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Supreme Court on Airfare: हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- ‘नियम नहीं मान सकते तो उड़ानें रोक दो’

Supreme Court on Airfare: त्योहारों और छुट्टियों के मौसम में हवाई किराए में होने वाली अचानक और भारी बढ़ोतरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने साफ शब्दों में कहा कि अगर विमानन कंपनियां तय नियमों और दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर सकतीं, तो उनकी उड़ानें रोकने जैसे कठोर कदम पर भी विचार किया जा सकता है। अदालत ने यह तीखी टिप्पणी उस समय की, जब सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि यात्रियों के हितों की सुरक्षा के लिए भले ही व्यवस्था बनाई गई हो, लेकिन उसके प्रभावी क्रियान्वयन और नियमन को लेकर तस्वीर अब भी अस्पष्ट बनी हुई है। लगातार बढ़ते हवाई किराए और यात्रियों पर पड़ रहे अतिरिक्त वित्तीय बोझ के बीच अदालत का यह हस्तक्षेप आम नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

Supreme Court on Airfare: केंद्र सरकार ने सौंपा नए नियमों का मसौदा

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि हवाई किराए और अलग-अलग शुल्कों से जुड़े नए नियमों को तैयार करने की प्रक्रिया अब लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। सरकार ने न्यायालय के सामने सीलबंद लिफाफे में इन प्रस्तावित नियमों का मसौदा भी प्रस्तुत किया। केंद्र सरकार की ओर से अदालत से यह अनुरोध भी किया गया कि इन नियमों को पूरी तरह अंतिम रूप देने के लिए तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया जाए। यह अवधि पूरी होने के बाद इन नियमों को औपचारिक रूप से अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे किराया नियमन को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

याचिका में मनमाने किराए पर उठे गंभीर सवाल

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकीलों ने संसद में दिए गए उस पुराने बयान का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि सरकार के पास हवाई किराए पर सीधे तौर पर सीमा तय करने का अधिकार नहीं है। याचिका में यह आरोप लगाया गया कि निजी एयरलाइंस अपनी मर्जी से यात्रियों से अत्यधिक किराया वसूल रही हैं, जबकि बनाए गए नियम केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मी नारायणन ने यह जनहित याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने जोर देकर कहा है कि यात्रियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और पारदर्शी किराया व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए एक सशक्त नियामक तंत्र का होना बेहद जरूरी है, ताकि त्योहारी सीजन में यात्रियों का शोषण रोका जा सके।

पहले भी सामने आया है किराए में भारी अंतर का मुद्दा

हवाई किराए को लेकर यह मनमानी कोई नई समस्या नहीं है। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट त्योहारों और विशेष अवसरों के दौरान विमानन कंपनियों द्वारा वसूले जा रहे अनियंत्रित किराए पर गहरी नाराजगी जता चुका है। पूर्व की सुनवाई में अदालत ने एक ही मार्ग पर विभिन्न एयरलाइंस के किराए में मौजूद भारी अंतर का मुद्दा उठाया था। अदालत के सामने यह तथ्य भी रखा गया था कि सामान्य दिनों की तुलना में छुट्टियों या त्योहारों के मौके पर एक ही रूट का किराया कई गुना तक बढ़ा दिया जाता है, जिसके चलते आम मध्यमवर्गीय परिवार हवाई यात्रा से वंचित रह जाते हैं। अदालत ने इस प्रवृत्ति को यात्रियों की मजबूरी का नाजायज फायदा उठाने वाला रवैया करार दिया था।

नए नियमन तंत्र की जरूरत पर जोर

इस पूरे मामले में सबसे अहम पहलू यह है कि मौजूदा व्यवस्था में एयरलाइंस पर किसी ठोस नियंत्रण का अभाव नजर आता है। सरकार भले ही यह कहती रही हो कि उसके पास सीधे किराए पर सीमा लगाने का अधिकार नहीं है, लेकिन बढ़ते किराए और यात्रियों की शिकायतों ने यह साफ कर दिया है कि किसी न किसी रूप में नियामक हस्तक्षेप की जरूरत है। यही वजह है कि अदालत लगातार केंद्र सरकार पर एक स्पष्ट और प्रभावी नीति लाने के लिए दबाव बना रही है, ताकि विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और यात्रियों के हितों की सुरक्षा हो पाए।

आम यात्रियों पर पड़ रहा सीधा असर

त्योहारी सीजन में हवाई किराए में होने वाली अचानक बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर आम और मध्यमवर्गीय यात्रियों पर पड़ता है। ऐसे मौकों पर जब लोग अपने परिवार से मिलने या छुट्टियां मनाने के लिए यात्रा करना चाहते हैं, तब भारी-भरकम किराया उनकी योजना पर पानी फेर देता है। कई बार सामान्य दिनों की तुलना में किराया इतना अधिक बढ़ जाता है कि हवाई यात्रा आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाती है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी इसी समस्या को गंभीरता से लेने का संकेत देती है और उम्मीद जगाती है कि आने वाले समय में इस पर ठोस समाधान निकल सकता है।

Supreme Court on Airfare: अगली सुनवाई 7 सितंबर को, नियमों पर टिकी निगाहें

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के अनुरोध को स्वीकार करते हुए नए नियमों को अंतिम रूप देने के लिए तीन सप्ताह का समय दे दिया है। इस अहम मामले की अगली सुनवाई अब 7 सितंबर को होगी। अदालत के रुख से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि अगर विमानन कंपनियां यात्रियों के हितों को नजरअंदाज कर मनमाने ढंग से किराया वसूलती रहीं, तो न्यायपालिका की ओर से उनके खिलाफ और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। आगामी सुनवाई में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले नए नियमों पर देशभर के यात्रियों और विमानन क्षेत्र से जुड़े लोगों की निगाहें टिकी रहेंगी।

हवाई किराए को लेकर सुप्रीम कोर्ट की यह सख्त टिप्पणी उन तमाम यात्रियों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है, जो हर साल त्योहारी सीजन में बढ़े हुए किराए की मार झेलते हैं। केंद्र सरकार द्वारा नए नियमों का मसौदा तैयार किया जाना इस दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा सकता है, हालांकि इसकी असली परीक्षा तभी होगी जब यह नियम व्यावहारिक रूप से लागू होंगे। अब सबकी नजरें 7 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि आम यात्रियों को मनमाने किराए से राहत मिल पाती है या नहीं।

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Author: Sanjna Gupta

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