डेस्क: रामलला का दर्शन करने देश के कोने-कोने के श्रद्धालु नित्य आ रहे हैं। सभी रामलला के चरणों में अपनी आस्था निवेदित करते हैं। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 हुई थी, तब से लेकर लगभग एक वर्ष में नेपाल के भक्तों ने 18 लाख रुपये अर्पित किए हैं।
अलग-अलग देशों के बड़ी संख्या में भक्त रामलला का दर्शन करने आए, जिमसें अधिकांश अप्रवासी भारतीय हैं। इसमें नेपालियों की संख्या सर्वाधिक हैं। भक्त नेपाल के विभिन्न प्रांतों के हैं।
रामलला के दर्शन के बाद नेपाल के भक्त अपनी सामार्थ्य के अनुरूप धनराशि दानपात्र में डालते हैं। मंदिर के दानपात्रों में मिली धनराशि की गिनती से यह पता चला है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इसकी गिनती कराकर इस धनराशि को भारतीय मुद्रा में बदलने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी है।
नेपाल के भक्त सबसे आगे – संख्या में सबसे ज़्यादा
अप्रवासी भारतीयों के साथ अलग-अलग देशों से लोग आए। लेकिन नेपाल के भक्तों की संख्या सबसे ज़्यादा। विभिन्न प्रांतों से। “सीमा तो इंसान बनाते हैं, आस्था सीमाएँ नहीं मानती।”
दर्शन के बाद दानपात्र में डाली सामर्थ्य भर की राशि
रामलला के दर्शन कर भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान डालते हैं। ट्रस्ट ने गिनती की तो नेपाल के भक्तों से 18 लाख रुपये मिले। “ये पैसे नहीं, सालों की आस्था का फल है।”
ट्रस्ट ने शुरू की भारतीय मुद्रा में बदलने की प्रक्रिया
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने गिनती कराई। अब इसे भारतीय मुद्रा में बदलने का काम शुरू। “ये राशि मंदिर के लिए नहीं, भक्तों की भावना का सम्मान है।”
दान से सुकून मिलता है
मनोविज्ञान में “गिविंग इफेक्ट” कहते हैं – जब हम कुछ देते हैं, तो दिमाग में खुशी के हार्मोन बढ़ते हैं। नेपाल के भक्तों ने दूर से आकर दान दिया – ये उनका सुकून है। “जो दिल से देते हैं, उन्हें सबसे ज़्यादा मिलता है।”
आखिरी बात –
रामलला के दर्शन करने नेपाल से लोग आते हैं। 18 लाख रुपये अर्पित करते हैं। “ये सिर्फ़ दान नहीं, सालों की आस्था का जवाब है।”



