डेस्क: हिंदू धर्म में कई ऐसे मंदिर हैं जहां से प्रसाद लाना वर्जित माना जाता है. आपको इन मंदिरों से प्रसाद घर लाने से बचना चाहिए. अगर आप ऐसी गलती करते हैं तो इससे अशुभ फल प्राप्त होते हैं. चलिए इन मंदिरों के कारण के बारे में जानते हैं.
भारत में 5 ऐसे प्रसिद्ध मंदिर हैं जहां का प्रसाद लाना अशुभ माना जाता है
राजस्थान – राजस्थान में स्थित मेहंदीपुर बालाजी मंदिर बुरी आत्माओं और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है. इस मंदिरक से प्रसाद घर लाना मना है. ऐसा माना जाता है कि, प्रसाद घर लाने से नकारात्मक शक्तियां आपका पीछा कर सकती हैं

कामाख्या देवी मंदिर, असम – देवी मां के शक्तिपीठ मंदिरों में से एक कामाख्या देवी मंदिर से प्रसाद घर लाना मना होता है. यह मंदिर देवी मां के मासिक धर्म के दौरान तीन दिनों तक बंद रहता है. इस दौरान मंदिर में प्रवेश करने और प्रसाद ग्रहण लेने की अनुमति नहीं होती है.

काल भैरव, उज्जैन (MP) – मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित भगवान काल भैरव मंदिर में शराब को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है. भक्तों द्वारा इसे ग्रहण करना और घर लाना वर्जित माना जाता है. यह प्रसाद सिर्फ भगवान के लिए होता है.

कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कर्नाटक – कर्नाटक के इस कोटिलिंगेश्वर मंदिर में एक करोड़ शिवलिंग हैं. यहां शिवलिंग पर अर्पित प्रसाद और जल को चंडेश्वर को समर्पित माना जाता है. इसे खाना और घर लाना अशुभ मानते हैंं.

नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश – नैना देवी मंदिर नैनीताल में स्थित नैनी झील के उत्त्तरी किनारे पर है. इस मंदिर में माता को फल और मिठाई का भोग लगाते हैं. इस मंदिर के प्रसाद को मंदिर में ग्रहण करने की सलाह दी जाती है. इसे घर लाना वर्जित माना जाता है.
निष्कर्ष :
भारत में कुछ मंदिरों में प्रसाद को घर ले जाना वर्जित माना जाता है। ये मंदिर विशेष कारणों से अलग हैं — किसी में नकारात्मक शक्तियों का भय है, किसी में प्रसाद केवल भगवान के लिए समर्पित है, और कुछ मंदिरों में धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार प्रसाद केवल मंदिर में ही ग्रहण किया जाता है। इसलिए इन मंदिरों से प्रसाद घर लाने से बचना चाहिए, ताकि अशुभ प्रभाव से बचा जा सके।



