UP Politics: उत्तर प्रदेश में शिक्षक और स्नातक खंड की विधान परिषद (एमएलसी) सीटों पर हो रहे चुनाव का प्रचार बुधवार को अंतिम दिन है। शाम के बाद प्रचार गतिविधियां पूरी तरह बंद हो जाएंगी। इसके बाद 23 अक्टूबर को मतदान होगा और 27 अक्टूबर को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे। कुल 11 सीटों पर भाजपा और समाजवादी पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पिछली बार इन सीटों में से छह पर सपा और पांच पर भाजपा की जीत हुई थी। विधानसभा चुनाव से पहले हो रहे इस चुनाव को दोनों दलों के लिए राजनीतिक रुझान समझने का मौका माना जा रहा है।
एमएलसी चुनाव में कितनी सीटें हैं और पिछली बार क्या रहा था परिणाम?
इस बार कुल 11 सीटों पर मुकाबला हो रहा है। इनमें पांच सीटें स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की और छह सीटें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की हैं। पिछली बार इन्हीं सीटों पर सपा ने छह और भाजपा ने पांच सीटें जीती थीं। इस बार भाजपा अपनी सीटें बढ़ाने की कोशिश में जुटी है, जबकि सपा अपने प्रदर्शन को बनाए रखने या बेहतर करने की कोशिश कर रही है। दोनों दलों के प्रत्याशी मैदान में हैं और मतदाताओं तक पहुंचने के लिए जोरशोर से प्रचार चलाया गया है। शिक्षक और स्नातक मतदाताओं की संख्या सीमित होने के बावजूद ये सीटें राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
भाजपा और सपा ने प्रचार में क्या रणनीति अपनाई?
भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद कई जिलों में जनसभाएं कीं। गोरखपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, आगरा और गाजियाबाद समेत अन्य इलाकों में उन्होंने पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में वोट मांगे। इसके अलावा मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को भी मैदान में उतारा गया। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने खुद चुनावी सभाएं नहीं कीं, लेकिन सांसदों, विधायकों और जिला स्तर के पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी। जिलाध्यक्षों और महानगर अध्यक्षों की टीमों को भी प्रचार में लगाया गया। दोनों दलों की सक्रियता से कई सीटों पर मुकाबला कड़ा दिख रहा है।
विधानसभा चुनाव से पहले ये चुनाव क्यों महत्वपूर्ण है?
इस चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जनता के मूड को समझने का एक मौका माना जा रहा है। इसकी एक वजह यह है कि मतदान ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से होगा। ऐसे में किसी भी दल की जीत राजनीतिक बहस को नया आयाम दे सकती है। दूसरी वजह शिक्षक और स्नातक मतदाताओं की भूमिका है, जो आमतौर पर जागरूक माने जाते हैं। तीसरी वजह यह है कि ये सीटें पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक फैली हुई हैं। इसलिए नतीजे पूरे राज्य के राजनीतिक माहौल पर असर डाल सकते हैं। दोनों दल इसे अपनी ताकत दिखाने का अवसर मान रहे हैं।
स्नातक खंड की पांच सीटों पर मतदान कहां होगा?
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की पांच सीटें लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी में हैं। लखनऊ सीट में लखनऊ, हरदोई, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, सीतापुर, उन्नाव, बाराबंकी, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर जिले शामिल हैं। वाराणसी सीट में वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही और बलिया आते हैं। आगरा सीट में 12 जिले, मेरठ सीट में नौ जिले और इलाहाबाद-झांसी सीट में 10 जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों के पंजीकृत स्नातक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
शिक्षक खंड की छह सीटों का दायरा क्या है?
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की छह सीटें लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद हैं। लखनऊ और वाराणसी शिक्षक सीटों में क्रमशः नौ और आठ जिले शामिल हैं। आगरा सीट में 12 जिले, मेरठ सीट में नौ जिले और बरेली-मुरादाबाद सीट में नौ जिले आते हैं। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे ज्यादा 17 जिले शामिल हैं। इनमें गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, अयोध्या, अंबेडकर नगर, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, आजमगढ़ और मऊ समेत अन्य जिले शामिल हैं। इन सीटों पर भी दोनों दलों के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है।
अब सभी की नजरें 23 अक्टूबर के मतदान और 27 अक्टूबर को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। ये नतीजे न केवल विधान परिषद में दलों की संख्या को प्रभावित करेंगे, बल्कि आने वाले समय के राजनीतिक समीकरणों पर भी असर डाल सकते हैं।
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