डेस्क: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस समय सऊदी अरब के दौरे पर हैं, जहां उनका स्वागत खुद क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) ने शाही अंदाज़ में किया। इस दौरे पर दोनों देशों ने 17 सितंबर 2025 को एक बड़ा रक्षा समझौता किया है, जिसका नाम दिया गया है— “स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट”।
क्या है समझौते की शर्त?
इस समझौते के तहत अगर किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। यानी किसी भी तरह की आक्रामकता पर दोनों देश मिलकर प्रतिक्रिया देंगे। पहली नज़र में यह एक सामान्य सुरक्षा समझौता लगता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत के लिए रणनीतिक चुनौती साबित हो सकता है।
क्यों बढ़ी भारत की टेंशन?
सऊदी अरब और पाकिस्तान के रिश्ते दशकों से गहरे रहे हैं।
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सऊदी अरब कई बार पाकिस्तान की आर्थिक लाइफलाइन बन चुका है और संकट के समय अरबों डॉलर की मदद दे चुका है।
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बदले में पाकिस्तान ने रियाद की ज़रूरत पड़ने पर सैन्य विशेषज्ञता, सैनिक और रणनीतिक सहयोग उपलब्ध कराया है।
अब यह समझौता पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने और एलओसी पर तनाव बढ़ाने की नई ताकत दे सकता है।
सऊदी अरब को क्या फायदा?
विश्लेषकों का कहना है कि यह साझेदारी सिर्फ पाकिस्तान को ही नहीं, बल्कि सऊदी अरब को भी मजबूत करेगी।
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पाकिस्तान की परमाणु क्षमता और सैन्य ताकत का इस्तेमाल सऊदी अरब, खासकर ईरान के खिलाफ संतुलन बनाने में कर सकता है।
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इस समझौते से पाकिस्तानी सेना को भी बड़ी वैधता और अंतरराष्ट्रीय सहारा मिल गया है।
शहबाज शरीफ एक हफ्ते में तीसरी बार खाड़ी देशों के दौरे पर गए हैं। इससे पहले वह दो बार क़तर जा चुके हैं। ऐसे समय में जब खाड़ी क्षेत्र इज़रायल-गाज़ा संकट से जूझ रहा है और भारत-पाकिस्तान संबंध बेहद खराब स्थिति में हैं, इस समझौते की टाइमिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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