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78,000 करोड़ की कमाई सिर्फ बिस्किट से! 100 साल पुरानी परले-जी की कहानी और विजय चौहान की मेहनत

डेस्क – भारत में हर घर में चाय के साथ परले-जी बिस्किट जरूर मिलता है। यह बिस्किट न सिर्फ बच्चों का पसंदीदा है, बल्कि करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। इसी बिस्किट ने एक परिवार को दुनिया का सबसे अमीर परिवारों में से एक बना दिया। विजय चौहान और उनकी फैमिली ने परले प्रोडक्ट्स के जरिए करीब 78,000 करोड़ रुपये की संपत्ति बना ली है। यह कंपनी 100 साल से ज्यादा पुरानी है और आज भी परिवार के हाथों में है।

कंपनी की शुरुआत: 1929 में मोहनलाल चौहान ने रखी नींव

परले प्रोडक्ट्स की कहानी 1929 में शुरू हुई। गुजरात के पासी के मोहनलाल चौहान ने मुंबई में छोटी सी दुकान खोली। उन्होंने 60,000 रुपये (उस समय की बड़ी रकम) लगाकर जर्मनी से बिस्किट बनाने वाली मशीनें मंगवाईं। शुरुआत में कंपनी स्नैक्स और कैंडी बनाती थी। 1939 में परले-जी ग्लूकोज बिस्किट लॉन्च हुआ, जो आज दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्किट है।स्वतंत्रता के बाद कंपनी ने ब्रिटिश बिस्किट के मुकाबले भारतीय विकल्प पेश किया। 1960 के दशक में परिवार ने बिजनेस बांटा, लेकिन बिस्किट वाला हिस्सा विजय चौहान, शरद और राज चौहान के पास रहा। आज भी यह तीनों भाई मिलकर कंपनी चलाते हैं।

विजय चौहान: परिवार के मुखिया और कंपनी के चेयरमैनImage result for परले-जी image

विजय चौहान परले प्रोडक्ट्स के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। उन्होंने 22 साल की उम्र में फैमिली बिजनेस जॉइन किया। MIT से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। उनके बेटे अजय और भतीजे कंपनी में काम करते हैं। विजय जी का फोकस हमेशा क्वालिटी और अफोर्डेबिलिटी पर रहा। उन्होंने 2016 में पुरानी फैक्ट्री बंद की, लेकिन ब्रांड की लोकप्रियता कम नहीं हुई।

परले-जी: दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्किट

परले-जी की खासियत है – सस्ता और टेस्टी। 2011 में नील्सन रिपोर्ट के मुताबिक, यह दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्किट था। कंपनी हर महीने करोड़ों पैकेट बेचती है। परले-जी की कीमत सालों से नहीं बढ़ी, जिससे यह गरीब- अमीर सबका फेवरेट बना। कंपनी का कुल टर्नओवर 17,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। FY24 में परले बिस्किट्स की कमाई 14,349 करोड़ रुपये रही, प्रॉफिट 1,607 करोड़ रुपये।

फैमिली बिजनेस: तीन कंपनियां, अलग-अलग हिस्से परले फैमिली ने 1960-70 में बिजनेस बांटा।

. परले प्रोडक्ट्स (बिस्किट): विजय चौहान और भाइयों के पास।

. परले एग्रो (ड्रिंक्स जैसे फ्रूटी): प्रकाश चौहान की फैमिली।

. परले बिसलेरी (पानी): रमेश चौहान की फैमिली।

बावजूद इसके, तीनों “परले” नाम इस्तेमाल करते हैं। कंपनी की सफलता के राज: क्वालिटी, अफोर्डेबिलिटी और फैमिली एकता

परले की सफलता का राज है – सस्ते दाम, अच्छा टेस्ट और फैमिली की एकता। कंपनी ने कभी प्राइस नहीं बढ़ाई, जिससे बाजार में मजबूत पकड़ बनी। आज कंपनी 8 देशों में फैक्ट्री चलाती है। नए प्रोडक्ट्स जैसे 20-20, मैगीक्स, मिल्कशक्ति, मेलोडी, मैंगो बाइट, पॉपिन्स भी लोकप्रिय हैं।

निष्कर्ष: मेहनत और सादगी से मिली सफलता

विजय चौहान और उनकी फैमिली की कहानी प्रेरणादायक है। 60,000 रुपये से शुरू हुआ बिजनेस आज 78,000 करोड़ की संपत्ति बन गया। यह दिखाता है कि मेहनत, ईमानदारी और ग्राहकों की जरूरत समझने से कोई भी सपना पूरा हो सकता है। परले-जी सिर्फ बिस्किट नहीं, बल्कि भारतीय परिवारों की यादों का हिस्सा है। यह फैमिली ने साबित किया कि सादगी और कड़ी मेहनत से दुनिया जीती जा सकती है।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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