Jharkhand News: झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन पर प्रकाशित कॉफी टेबल बुक को देखकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन भावुक हो गईं। कॉफी टेबल बुक के विमोचन के बाद झामुमो के सीनियर नेता यह पुस्तक लेकर रूपी सोरेन के पास पहुंचे और उन्हें एक एक पन्ना पलटकर शिबू सोरेन से जुड़ी पुरानी तस्वीरें दिखाईं। पुरानी यादों को ताजा करती इन तस्वीरों को देखते हुए रूपी सोरेन कभी मुस्कुराईं तो कभी भावुक हो गईं। विशेष रूप से अपने ज्येष्ठ पुत्र दुर्गा सोरेन की तस्वीर देखकर उनकी आंखें डबडबा गईं और वे अपनी भावनाओं को संभाल नहीं पाईं।
झामुमो नेताओं ने दिखाई कॉफी टेबल बुक
कॉफी टेबल बुक के विमोचन के बाद झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य और पार्टी नेता मनोज पांडेय यह पुस्तक लेकर रूपी सोरेन के पास पहुंचे। वहां बैठकर उन्होंने एक एक पन्ना पलटकर रूपी सोरेन को पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन से जुड़ी पुरानी तस्वीरें दिखाईं। यह एक भावनात्मक क्षण था जब रूपी सोरेन ने अपने परिवार के इतिहास और झामुमो के संघर्ष को इन तस्वीरों के माध्यम से फिर से जिया।
कॉफी टेबल बुक में शिबू सोरेन के राजनीतिक जीवन, झामुमो के संघर्ष और झारखंड आंदोलन से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरें और जानकारियां संकलित हैं। यह पुस्तक झारखंड के राजनीतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
परिवार के सदस्यों को पहचाना
सामूहिक तस्वीरों में रूपी सोरेन ने झामुमो के कई पुराने नेताओं को पहचाना। उन्होंने शैलेंद्र महतो, सूरज मंडल, निर्मल महतो और अन्य नेताओं की तस्वीरों को देखा। इन तस्वीरों को पहचानते हुए उनके अधरों पर मुस्कान की हल्की लकीर दिखी। ये सभी नेता झामुमो के संघर्ष काल में शिबू सोरेन के साथ रहे और झारखंड राज्य बनाने के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रूपी सोरेन ने एक एक तस्वीर को ध्यान से देखा और पुराने साथियों को याद किया। यह उनके लिए उन दिनों की याद ताजा करने वाला अनुभव था जब झामुमो का संघर्ष अपने चरम पर था और झारखंड राज्य के निर्माण के लिए लंबी लड़ाई चल रही थी।
दुर्गा सोरेन की याद में भावुक
तस्वीरों को देखने के क्रम में रूपी सोरेन को अपने ज्येष्ठ पुत्र दुर्गा सोरेन की याद आ गई। एक तस्वीर में शिबू सोरेन भाषण देते दिख रहे थे और उनके पीछे दुर्गा सोरेन खड़े थे। इस तस्वीर को देखते ही रूपी सोरेन की आंखें डबडबा गईं। कंपकंपाते होठों से उन्होंने दुर्गा सोरेन का नाम भी लिया और पार्टी नेताओं की ओर देखा।
यह एक अत्यंत भावुक क्षण था। दुर्गा सोरेन का निधन परिवार के लिए एक बड़ा आघात था। वे झामुमो के युवा नेता थे और उनसे बड़ी उम्मीदें थीं। उनकी असमय मृत्यु ने पूरे परिवार को गहरा सदमा पहुंचाया था।
झामुमो नेताओं की समझदारी
झामुमो नेताओं को यह बात समझते देर नहीं लगी कि रूपी सोरेन दुर्गा की याद में भावुक हो रही हैं और माहौल अब गमगीन हो सकता है। इसलिए उन्होंने तुरंत दूसरी तस्वीरें दिखानी शुरू कर दीं। उन्होंने विषय बदलने का प्रयास किया और रूपी सोरेन को परिवार के अन्य सदस्यों की तस्वीरें दिखाईं।
यह राजनीतिक समझदारी और संवेदनशीलता का उदाहरण था। नेताओं ने यह सुनिश्चित किया कि यह अवसर पूरी तरह से भावुक न हो जाए और रूपी सोरेन को अनावश्यक कष्ट न हो।
अन्य तस्वीरों से प्रसन्नता
रूपी सोरेन अपने परिवार के अन्य सदस्यों को कॉफी टेबल बुक में देखकर प्रसन्न हुईं। उन्होंने कौतूहल के साथ सभी तस्वीरों को देखा और एक एक पन्ना पलटा। परिवार के विभिन्न सदस्यों की तस्वीरें देखकर उन्हें खुशी हुई। ये तस्वीरें परिवार के इतिहास और झामुमो के संघर्ष का दस्तावेज हैं।
इसके बाद वे मौके पर मौजूद परिवार के अन्य सदस्यों के साथ चर्चा करने में जुट गईं। उन्होंने तस्वीरों में दिख रहे लोगों और घटनाओं के बारे में बातें कीं। यह एक पारिवारिक संवाद का क्षण था जब पुरानी यादें ताजा हुईं और परिवार के सदस्य एक साथ बैठकर अपने इतिहास को याद किया।
Jharkhand News: शिबू सोरेन का योगदान

शिबू सोरेन झारखंड के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व थे। उन्होंने दशकों तक झारखंड राज्य के लिए संघर्ष किया। झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना करके उन्होंने आदिवासी समुदाय को राजनीतिक शक्ति प्रदान की। वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे और राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
शिबू सोरेन को दिशोम गुरु यानी राष्ट्रीय शिक्षक के नाम से जाना जाता है। वे आदिवासी समुदाय के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं। उनकी कॉफी टेबल बुक झारखंड के राजनीतिक इतिहास और आदिवासी आंदोलन का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
निष्कर्ष: शिबू सोरेन की कॉफी टेबल बुक देखते हुए रूपी सोरेन का भावुक होना स्वाभाविक था। यह पुस्तक केवल तस्वीरों का संग्रह नहीं है बल्कि एक परिवार के संघर्ष, झामुमो के इतिहास और झारखंड आंदोलन का जीवंत दस्तावेज है। दुर्गा सोरेन की याद में आंसू और परिवार के अन्य सदस्यों को देखकर मुस्कान दोनों ही इस बात को दर्शाते हैं कि यह पुस्तक रूपी सोरेन के लिए केवल एक किताब नहीं बल्कि उनके जीवन की यादों का खजाना है।



