Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची एक ऐसी खबर का केंद्र बन गई है जो पूरे देश के शहरी निकायों के लिए एक मिसाल बन सकती है। रांची नगर निगम ने इस वित्त वर्ष में पहली बार अपना प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन 100 करोड़ रुपये के पार पहुंचाया है। यह महज एक संख्या नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, सुधार और आधुनिक सोच का नतीजा है।
रांची नगर निगम ने 100 करोड़ का आंकड़ा कैसे पार किया?
वर्ष 2013 में जब रांची नगर निगम का कुल संपत्ति कर संग्रह सिर्फ 5 करोड़ रुपये था, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक दिन यही निगम 100 करोड़ से अधिक का संग्रह करेगा। लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 में यह सपना हकीकत बन गया, जब निगम ने 101.99 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक संग्रह दर्ज किया।
नगर आयुक्त सुशांत गौरव के कार्यकाल में पिछले छह महीनों में एक विशेष और सुनियोजित अभियान चलाया गया। इस अभियान में हर वार्ड के लिए अलग लक्ष्य तय किए गए और हर दिन की प्रगति की निगरानी की गई। नगर आयुक्त खुद मैदान में उतरे और हर बड़ी कार्रवाई में मौजूद रहे।
क्या है इस सफलता के पीछे की असली वजह?
इस उपलब्धि के पीछे कोई एक कारण नहीं, बल्कि कई मोर्चों पर एकसाथ काम करने की रणनीति है। सबसे पहले, शहर के सभी वार्डों में घर-घर जाकर सर्वे किया गया। इससे वे संपत्तियां सामने आईं जो अब तक टैक्स के दायरे में ही नहीं थीं।
पहले जहां निगम के पास करीब एक लाख संपत्तियों का रिकॉर्ड था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 2.5 लाख से अधिक हो गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि टैक्स का आधार डेढ़ गुना से ज्यादा बढ़ गया। जब ज्यादा संपत्तियां रिकॉर्ड में आईं, तो कलेक्शन बढ़ना तय था।
डिजिटल पेमेंट ने बदली तस्वीर, 23 करोड़ ऑनलाइन जमा
इस वित्त वर्ष की एक और बड़ी उपलब्धि यह रही कि नागरिकों ने 23 करोड़ रुपये ऑनलाइन माध्यम से जमा किए। यह बताता है कि रांची के लोग अब डिजिटल पेमेंट को लेकर पहले से कहीं अधिक जागरूक हो गए हैं।
प्रॉपर्टी टैक्स मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए रियल टाइम डेटा ट्रैकिंग की गई। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी, बल्कि नागरिकों को घर बैठे टैक्स जमा करने की सुविधा भी मिली। इस डिजिटल बदलाव ने कलेक्शन की रफ्तार को भी तेज किया।
बकायेदारों पर सख्ती और नागरिकों को प्रोत्साहन, दोनों साथ-साथ
निगम ने एक समझदारी भरी दोहरी रणनीति अपनाई। एक तरफ जहां बड़े बकायेदारों की पहचान कर उन पर नोटिस और दंडात्मक कार्रवाई की गई, वहीं दूसरी तरफ समय पर टैक्स जमा करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित किया गया।
इस संतुलित तरीके का नतीजा यह रहा कि कर संग्रहण की दक्षता करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच गई। यानी निगम जितना टैक्स वसूलने का लक्ष्य रखता था, उसका 90 प्रतिशत वास्तव में जमा हो गया, जो किसी भी शहरी निकाय के लिए बेहद शानदार आंकड़ा है।
साल दर साल कैसे बढ़ता गया कलेक्शन?
रांची नगर निगम की इस यात्रा को समझने के लिए पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है। वर्ष 2020-21 में कुल संग्रह 51.35 करोड़ रुपये था। अगले साल 2021-22 में यह बढ़कर 58.03 करोड़ हो गया। वर्ष 2022-23 में 67.78 करोड़ और 2023-24 में 69.71 करोड़ रुपये का संग्रह हुआ।
वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 83.57 करोड़ तक पहुंचा और फिर 2025-26 में पहली बार 100 करोड़ की दीवार टूटी। यह लगातार बढ़त दिखाती है कि यह कोई अचानक हुई सफलता नहीं, बल्कि वर्षों की सुनियोजित कोशिशों का फल है।
नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने क्या कहा?
नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने इस उपलब्धि पर कहा कि यह सफलता नगर निगम की पूरी टीम, टैक्स कलेक्शन एजेंसी और रांची के नागरिकों के सामूहिक प्रयास का नतीजा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले समय में जीआईएस आधारित मैपिंग, उन्नत डिजिटल निगरानी और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा।
शहरी विकास विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोई नगर निकाय अपना राजस्व इस तेजी से बढ़ाता है, तो इसका सीधा फायदा नागरिकों को मिलता है क्योंकि बेहतर आय से बेहतर सेवाएं देना संभव होता है। यह मॉडल देश के दूसरे छोटे और मध्यम शहरों के लिए भी अनुकरणीय है।
Ranchi News: रांची के नागरिकों को इससे क्या फायदा होगा?
जब नगर निगम की आय बढ़ती है, तो उसका सीधा असर शहर की सेवाओं पर पड़ता है। इस बढ़े हुए राजस्व से रांची में सफाई व्यवस्था, पानी की आपूर्ति, सड़कें और रोशनी जैसी बुनियादी सेवाओं में सुधार संभव हो सकेगा।
निगम की आंतरिक आय में यह वृद्धि विकास कार्यों को नई गति देगी। जब शहर अपने खुद के संसाधनों से काम चला सके, तो बाहरी मदद पर निर्भरता कम होती है और स्थानीय जरूरतों के हिसाब से पैसा खर्च करने की आजादी भी बढ़ती है।
निष्कर्ष
रांची नगर निगम की यह उपलब्धि सिर्फ एक शहर की कहानी नहीं है। यह साबित करती है कि सही नेतृत्व, आधुनिक तकनीक और नागरिकों की भागीदारी से कोई भी शहरी निकाय अपनी आर्थिक तस्वीर बदल सकता है। 5 करोड़ से 101.99 करोड़ तक का सफर रातोंरात नहीं हुआ, लेकिन यह जरूर बताता है कि इच्छाशक्ति हो तो बदलाव जरूर आता है। रांची का यह मॉडल आने वाले समय में देश के दूसरे शहरों के लिए एक रोडमैप बन सकता है।
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