West Bengal Election: पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच दावों और पलटवारों का दौर तेज हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दो तिहाई बहुमत से सरकार बनाने के दावे पर तृणमूल कांग्रेस ने करारा जवाब दिया है। पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री और तृणमूल के वरिष्ठ नेता ब्रात्य बसु ने साफ शब्दों में कहा कि बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा 50 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी। मंगलवार को अमित शाह की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद तृणमूल ने भाजपा पर झूठ फैलाने और निराधार दावे करने का आरोप लगाया है।
ब्रात्य बसु का पलटवार – भाजपा की होगी शर्मनाक हार
पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में अमित शाह के दावों को खारिज करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री एक पर्यटक की तरह आते-जाते रहेंगे। ऐसे दौरों से बीजेपी को कोई लाभ नहीं होगा।
ब्रात्य बसु ने आगे कहा कि अमित शाह की टिप्पणियां खोखले दावों पर आधारित हैं। बंगाल की जनता इन झूठे वादों को अच्छी तरह समझती है। उन्होंने दावा किया कि बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ेगा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि भगवा पार्टी इस बार 50 सीटों पर भी जीत हासिल नहीं कर सकेगी। यह बयान बीजेपी के दावों पर सीधा प्रहार है। बसु का कहना है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन नतीजे सबके सामने हैं।
अमित शाह का दावा – दो तिहाई बहुमत से बनेगी बीजेपी सरकार
इससे पहले मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बड़ा दावा किया था। उन्होंने कहा कि भाजपा वर्ष 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में दो तिहाई बहुमत के साथ राज्य में अगली सरकार बनाएगी।
अमित शाह ने पूरे विश्वास के साथ कहा कि बंगाल की जनता अब बदलाव के लिए तैयार है। टीएमसी की सरकार के 15 साल के कुशासन से लोग तंग आ चुके हैं। इस बार भाजपा को भारी बहुमत मिलेगा।
केंद्रीय गृह मंत्री ने बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर चुनावी लाभ के लिए बांग्लादेशियों की घुसपैठ को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि टीएमसी सरकार घुसपैठियों को अपना वोट बैंक मानती है और इसीलिए सीमा पर फेंसिंग नहीं होने दे रही है।
घुसपैठियों को बाहर निकालने का वादा
अमित शाह ने वादा किया कि वर्ष 2026 में भाजपा राज्य में सत्ता में आएगी और अवैध प्रवासियों को बाहर निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि हम न केवल घुसपैठियों की पहचान करेंगे, बल्कि उन्हें खदेड़ भी देंगे।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि बंगाल से घुसपैठ रोकने के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय ग्रिड बनाई जाएगी। यह ग्रिड इतना मजबूत होगा कि परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा। घुसपैठ की समस्या को जड़ से खत्म किया जाएगा।
भाजपा का मानना है कि घुसपैठ और सुरक्षा का मुद्दा उन्हें 2026 के चुनाव में बड़ी मदद करेगा। खासकर सीमावर्ती इलाकों में यह मुद्दा काफी असरदार साबित हो सकता है।
तृणमूल प्रवक्ता ने बताया बड़ा झूठ
तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता जय प्रकाश मजूमदार ने भी अमित शाह के दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अमित शाह कहते हैं कि भाजपा मंदिर आधारित ध्रुवीकरण की राजनीति नहीं करती, यह बहुत बड़ा झूठ है।
मजूमदार ने कहा कि सभी जानते हैं कि भाजपा ने वर्ष 2019 और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में मंदिर-मस्जिद की राजनीति का खूब प्रचार किया। भाजपा हर बार धर्म के नाम पर लोगों को बांटने की कोशिश करती है।
तृणमूल प्रवक्ता ने आगे कहा कि इस तरह की राजनीति को बंगाल के लोग फिर से खारिज करेंगे। बंगाल की जनता बहुत समझदार है। वह धर्म के नाम पर होने वाली राजनीति को अच्छी तरह पहचानती है।
2021 की तरह फिर मुंह की खाएगी भाजपा
जय प्रकाश मजूमदार ने याद दिलाया कि वर्ष 2021 की तरह भाजपा को वर्ष 2026 के बंगाल चुनाव में भी मुंह की खानी पड़ेगी। 2021 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने बहुत बड़े-बड़े दावे किए थे।
उस समय भी केंद्रीय नेताओं ने दावा किया था कि बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी। लेकिन नतीजे सबके सामने हैं। तृणमूल कांग्रेस ने भारी बहुमत से जीत हासिल की थी। भाजपा को मात्र 77 सीटें ही मिली थीं।
मजूमदार का कहना है कि इस बार भी यही होगा। बंगाल की जनता ममता बनर्जी पर भरोसा करती है। लोग जानते हैं कि राज्य का विकास केवल तृणमूल सरकार ही कर सकती है।
बंगाल में क्या है राजनीतिक समीकरण?
पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए 148 सीटों की जरूरत होती है। दो तिहाई बहुमत के लिए 196 सीटें चाहिए। अमित शाह इसी तरह के बहुमत का दावा कर रहे हैं।
2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को 213 सीटें मिली थीं। भाजपा को 77 सीटें मिली थीं और वह मुख्य विपक्षी दल बनी थी। कांग्रेस-वाम गठबंधन की स्थिति बहुत खराब रही थी।
भाजपा का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें पश्चिम बंगाल में अच्छी सफलता मिली है। इससे उनका मनोबल बढ़ा है। लेकिन तृणमूल कहती है कि विधानसभा चुनाव अलग होते हैं।
घुसपैठ बना मुख्य चुनावी मुद्दा
2026 के बंगाल चुनाव में घुसपैठ सबसे बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है। भाजपा लगातार इस मुद्दे को उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि बांग्लादेश से लाखों घुसपैठिये बंगाल में आ चुके हैं।
भाजपा का दावा है कि टीएमसी सरकार इन घुसपैठियों को राशन कार्ड, आधार कार्ड और वोटर आईडी दे रही है। इससे बंगाल की जनसांख्यिकी बदल रही है और मूल निवासियों को नुकसान हो रहा है।
दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस इन आरोपों को बेबुनियाद बताती है। पार्टी का कहना है कि यह भाजपा का चुनावी प्रचार है। असल में केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा में नाकाम रही है।
विकास बनाम ध्रुवीकरण की लड़ाई
2026 का चुनाव विकास बनाम ध्रुवीकरण की लड़ाई होगी। तृणमूल कांग्रेस विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ना चाहती है। पार्टी का कहना है कि ममता सरकार ने राज्य में बहुत विकास किया है।
तृणमूल गरीबों के लिए चलाई गई योजनाओं का श्रेय लेना चाहती है। लक्ष्मी भंडार, कन्याश्री, स्वास्थ्य साथी जैसी योजनाएं काफी लोकप्रिय हैं। पार्टी इन्हीं मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी।
वहीं भाजपा घुसपैठ, सुरक्षा और धर्म के मुद्दों पर चुनाव लड़ना चाहती है। पार्टी का मानना है कि ये मुद्दे उन्हें जीत दिला सकते हैं। खासकर हिंदू वोटों को एकजुट करने में ये मुद्दे मदद करेंगे।
कांग्रेस-वाम का क्या होगा?
2026 के चुनाव में कांग्रेस और वाम दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। 2021 में इन दलों का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था। लेकिन अब स्थिति बदल सकती है।
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस-वाम अगर एकजुट होकर चुनाव लड़ें तो वोटों का बंटवारा कम हो सकता है। इससे तृणमूल या भाजपा में से किसी एक को फायदा हो सकता है।
लेकिन अभी तक कांग्रेस और वाम के बीच कोई ठोस गठबंधन नहीं बना है। दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। ऐसे में तिकोना मुकाबला हो सकता है।
मतुआ समुदाय की भूमिका
मतुआ समुदाय बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह समुदाय मुख्य रूप से उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों में केंद्रित है। इनकी संख्या लाखों में है।
2021 के चुनाव में मतुआ समुदाय के वोट बंटे हुए थे। कुछ लोगों ने तृणमूल को वोट दिया तो कुछ ने भाजपा को। इस बार भी यह समुदाय निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
भाजपा और तृणमूल दोनों ही इस समुदाय को साधने की कोशिश में हैं। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) भी इस समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार 2026 का बंगाल चुनाव काफी रोमांचक होगा। हालांकि अभी से कोई ठोस भविष्यवाणी करना मुश्किल है। अभी चुनाव में करीब चार महीने का समय है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि तृणमूल के पास बेहतर संगठन और जमीनी ताकत है। पार्टी के पास मौजूदा सरकार होने का फायदा भी है। लेकिन भाजपा के पास केंद्र की ताकत है।
दूसरी ओर कुछ विश्लेषक कहते हैं कि लोगों में बदलाव की लहर है। लंबे समय तक एक ही पार्टी की सरकार रहने से लोग ऊब जाते हैं। इससे भाजपा को फायदा हो सकता है।
जमीनी हकीकत क्या है?
जमीनी स्तर पर बंगाल में मिश्रित स्थिति दिख रही है। कुछ इलाकों में तृणमूल की पकड़ मजबूत दिख रही है तो कुछ जगहों पर भाजपा का प्रभाव बढ़ा है।
ग्रामीण इलाकों में तृणमूल की पकड़ अभी भी मजबूत है। पार्टी के बूथ स्तर के कार्यकर्ता बहुत सक्रिय हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ भी लोगों को मिल रहा है।
शहरी इलाकों में भाजपा कुछ जमीन बना रही है। मध्यम वर्ग में पार्टी को समर्थन मिल रहा है। लेकिन अभी भी तृणमूल का प्रभाव ज्यादा है।
चुनाव की तैयारी में जुटी पार्टियां
तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों ही चुनाव की जोरदार तैयारी में जुटी हुई हैं। तृणमूल ने अपने संगठन को मजबूत करना शुरू कर दिया है। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की बैठकें हो रही हैं।
भाजपा भी पूरी ताकत लगा रही है। केंद्रीय नेता बार-बार बंगाल का दौरा कर रहे हैं। पार्टी नए सदस्य जोड़ने में जुटी है। जमीनी संगठन को मजबूत करने पर फोकस है।
दोनों पार्टियां अलग-अलग मुद्दों पर काम कर रही हैं। तृणमूल विकास और कल्याणकारी योजनाओं की बात कर रही है। भाजपा घुसपैठ और सुरक्षा के मुद्दे उठा रही है।
क्या होगा चुनाव का नतीजा
अभी से चुनाव के नतीजे की भविष्यवाणी करना मुश्किल है। दोनों पार्टियां अपने-अपने दावे कर रही हैं। अमित शाह कहते हैं कि भाजपा दो तिहाई बहुमत से जीतेगी। ब्रात्य बसु कहते हैं कि भाजपा 50 सीटें भी नहीं जीतेगी।
सच इन दोनों के बीच में कहीं होगा। बंगाल की जनता क्या फैसला करती है, यह अप्रैल 2026 में पता चलेगा। फिलहाल तो दोनों पार्टियां अपनी-अपनी ढपली बजा रही हैं।
एक बात तय है कि 2026 का बंगाल चुनाव काफी दिलचस्प और कड़े मुकाबले वाला होगा। राजनीतिक माहौल गरम है और आने वाले महीनों में यह और तेज होगा।
West Bengal Election: अमित शाह का दो तिहाई बहुमत का दावा
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ता जा रहा है। भाजपा और तृणमूल के बीच दावों और पलटवारों का सिलसिला जारी है। अमित शाह का दो तिहाई बहुमत का दावा और ब्रात्य बसु का भाजपा को 50 सीटें भी नहीं मिलने का दावा दोनों ही चुनावी बयानबाजी का हिस्सा हैं।
घुसपैठ, सुरक्षा, विकास और धर्म जैसे मुद्दे इस चुनाव में मुख्य भूमिका निभाएंगे। जनता अंततः किसे चुनती है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। फिलहाल तो बंगाल की राजनीति पूरे जोश में है।



