जमशेदपुर: साकची स्थित रामलीला मैदान में श्री श्री रामलीला उत्सव समिति के तत्वावधान में श्रीरामकृष्ण मंडल द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस दिव्य कथा का वाचन वृंदावन से पधारे राष्ट्रीय कथा प्रवक्ता आचार्य श्री राजेश कृष्ण जी महाराज कर रहे हैं।
कथा के द्वितीय दिवस में विदुर जी प्रसंग सुनाया गया, जिसमें यह बताया गया कि भगवान केवल प्रेम और श्रद्धा के भूखे होते हैं, न कि धन और भौतिक पदार्थों के। जब भगवान श्रीकृष्ण विदुर जी के घर पधारे, तो विदुर जी की पत्नी भावविभोर होकर उन्हें केले के छिलके परोसने लगीं। प्रभु ने प्रेम से वह छिलके ग्रहण किए, क्योंकि उनके लिए भक्ति ही सबसे महत्वपूर्ण है। इस कथा प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और भक्ति रस में डूब गए।

कपिल देव-देवहूति संवाद और जीव की गति
महाराज जी ने कपिल देव-देवहूति संवाद का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जीव जन्म लेने के बाद माया के जाल में उलझकर भगवान को भूल जाता है, जो उसके पतन का कारण बनता है। जीव का धर्म निरंतर भगवान का भजन करना है।

वाराह अवतार: जब भगवान ने पृथ्वी को बचाया
भागवत कथा के दौरान भगवान वाराह अवतार का वर्णन किया गया, जब असुर हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को पाताल में छिपा दिया था। तब भगवान विष्णु ने वाराह रूप धारण कर पृथ्वी को उठाया और संतुलित किया। उन्होंने यह भी बताया कि मनु और सतरूपा के माध्यम से सृष्टि का विस्तार हुआ, और हम सभी मनु की संतान हैं।

भक्तों की श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत दृश्य
कथा के दौरान जब आचार्य श्री राजेश कृष्ण जी महाराज ने भजन गाए, तो श्रद्धालु झूम उठे। कुछ की आंखों से प्रेम के अश्रु बह निकले, जबकि कई भक्तों ने नृत्य कर अपनी भक्ति व्यक्त की। यह भक्ति का अद्भुत संगम देखने योग्य था।

मुख्य यजमानों ने किया पितरों का पूजन
प्रातः कालीन कथा सत्र में मुख्य यजमान सीमा मिश्रा – अवधेश मिश्र, मधु मिश्रा – रामकेवल मिश्र ने अपने पितरों की पूजा-अर्चना की और कथा यज्ञ की सफलता तथा दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की।

कथा आयोजन में प्रमुख भक्तों का योगदान
इस आयोजन को सफल बनाने में सुभाष चंद्र शाह, रामगोपाल चौधरी, गया प्रसाद चौधरी, पवन अग्रहरि, रोहित मिश्रा, डॉक्टर डीपी शुक्ला, शंकर लाल सिंघल, राम केवल मिश्र, अवधेश मिश्रा, दिलीप तिवारी, मगन पांडे, मनोज कुमार मिश्रा, मनोज तिवारी, गौरी शंकर बसंत आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

श्रद्धालुओं से अधिक संख्या में पधारने का आग्रह
आयोजकों ने सभी वैष्णव भक्तों से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस दिव्य कथा में भाग लें और भगवान की भक्ति का आनंद प्राप्त करें। श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के माध्यम से श्रद्धालु आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं और अपने जीवन को भक्ति और सत्य के मार्ग पर अग्रसर कर सकते हैं।

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