Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस पार्टी देर से ही सही, लेकिन पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर आई है। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से महज एक दिन पहले कांग्रेस ने पूरे राज्य की 294 में से 284 सीटों पर एक साथ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए। उत्तर बंगाल की 54 विधानसभा सीटों में से 53 पर भी उम्मीदवार तय हो गए हैं। पार्टी की असली उम्मीद मालदा और उत्तर दिनाजपुर जिलों पर टिकी है जहां कांग्रेस के कार्यकर्ता अभी भी सक्रिय हैं और पार्टी के लिए कुछ सीटें जीतना संभव दिखता है। इसी मकसद से कांग्रेस ने इन इलाकों में बड़े और जाने-पहचाने नामों को चुनावी मैदान में उतारा है।
2021 में शून्य, 2026 में वापसी की कोशिश
2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था। पार्टी पूरे बंगाल में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। यह कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका था क्योंकि बंगाल में कभी कांग्रेस की मजबूत पकड़ हुआ करती थी। खासकर मालदा और उत्तर दिनाजपुर में पार्टी की एक मजबूत जमीन रही है।
इस बार पार्टी उसी पुराने आधार को फिर से जिंदा करने की कोशिश में है। रणनीति साफ है — जहां कार्यकर्ता मजबूत हैं और जहां पार्टी का ऐतिहासिक जनाधार रहा है, वहां बड़े और विश्वसनीय चेहरों को उतारो और तृणमूल व भाजपा को कड़ी टक्कर दो। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इस बार कम से कम कुछ सीटें जीतकर विधानसभा में उपस्थिति दर्ज कराई जा सकती है।
मौसम बेनजीर नूर, मालदा में कांग्रेस की सबसे बड़ी उम्मीद
मालदा जिले की मालतीपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने पूर्व सांसद मौसम बेनजीर नूर को टिकट दिया है। यह नाम कांग्रेस के पत्ते में सबसे मजबूत पत्ता माना जा रहा है। मौसम नूर हाल ही में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में वापस लौटी हैं।
उनकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि वे मालदा के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एक, गनी खान चौधरी परिवार से जुड़ी हैं। गनी खान चौधरी मालदा की राजनीति का एक बड़ा नाम रहे हैं और उनका परिवार आज भी इस क्षेत्र में कांग्रेस का परंपरागत आधार बनाए हुए है। मौसम नूर का इस परिवार से जुड़ाव उन्हें स्थानीय स्तर पर एक भरोसेमंद और असरदार उम्मीदवार बनाता है।
मालतीपुर में उनका मुकाबला तृणमूल के मौजूदा विधायक अब्दुर रहीम बक्सी से होगा। भाजपा ने आशीष दास और वाम मोर्चे ने मनिरूल हुसैन को मैदान में उतारा है। यह चारों तरफ से कड़ी टक्कर वाली सीट है लेकिन कांग्रेस को मौसम नूर की स्थानीय पहचान और परिवार की विरासत से उम्मीद है।
रायगंज में मोहित सेनगुप्ता पर दांव
उत्तर दिनाजपुर जिले की रायगंज सीट पर कांग्रेस ने पूर्व नगर पालिका चेयरमैन मोहित सेनगुप्ता को उम्मीदवार बनाया है। रायगंज उत्तर बंगाल की उन सीटों में से एक है जहां कांग्रेस का एक समय अच्छा खासा प्रभाव था।
मोहित सेनगुप्ता नगर पालिका प्रमुख के रूप में स्थानीय लोगों के बीच काम कर चुके हैं और उनकी एक साफ-सुथरी छवि है। इस सीट पर तृणमूल ने पूर्व विधायक कृष्णा कल्याणी, भाजपा ने कौशिक चौधरी और वाम मोर्चे ने जीवनंदा सिंबा को टिकट दिया है। यहां भी चारों तरफ से मुकाबला होगा लेकिन कांग्रेस को उम्मीद है कि मोहित सेनगुप्ता की स्थानीय पहचान काम आएगी।
चाकुलिया से पूर्व विधायक विक्टर को मौका
मालदा की चाकुलिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने पूर्व विधायक अली इमरान रमज उर्फ विक्टर को टिकट दिया है। एक बार विधायक रह चुके विक्टर की इस क्षेत्र में अच्छी पकड़ मानी जाती है। उनका अनुभव और स्थानीय जनाधार उन्हें इस सीट पर एक गंभीर दावेदार बनाता है।
इस सीट पर तृणमूल ने मिन्हाजुल अरफिन आजाद, भाजपा ने मनोज जैन और वाम ने अमजद अली को उम्मीदवार बनाया है। यहां भी मुकाबला चतुष्कोणीय होगा और थोड़े से वोटों का अंतर नतीजा तय कर सकता है।
इस्लामपुर, सबसे बड़ा सस्पेंस अभी बाकी
सबसे ज्यादा उत्सुकता इस्लामपुर सीट को लेकर है। यह उत्तर दिनाजपुर जिले की एक राजनीतिक रूप से बेहद अहम सीट है और यहां कांग्रेस ने अभी तक अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है।
इस सीट से जुड़ी सबसे बड़ी खबर 80 वर्षीय अब्दुल करीम चौधरी को लेकर है। करीम चौधरी 11 बार के विधायक हैं और लंबे समय से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। इस बार तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें उम्र का हवाला देते हुए टिकट नहीं दिया। इस फैसले से उनके समर्थकों में भारी नाराजगी है।
फिलहाल करीम चौधरी शहर से बाहर हैं और उनका अगला कदम क्या होगा इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। राजनीतिक गलियारों में तीन संभावनाएं चर्चा में हैं। पहली यह कि वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरें। दूसरी यह कि कांग्रेस उन्हें अपना उम्मीदवार बनाए। और तीसरी यह कि वे किसी और पार्टी का दामन थामें।
अगर कांग्रेस उन्हें टिकट देती है तो यह एक बड़ा राजनीतिक दांव होगा। 11 बार के विधायक की स्थानीय पहचान और उनके समर्थकों की नाराजगी मिलकर तृणमूल को इस सीट पर नुकसान पहुंचा सकती है। इस सीट पर तृणमूल ने कन्हैयालाल अग्रवाल, भाजपा ने चित्रजीत राय और वाम ने शमिक खान को टिकट दिया है।
देर से घोषणा, रणनीति या मजबूरी?
कांग्रेस का इतनी देर से उम्मीदवार घोषित करना खुद में एक बड़ा सवाल है। जहां भाजपा, तृणमूल और वाम दलों ने काफी पहले ही अपनी सूचियां जारी कर दी थीं, वहीं कांग्रेस नामांकन से एक दिन पहले तक इंतजार करती रही।
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह देरी पार्टी के आंतरिक मतभेद और सीटों को लेकर खींचतान की वजह से हुई। लेकिन कुछ का यह भी कहना है कि यह जानबूझकर की गई एक रणनीति थी ताकि दूसरी पार्टियों के असंतुष्ट नेताओं को आखिरी वक्त में कांग्रेस में लाया जा सके। मौसम नूर का तृणमूल छोड़कर वापस आना इसी रणनीति का एक उदाहरण माना जा रहा है।
उत्तर बंगाल में कांग्रेस की असली ताकत कहां है?
मालदा और उत्तर दिनाजपुर में कांग्रेस की पकड़ के कुछ ठोस कारण हैं। इन जिलों में मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी-खासी आबादी है और कांग्रेस का इस तबके के साथ एक पुराना और गहरा रिश्ता रहा है। गनी खान चौधरी परिवार जैसे पारंपरिक कांग्रेसी घरानों ने इन इलाकों में पार्टी की जड़ें मजबूत की थीं जो आज भी पूरी तरह कमजोर नहीं हुई हैं।
दूसरे जिलों में जहां कांग्रेस लगभग खत्म हो चुकी है, वहां उसके कार्यकर्ता या तो तृणमूल में जा चुके हैं या घर बैठ गए हैं। लेकिन मालदा और उत्तर दिनाजपुर में कार्यकर्ताओं में अभी भी पार्टी के लिए काम करने का जज्बा दिखता है। यही वह आधार है जिसके दम पर कांग्रेस 2026 में बंगाल में दोबारा पैर जमाने की कोशिश कर रही है।
क्या सच में खुलेगा खाता?
यह सवाल अभी का सबसे बड़ा सवाल है। 2021 की शून्य से वापसी करना आसान नहीं है। तृणमूल कांग्रेस राज्य में सत्तारूढ़ है और उसका संगठन बेहद मजबूत है। भाजपा भी हर सीट पर अपनी पूरी ताकत लगा रही है। ऐसे में कांग्रेस के लिए जगह बनाना कठिन जरूर है लेकिन नामुमकिन नहीं।
मौसम नूर, मोहित सेनगुप्ता और विक्टर जैसे अनुभवी चेहरों पर लगाया गया दांव अगर सफल रहा तो कांग्रेस कम से कम कुछ सीटें जीतकर बंगाल की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता फिर से साबित कर सकती है। और अगर इस्लामपुर में करीम चौधरी जैसा कोई बड़ा दांव सफल हो गया तो यह कांग्रेस के लिए एक यादगार वापसी होगी। 4 मई को आने वाले नतीजे बताएंगे कि कांग्रेस का यह दांव काम आया या नहीं।
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