डेस्क: कड़ाके की ठंड के बीच शहर की कई कॉलोनियों और गलियों में स्ट्रीट लाइट खराब होने से आम लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। शाम ढलते ही सड़कों और मोहल्लों में अंधेरा छा जाता है, जिससे आवागमन मुश्किल हो रहा है। ठंड के कारण लोग पहले ही जल्दी घर लौटने को मजबूर हैं, लेकिन स्ट्रीट लाइट बंद होने से डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह समस्या कई दिनों से बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
गलियों और मुख्य सड़कों पर अंधेरा
शहर के कई इलाकों में न केवल अंदरूनी गलियों, बल्कि मुख्य सड़कों पर भी स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। कहीं बल्ब खराब हैं तो कहीं पोल पर लगी लाइटें पूरी तरह बंद हैं। शाम होते ही राहगीरों को मोबाइल की टॉर्च या वाहनों की रोशनी के सहारे रास्ता तय करना पड़ रहा है। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह स्थिति और भी चिंता का विषय बन गई है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि अंधेरे के कारण ग्राहक भी जल्दी दुकान बंद कर घर लौट जाते हैं, जिससे कारोबार पर असर पड़ रहा है।
सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

स्ट्रीट लाइट खराब होने से सबसे बड़ा खतरा सुरक्षा को लेकर सामने आ रहा है। अंधेरे में चोरी, छेड़छाड़ और सड़क हादसों का डर बढ़ गया है। कई कॉलोनियों के निवासियों का कहना है कि शाम के बाद बाहर निकलने में डर लगता है। खासकर महिलाओं और बुजुर्गों के लिए स्थिति गंभीर है। कुछ क्षेत्रों में पहले भी अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों की गतिविधियाँ सामने आ चुकी हैं, जिससे लोगों में डर और बढ़ गया है।
नगर निगम की जिम्मेदारी पर सवाल
स्थानीय लोगों ने नगर निगम और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। नागरिकों का कहना है कि कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद स्ट्रीट लाइट ठीक नहीं की गई। कुछ इलाकों में अस्थायी रूप से मरम्मत की गई, लेकिन कुछ ही दिनों में लाइट फिर से बंद हो गई। लोगों का आरोप है कि ठंड के मौसम में जब दिन छोटे हो जाते हैं, तब स्ट्रीट लाइट की नियमित जांच और रखरखाव और भी जरूरी हो जाता है, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
स्थानीय लोगों की आवाज़

कॉलोनियों के निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि स्ट्रीट लाइट की तुरंत मरम्मत कराई जाए। कई लोगों का कहना है कि उन्होंने नगर निगम के हेल्पलाइन नंबर और वार्ड कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कुछ इलाकों में स्थानीय लोगों ने खुद आपसी सहयोग से अस्थायी रोशनी की व्यवस्था की है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। लोगों का कहना है कि स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधा के लिए उन्हें बार-बार शिकायत न करनी पड़े।
ठंड और कोहरे में बढ़ता खतरा
ठंड के मौसम में कोहरे की वजह से दृश्यता पहले ही कम हो जाती है। ऐसे में स्ट्रीट लाइट बंद होने से हादसों का खतरा और बढ़ जाता है। दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिम भरी है। कई स्थानों पर गड्ढे और टूटी सड़कें भी अंधेरे में नजर नहीं आतीं, जिससे गिरने और चोट लगने की घटनाएँ बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में स्ट्रीट लाइट का सही तरीके से काम करना बेहद जरूरी है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की उम्मीद
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि खराब स्ट्रीट लाइट की सूची तैयार की जा रही है और जल्द ही मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार ठंड और तकनीकी कारणों से कुछ इलाकों में समस्या आई है, जिसे प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खराब लाइट की जानकारी संबंधित वार्ड कार्यालय या हेल्पलाइन पर दें, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके।
निष्कर्ष: रोशनी से ही मिलेगी राहत
ठंड के इस मौसम में स्ट्रीट लाइट का खराब होना सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। शाम के बाद गलियों में अंधेरा लोगों के मन में डर पैदा कर रहा है और रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित कर रहा है। जरूरत है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द स्थायी समाधान करे। जब तक गलियों और सड़कों पर रोशनी नहीं होगी, तब तक शहर सुरक्षित और सुविधाजनक नहीं बन सकता।


