डेस्क: केंद्र सरकार ने गुरुवार, 25 सितंबर 2025 को क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की NGO का FCRA (विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम) रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। सरकार ने आरोप लगाया कि वांगचुक की संस्था ने विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों का बार-बार उल्लंघन किया। इस मामले में सीबीआई ने भी जांच शुरू कर दी है।
सोनम वांगचुक ने इस कार्रवाई को लेकर कहा कि उन्हें निशाना बनाया गया है। उन्होंने दावा किया, “लद्दाख में चुनाव दो महीने बाद होने हैं और मेरी आवाज़ बड़ी थी। इसलिए मुझे टारगेट किया गया। डेढ़ महीने पहले मुझे बताया गया कि मेरे खिलाफ देशद्रोह का एफआईआर है। इसके बाद सीबीआई की जांच शुरू हुई।”
वांगचुक ने FCRA की अनुमति न लेने का कारण स्पष्ट किया। उन्होंने बताया, “हमने FCRA नहीं लिया क्योंकि हमें विदेशों से फंड लेने का कोई इरादा नहीं था। संयुक्त राष्ट्र की टीम हमारी पैसिव सोलर हीटेड बिल्डिंग को अफगानिस्तान ले जाना चाहती थी और इसके लिए उन्होंने फीस दी। इसी तरह हमारे आर्टिफिशियल ग्लेशियर प्रोजेक्ट के लिए स्विट्जरलैंड और इटली की संस्थाओं से हमें आर्थिक मदद मिली।”
सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया कि हाल ही में लद्दाख में हुई हिंसा के बाद सारी जिम्मेदारी उन पर थोप दी गई। उन्होंने कहा, “हिंसा के बाद सारा दोष मुझ पर डाल दिया गया। हमें इनकम टैक्स नोटिस भी मिल रहे हैं, जबकि लद्दाख क्षेत्र में टैक्स माफी है। मैं अपने दायित्व को समझते हुए टैक्स देता हूँ, लेकिन इसके बावजूद हमारे खिलाफ नोटिस जारी किए जा रहे हैं।”
इस मामले ने लद्दाख और देशभर में चर्चा बढ़ा दी है, जहां पर्यावरण और सामाजिक संस्थाओं के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं।
ये भी पढ़ें: सीबीएसई ने शुरू की “सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप स्कीम”, बेटियों की शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा



