Top 5 This Week

Related Posts

RIMS Blood Bank Crisis: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल RIMS में खून का अकाल, बिना डोनर नहीं मिल रहा रक्त, 7 घंटे तड़पते रहे मरीज; जानें क्यों है यह संकट और क्या है समाधान

RIMS Blood Bank Crisis: झारखंड के सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण सरकारी अस्पताल राजेंद्र इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी RIMS रांची में इन दिनों एक गंभीर और चिंताजनक स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो गया है। अस्पताल के ब्लड बैंक में खून की भारी किल्लत हो गई है जिसका सीधा असर गंभीर मरीजों पर पड़ रहा है। स्थिति इतनी खराब है कि मरीजों को सीधे रक्त उपलब्ध नहीं कराया जा रहा बल्कि उनके परिजनों से पहले रक्तदाता यानी डोनर लाने को कहा जा रहा है। डोनर की व्यवस्था करने और जांच प्रक्रिया पूरी होने में छह से सात घंटे तक का समय लग रहा है। इतने लंबे इंतजार में गंभीर मरीजों की हालत और खराब हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इमरजेंसी में तुरंत रक्त उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए लेकिन वर्तमान व्यवस्था में यह संभव नहीं हो पा रहा। हाल के दिनों में रक्तदान शिविरों की कमी को इस संकट का मुख्य कारण माना जा रहा है।

हजारीबाग से आए मरीज को 7 घंटे तक नहीं मिला खून

RIMS Blood Bank Crisis
RIMS Blood Bank Crisis

रविवार को एक दर्दनाक मामला सामने आया जिसने RIMS के ब्लड बैंक की खस्ता हालत को उजागर कर दिया। हजारीबाग से एक गंभीर मरीज को इमरजेंसी में भर्ती किया गया। डॉक्टरों ने उसके लिए बी पॉजिटिव रक्त की आवश्यकता बताई। लेकिन जब परिजन ब्लड बैंक पहुंचे तो पता चला कि वहां बी पॉजिटिव ब्लड की एक भी यूनिट उपलब्ध नहीं है।

मरीज के परिजन विकास सिंह ने बताया कि घंटों चक्कर लगाने के बाद भी रक्त नहीं मिला। अंत में डोनर की व्यवस्था करने के बाद ही रक्त लिया गया। इसके बाद जांच प्रक्रिया पूरी होने में और समय लगा। कुल मिलाकर मरीज को रक्त चढ़ाने में करीब सात घंटे लग गए। एक गंभीर मरीज के लिए सात घंटे का यह इंतजार जानलेवा साबित हो सकता था।

गायनी वार्ड में 5 यूनिट के लिए परिजन परेशान

यह मामला केवल एक मरीज तक सीमित नहीं है। RIMS के गायनी वार्ड में भर्ती एक महिला मरीज को पांच यूनिट रक्त की जरूरत थी। लेकिन पांच यूनिट के लिए परिजनों को पांच अलग-अलग डोनर उपलब्ध कराने पड़े। एक गंभीर रूप से बीमार महिला के परिजनों के लिए इतने कम समय में पांच डोनर ढूंढना कितना कठिन और मानसिक रूप से थका देने वाला काम होगा इसकी कल्पना आसानी से की जा सकती है।

यह स्थिति झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के लिए अत्यंत शर्मनाक है। RIMS पूरे राज्य से गंभीर मरीजों का रेफरल केंद्र है। यहां आने वाले अधिकांश मरीज पहले से ही गंभीर हालत में होते हैं और उन्हें तुरंत इलाज की जरूरत होती है।

रक्तदान शिविरों की कमी बनी मुख्य वजह

RIMS के ब्लड बैंक में रक्त की कमी का सबसे बड़ा कारण हाल के दिनों में रक्तदान शिविरों का आयोजन न होना है। ब्लड बैंक का स्टॉक मुख्यतः स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों से भरा जाता है। जब नियमित रूप से शिविर आयोजित नहीं होते तो स्टॉक धीरे-धीरे खत्म हो जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार ब्लड बैंक को साल भर सक्रिय रहने के लिए एक निरंतर और योजनाबद्ध रक्तदान कार्यक्रम की आवश्यकता होती है। लेकिन RIMS प्रशासन ने इस दिशा में लापरवाही बरती है। नियमित शिविर आयोजित नहीं हुए और जब स्टॉक खत्म हुआ तो मरीजों को खामियाजा भुगतना पड़ा।

इसके अलावा होली जैसे त्योहारों के दौरान कुछ लोग रक्तदान नहीं करते और इस अवधि में मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय के लिए पहले से पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना जरूरी होता है।

इमरजेंसी में 7 घंटे का इंतजार क्यों है खतरनाक?

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार कई गंभीर स्थितियों में रक्त की आवश्यकता तुरंत होती है। प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव, गंभीर दुर्घटना पीड़ित, कैंसर रोगी, किडनी रोगी जो नियमित डायलिसिस करवाते हैं और थैलेसीमिया के मरीजों के लिए रक्त की तुरंत आवश्यकता होती है।

ऐसी स्थितियों में सात घंटे का इंतजार मरीज की जान के लिए खतरनाक हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों के अनुसार किसी भी सरकारी अस्पताल के ब्लड बैंक में सभी रक्त समूहों का पर्याप्त स्टॉक हमेशा उपलब्ध होना चाहिए।

RIMS में 2026 में बड़े बदलाव की योजना

RIMS में 2026 में बड़े विस्तार और सुधार की योजना है। ट्रामा सेंटर से लेकर सुपर स्पेशियलिटी कोर्स तक सुविधाओं का विस्तार प्रस्तावित है। लेकिन यदि ब्लड बैंक जैसी बुनियादी जरूरत पूरी नहीं हो पा रही तो बड़े विस्तार की योजनाएं कितनी सार्थक होंगी यह सोचने वाली बात है।

अस्पताल प्रशासन को तत्काल निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए। पहला नियमित रक्तदान शिविरों का आयोजन सुनिश्चित करना। दूसरा स्वैच्छिक रक्तदाताओं का एक सक्रिय डेटाबेस तैयार करना। तीसरा आपातकालीन स्थितियों में तुरंत रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनाना। चौथा रक्तदान के प्रति जागरूकता अभियान चलाना।

RIMS Blood Bank Crisis: रक्तदान के प्रति जागरूकता की जरूरत

यह संकट केवल प्रशासन की लापरवाही नहीं है बल्कि समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता की कमी भी एक बड़ा कारण है। भारत में अभी भी बड़ी संख्या में लोग रक्तदान से डरते हैं या इसे लेकर कई भ्रांतियां रखते हैं।

वास्तविकता यह है कि एक बार रक्तदान करने से तीन लोगों की जान बच सकती है। 18 से 65 वर्ष का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति जिसका वजन 45 किलोग्राम से अधिक हो रक्तदान कर सकता है। रक्तदान के 24 से 48 घंटों में शरीर में रक्त की मात्रा सामान्य हो जाती है।

RIMS के इस संकट ने एक बार फिर समाज को यह याद दिलाया है कि स्वैच्छिक रक्तदान एक सामाजिक दायित्व है। जब हम स्वेच्छा से रक्तदान करते हैं तो कहीं न कहीं किसी जरूरतमंद की जान बचती है।

Read More Here

पलामू में खनन विभाग का चौंकाने वाला कारनामा, जहां बालू है ही नहीं वहां 7 जगहों को बना दिया Category-1 बालू घाट, मुखियाओं ने खोली पोल, जिला खनन पदाधिकारी ने दी सफाई

Bihar Board 12th Result 2026: आज दोपहर 1:30 बजे जारी होगा BSEB इंटर का रिजल्ट! जानें रिजल्ट चेक करने की पूरी प्रक्रिया, वेबसाइट लिंक, टॉपर लिस्ट और कंपार्टमेंट परीक्षा की जानकारी

Kal Ka Rashifal 23 March 2026: सोमवार के दिन सभी 12 राशियों का भविष्यफल, मेष से मीन तक संपूर्ण राशि भविष्यवाणी, जानें कैसा रहेगा आपका आने वाला दिन

CGPC ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी: 20 साल के अनुभवी पत्रकार चरणजीत सिंह बने सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रेस प्रवक्ता

 

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles