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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को नहीं दी राहत, कहा- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हो रहा दुरुपयोग

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर के कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया। मालवीय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कार्टून और टिप्पणियां पोस्ट करने का आरोप है। कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने से मना कर दिया और मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई, 2025 को निर्धारित की।

Supreme Court:  क्या है मामला?

हेमंत मालवीय ने 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान एक कार्टून बनाया था। इस कार्टून में उन्होंने वैक्सीन की सुरक्षा पर सवाल उठाने की कोशिश की थी। मई 2025 में एक अन्य यूजर ने इस कार्टून को दोबारा पोस्ट किया और उसमें PM Modi और आरएसएस के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी जोड़ी। मालवीय ने इस पोस्ट को शेयर करते हुए टिप्पणी का समर्थन किया, जिसके बाद उनके खिलाफ इंदौर के लसुड़िया थाने में FIR दर्ज हुई। शिकायत RSS कार्यकर्ता और वकील विनय जोशी ने की थी, जिनका कहना था कि इस कार्टून ने हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई और सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ा।

Supreme Court ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने हेमंत मालवीय के कार्टून को “उत्तेजक” और अपरिपक्व करार दिया। कोर्ट ने कहा, यह freedom of speech का दुरुपयोग है। कार्टूनिस्ट और कॉमेडियन्स को अपनी अभिव्यक्ति में संयम बरतना चाहिए।” मालवीय के वकील वृंदा ग्रोवर ने दलील दी कि कार्टून 2021 का है और इसे कानूनी अपराध नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि मालवीय ने पोस्ट डिलीट करने और टिप्पणी का समर्थन न करने का वादा किया है। लेकिन कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से मना कर दिया।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला

इससे पहले, 3 जुलाई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी मालवीय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि मालवीय ने freedom of speech की सीमा लांघी और कार्टून में भगवान शिव का अपमानजनक जिक्र किया। कोर्ट ने माना कि यह सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा हो सकता है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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