आरोपों को चुनावी बयानबाजी करार देगी और पलटवार में कांग्रेस के अपने कार्यकाल की खामियां गिनाएगी।
असम चुनाव में यह रैली कितनी अहम?
असम में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई है। कांग्रेस ने इस बार पूरे दमखम के साथ मैदान में उतरने का फैसला किया है। राहुल गांधी की यह रैली उसी रणनीति का हिस्सा है।
जमीन का मुद्दा, भ्रष्टाचार का आरोप, जुबिन गर्ग को न्याय का वादा और स्थानीय स्वशासन की बात ये सभी मुद्दे असम के मतदाताओं को सीधे छूते हैं। खासकर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में जहां जमीन ही जीवन है, वहां 98,400 बीघा जमीन के आरोप का असर हो सकता है।
अब देखना यह है कि बोकाजन की यह रैली और राहुल गांधी के ये तीखे आरोप असम के मतदाताओं के दिल तक कितने पहुंचते हैं और क्या कांग्रेस इस बार बीजेपी के मजबूत किले को हिला पाती है।
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