Top 5 This Week

Related Posts

SC ST Reservation: SC/ST आरक्षण में क्यों नहीं लागू हो सकता क्रीमी लेयर? सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने रखी साफ राय

SC ST Reservation: देश में आरक्षण नीति को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छिड़ गई है, जब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता। गुरुवार को शीर्ष अदालत में सरकार की ओर से पेश हुए पक्ष ने साफ किया कि क्रीमी लेयर की व्यवस्था अब तक केवल अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी पर ही लागू रही है। सरकार का तर्क है कि आरक्षण नीति का आधार केवल आर्थिक स्थिति नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सामाजिक पिछड़ापन है। यह मामला आरक्षित श्रेणियों के भीतर आय के आधार पर सब-कोटा की मांग करने वाली याचिकाओं से जुड़ा हुआ है, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है।

SC ST Reservation: सरकार ने कोर्ट में रखे अपने प्रमुख तर्क

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आरक्षित श्रेणियों में आय आधारित सब-कोटा की मांग वाली याचिकाओं का पुरजोर विरोध किया। सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि आरक्षण नीति पूरी तरह से आर्थिक स्थिति पर आधारित नहीं है, बल्कि इसका निर्धारण मुख्य रूप से जनजाति, सामाजिक पिछड़ेपन और जाति जैसे ऐतिहासिक तथा सामाजिक मानदंडों के आधार पर होता है। सरकार ने यह भी कहा कि आरक्षित वर्गों में आय के आधार पर प्राथमिकता तय करने या किसी भी तरह का बदलाव लाने से पहले एक व्यापक और विस्तृत समीक्षा जरूरी होगी, जिसके लिए लाभार्थियों का सामाजिक-आर्थिक आंकड़ा जुटाना अनिवार्य होगा।

संसद के पास है फैसला लेने का अधिकार

सरकार ने अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के 15 जून 2026 के हलफनामे का हवाला दिया। इस हलफनामे में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग में क्रीमी लेयर लागू करने जैसे संवेदनशील सवाल पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार केवल संसद के पास है। इसी आधार पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि वह ऐसी याचिकाओं से दूरी बनाए रखे, जिनके माध्यम से देश की मौजूदा आरक्षण नीति के मूल स्वरूप को बदलने के लिए न्यायिक निर्देश मांगे जा रहे हैं। सरकार के अनुसार यह विषय पूरी तरह से विधायी क्षेत्राधिकार में आता है, न कि न्यायिक हस्तक्षेप के दायरे में।

आखिर क्या है क्रीमी लेयर का कॉन्सेप्ट

क्रीमी लेयर का सिद्धांत मूल रूप से ओबीसी वर्ग के उन लोगों के लिए लाया गया था, जो आर्थिक और शैक्षणिक दृष्टि से पहले से ही संपन्न माने जाते हैं। इस व्यवस्था के तहत जिन परिवारों की सालाना आय आठ लाख रुपये या उससे अधिक होती है, कृषि से होने वाली आय को छोड़कर, उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाता। क्रीमी लेयर शब्द का प्रयोग सबसे पहले वर्ष 1971 में सत्तनाथन आयोग ने किया था, जिसने सिविल पदों पर आरक्षण से क्रीमी लेयर को बाहर रखने की सिफारिश की थी। इसके बाद वर्ष 1993 में जस्टिस राम नंदन समिति ने भी इस अवधारणा की पहचान को आगे बढ़ाया। गौरतलब है कि फिलहाल एससी और एसटी वर्ग के लिए ऐसा कोई नियम लागू नहीं है, और इन श्रेणियों के लोगों को पारिवारिक आय की परवाह किए बिना आरक्षण का लाभ मिलता रहा है।

SC/ST पर क्रीमी लेयर लागू न होने के पीछे की वजह

अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के भीतर क्रीमी लेयर की पहचान करने और उन्हें आरक्षण के दायरे से बाहर रखने को कहा था। इसी निर्देश के जवाब में केंद्र सरकार ने पहले भी स्पष्ट किया था कि एससी और एसटी वर्ग के लोगों के साथ होने वाला भेदभाव उनकी आर्थिक स्थिति के कारण नहीं, बल्कि सामाजिक कारणों से होता है। यही वजह है कि सरकार का मानना है कि क्रीमी लेयर जैसी अवधारणा को इन श्रेणियों पर लागू करना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे इन वर्गों के साथ होने वाले भेदभाव की मूल प्रकृति को नजरअंदाज किया जाएगा।

SC ST Reservation: संविधान के प्रावधानों का हवाला

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह तर्क भी रखा कि देश का मौजूदा संवैधानिक ढांचा केवल आर्थिक आधार पर आरक्षण नीति में बदलाव की इजाजत नहीं देता। सरकार के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित जाति की पहचान की जाती है, जबकि अनुच्छेद 342 अनुसूचित जनजाति से संबंधित है और अनुच्छेद 342ए सामाजिक तथा शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को परिभाषित करता है। इन तीनों अनुच्छेदों के तहत तय की गई व्यवस्था में केवल आर्थिक स्थिति को पैमाना मानकर किसी भी तरह का फेरबदल नहीं किया जा सकता। सरकार का मानना है कि इन संवैधानिक प्रावधानों में बदलाव के लिए न्यायिक आदेश की बजाय संसदीय प्रक्रिया ही उपयुक्त रास्ता है।

SC ST Reservation: याचिकाकर्ताओं की मांग और आगे की राह

आरक्षित श्रेणियों में आय आधारित सब-कोटा की मांग करने वाली याचिकाओं में तर्क दिया गया है कि आरक्षण की आर्थिक रूप से अधिक जरूरतमंद लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एससी और एसटी वर्ग में भी क्रीमी लेयर जैसी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। हालांकि सरकार के मजबूत रुख के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि केंद्र फिलहाल इस दिशा में किसी भी बदलाव के पक्ष में नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर आगे की सुनवाई जारी रहने की उम्मीद है, और अदालत का अंतिम फैसला आरक्षण नीति के भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

कुल मिलाकर, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में साफ कर दिया है कि एससी और एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करना संभव नहीं है, क्योंकि इन वर्गों के साथ होने वाला भेदभाव सामाजिक और ऐतिहासिक कारणों से जुड़ा है, न कि केवल आर्थिक स्थिति से। सरकार ने इस पूरे मुद्दे को संसद के अधिकार क्षेत्र में बताते हुए न्यायपालिका से दूरी बनाए रखने का आग्रह किया है। संविधान के प्रावधानों और पुराने आयोगों की सिफारिशों का हवाला देते हुए सरकार ने अपने पक्ष को मजबूती से रखा है। अब इस संवेदनशील मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का रुख आने वाले समय में देश की आरक्षण व्यवस्था की दिशा तय करेगा।

Read More Here:- 

Delhi-NCR Rain: दिल्ली-एनसीआर में बारिश ने मचाया हाहाकार, सड़कें डूबीं, एम्बुलेंस फंसी, जगह-जगह लगा भीषण जाम

West Banga Awas Yojana: ‘बांग्लार बाड़ी’ का नाम बदलकर हुई ‘पश्चिम बंग आवास योजना’, 10 लाख से अधिक लाभार्थियों को मिली दूसरी किस्त

Inflation Rate In Jharkhand: झारखंड में महंगाई की मार, छह महीने में 10 प्रतिशत तक बढ़े जरूरी सामान के दाम, देखें पूरी लिस्ट

Aaj Ka Rashifal 7 August 2026: मेष से मीन तक जानें किस राशि पर बरसेगी किस्मत, पढ़ें दैनिक भविष्यफल

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles