डेस्क: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का पहला चरण आज जोर-शोर से शुरू हो गया है। पूरे राज्य में मतदान का उत्साह देखने लायक है, लेकिन मोकामा विधानसभा सीट पर यह उत्साह कुछ खास ही नजर आ रहा है। यह सीट हमेशा से बाहुबलियों के गढ़ के रूप में जानी जाती रही है, और इस बार भी NDA के उम्मीदवार अनंत सिंह और महागठबंधन की वीणा देवी के बीच सीधी टक्कर है। जेल में बंद अनंत सिंह की अनुपस्थिति के बावजूद उनके समर्थक मैदान में डटे हुए हैं, जबकि वीणा देवी महिलाओं और युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी हैं। न्यूज मीडिया किरण की ग्राउंड रिपोर्ट से मिली तस्वीरें और वोटर्स की प्रतिक्रियाएं बता रही हैं कि मतदान शांतिपूर्ण लेकिन उत्साहपूर्ण तरीके से चल रहा है।
मोकामा, पटना जिले का यह ग्रामीण इलाका, जहां मिट्टी के रास्ते और ईंटों की दीवारें लोकतंत्र की सच्ची तस्वीर पेश कर रही हैं। सुबह से ही पोलिंग बूथों पर लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। खासकर महिलाओं की भागीदारी सराहनीय है। रंग-बिरंगे साड़ियों में सजी महिलाएं, हाथ में वोटर आईडी कार्ड लिए, धूप में खड़ी होकर अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं। कुछ बुजुर्ग वोटर मुस्कुराते हुए अपनी स्याही लगी उंगली दिखा रहे हैं, तो कुछ युवा मांएं गोद में बच्चे लिए मतदान करने पहुंची हैं। यह दृश्य मोकामा के ग्रामीण परिवेश को जीवंत कर देता है।
उम्मीदवारों की तुलना: मुख्य मुकाबला
मोकामा सीट पर तीन मुख्य उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन असली जंग अनंत सिंह और वीणा देवी के बीच है। अनंत सिंह, जो जनता दल यूनाइटेड (JD(U)) से NDA के टिकट पर लड़ रहे हैं, वर्तमान में दुलारचंद यादव हत्याकांड से जुड़े मामले में जेल में हैं। उनकी अनुपस्थिति ने चुनावी माहौल को और रोमांचक बना दिया है। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से महागठबंधन की वीणा देवी महिलाओं के मुद्दों को जोर-शोर से उठा रही हैं। जन सुराज पार्टी से पीयूष प्रियदर्शी भी मैदान में हैं, लेकिन उनका प्रभाव सीमित नजर आ रहा है।
एक अन्य महिला वोटर ने कहा, “वह भी विकास और सुरक्षा के मुद्दे पर वोट डाला है। उन्होंने बताया कि बाहर से आए लोगों को यहां डरने की ज़रूरत नहीं है। क्योंकि मोकामा बिल्कुल सुरक्षित है।” यह बयान मोकामा की छवि को नया रूप दे रहा है, जहां पहले हिंसा की चर्चा होती थी, अब शांति की।
युवाओं का जोर भी कम नहीं है। अभिषेक रंजन नामक एक युवा वोटर, जो सुबह-सुबह मतदान करने पहुंचे, ने कहा, “वो सुबह-सुबह मतदान करने के लिए इसलिए पहुंच गए क्योंकि उन्हें कहीं बाहर जाना था। वो वोट डालना नहीं छोड़ सकते । इसलिए वो पहले आ गए। पहला वोट देने का अलग ही मजा होता है।” अभिषेक ने मोकामा के प्रमुख मुद्दों पर भी प्रकाश डाला, “मोकामा का सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी और अस्पताल की कमी है। मोकामा का विकास होना जरूरी है।”
निष्कर्ष : बिहार चुनाव 2025 का यह पहला चरण मोकामा जैसे सीटों से नई उम्मीद जगाता है। जहां पहले बाहुबलियों का बोलबाला था, वहां अब विकास, रोजगार और शांति के मुद्दे हावी हैं। वोटर्स, खासकर महिलाएं और युवा, लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। अनंत सिंह और वीणा देवी के बीच यह मुकाबला न सिर्फ स्थानीय, बल्कि राज्य स्तर पर महत्वपूर्ण है। न्यूज मीडिया किरण अपील करता है। कि सभी वोटर्स सक्रिय रहें और शांतिपूर्ण मतदान करें। अंतिम परिणाम आने पर ही साफ होगा कि मोकामा की जनता ने किसे जिताया, लेकिन आज का उत्साह तो यही कह रहा है कि बिहार बदल रहा है।



